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बिहार में कला विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए 300 करोड़ का बजट

कला विवि बनने से युवा कलाकारों का होगा उत्थान : नीतू कुमारी 'नूतन'

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  • भारतीय संगीत नाटक अकादमी ( नई दिल्ली ) की सदस्य हैं डॉ . नीतू
  • कहा- बिहार की प्राचीन संस्कृति की विश्वपटल पर होगी पुनर्स्थापना

voice4bihar desk. बिहार सरकार ने राज्य में तीन सौ करोड़ रुपए की लागत से कला विश्वविद्यालय की स्थापना का फैसला लिया है । यह फैसला अंतरराष्ट्रीय ख्यातिलब्ध गायिका व भारतीय संगीत नाटक अकादमी ( नई दिल्ली ) की सदस्य डॉ . नीतू कुमारी ‘नूतन’ के बहुप्रतीक्षित सुझावों के मद्देनजर लिया गया। पटना स्थित मुख्य सचिवालय के सभागार में पांच फरवरी को उपमुख्यमंत्री सह वित्त मंत्री तारकिशोर प्रसाद की अध्यक्षता में बजट पूर्व हुई बैठक में उक्त आशय का निर्णय लिया गया ।

बता दें कि उक्त बैठक में विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय उपलब्धियों एवं महत्वपूर्ण योगदान देने वाली नामचीन हस्तियों को आमंत्रित कर राज्य के सर्वागीण विकास की दिशा में उनके महत्वपूर्ण सुझाव व बहुमूल्य विचार लिए जाते हैं । पांच फरवरी को हुई बैठक में डॉ . नीतू को भी आमंत्रित किया गया था ।

 

सुप्रसिद्ध गायिका नीतू ने बताया कि विगत वर्ष तत्कालीन उपमुख्यमंत्री सह वित्त मंत्री सुशील मोदी की अध्यक्षता में हुई बैठक में उन्होंने बिहार में कला विश्वविद्यालय स्थापित करने के लिए लिखित तौर पर मांग की थी । डॉ . नीतू ने बताया कि कल की बैठक में कला, संस्कृति एवं युवा विभाग के मंत्री मंगल पाण्डेय एवं पर्यटन विभाग के मंत्री जीवेश कुमार की मौजूदगी में कला, संस्कृति एवं युवा विभाग तथा पर्यटन विभाग के प्रधान सचिव रवि बी. परमार ने घोषणा की है कि सरकार के प्रथम बजट में बिहार में कला विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए तीन सौ करोड़ के बजट को शामिल किया गया है ।

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गायिका व भारतीय संगीत नाटक अकादमी ( नई दिल्ली ) की सदस्य डॉ . नीतू कुमारी ‘नूतन’

सरकार की इस घोषणा का स्वागत करते हुए नामचीन गायिका डॉ. नीतू ने कहा कि बिहार में कला विश्वविद्यालय की स्थापना का निर्णय राष्ट्रहित में है । इससे बिहार की प्रचीन संस्कृति विश्वपटल पर पुनर्स्थापित होगी । युवा कलाकारों का उत्थान होगा , रोजगार के सुनहरे अवसर पैदा होंगे तथा सरकार को राजस्व का लाभ होगा । डॉ . नीतू ने कहा कि राज्य में कला विश्वविद्यालय की स्थापना से प्रयाग संगीत समिति, प्रयागराज तथा प्राचीन कला केंद्र, चंडीगढ़ की तर्ज पर देश के अन्य जगहों पर मान्यता लेकर पढ़ाई की जा सकेगी। साथ ही इस विधा को लोकर महाविद्यालय भी स्थापित किये जा सकेंगे।

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वहीं बिहार में कला के विभिन्न विधाओं की पढ़ाई के लिए देश भर के विद्यार्थी व शोधार्थी बिहार आएंगे , जिससे बिहार को राजस्व का लाभ होगा तथा वे बिहार की संरकृति व परंपरा से रुबरु होंगे । डॉ . नीतू ने कहा कि किसी मुल्क की तरक्की में वहां की परंपरागत संस्कृति के विकास का भी काफी योगदान होता है । संगीत , कला हमारे चेतना व आंतरिक शक्तियों को जाग्रत करते है, जिसकी जरूरत युवा पीढ़ी को है । उन्होंने कहा कि आज की युवा पीढ़ी सही ज्ञान की कमी की वजह से इन शक्तियों से अंजान है ।

विश्वविद्यालय की स्थापना से युवा पीढ़ी संगीत के महत्व को समझेगी। उन्हें जीविकोपार्जन का साधन उपलब्ध होगा तथा शिक्षक व कर्मियों को नौकरियां मिलेंगी । डॉ.नीतू ने कहा कि संगीत शास्त्रवत विधा है, विश्वविद्यालय की स्थापना से युवा पीढ़ी को बिहार की अपनी सरजमी पर कला के विभिन्न विधाओं के अध्ययन का मौका मिलेगा।

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