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उपेंद्र कुशवाहा बने एमएलसी, अब जदयू की ओर से बनेंगे डिप्टी सीएम!

राज्यपाल ने जारी की 12 मनोनीत विधान पार्षदों की सूची

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उपेंद्र कुशवाहा को मंत्री व उपमुख्यमंत्री का पद दिये जाने की सियासी हल्कों में चर्चा

Voice4bihar desk. दो दिन पहले ही जदयू में रालोसपा के आने के बाद उपेंद्र कुशवाहा मनोनीत विधान परिषद सदस्य बनाये गए हैं। इसको लेकर सियासी गलियारों में कई चर्चाएं हैं। विश्वस्त सूत्रों ने बताया कि जल्द ही नीतीश मंत्रिमंडल का विस्तार हो सकता है, जिसमें उपेंद्र कुशवाहा को मंत्री पद दिया जा सकता है। सियासी हल्कों में यह भी चर्चा है कि नीतीश कुमार ने जदयू की तरफ से भी एक डिप्टी सीएम बनाने का मन बना लिया है। अगर ऐसा हुआ तो बिहार में एक मुख्यमंत्री के साथ तीन डिप्टी सीएम हो जाएंगे।

इससे पहले राज्यपाल के आदेश पर जारी अधिसूचना में 12 विधान पार्षद मनोनीत किये गए हैं। संयुक्त सचिव सह संयुक्त मुख्य निर्वाचन पदाधिकार मिथिलेश कुमार साह के हस्ताक्षर से जारी अधिसूचना में कहा गया है कि विधान परिषद की खाली पड़ी 12 सीटों को भरने के लिए यह मनोनयन किया गया है। इनमें जदयू नेता व वर्तमान शिक्षा मंत्री अशोक चौधरी, भाजपा नेता व मंत्री जनक राम के बाद तीसरे स्थान पर उपेंद्र कुशवाहा का नाम है।

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इनके अलावा नवमनोनीत एमएससी की सूची में प्रो. डा. राम वचन राय, संजय कुमार सिंह, ललन कुमार सर्राफ, प्रो. डा. राजेन्द्र प्रसाद गुप्ता, संजय सिंह, देवेश कुमार, डा. प्रमोद कुमार, घनश्याम ठाकुर व भाजपा नेत्री निवेदिता सिंह शामिल हैं। रालोसपा की ओर से सिर्फ एक ही नाम शामिल है। पार्टी के कई अन्य नेता भी आस लगाए बैठे थे, जिन्हें इस सूची में जगह नहीं मिली।

जदयू प्रवक्ता ने अपनाया बगावती सुर, कायस्थ समाज की उपेक्षा का आरोप

दूसरी ओर सूची में नाम नहीं होने से खफा जदयू प्रवक्ता राजीव रंजन ने बगावती सुर अपना लिया है। पार्टी प्रवक्ता ने कहा जदयू के छह सदस्यों के मनोनयन को मैं मानता हूं कि यह मनोनयन अन्यायपूर्ण है। उन्होंने इस सूची से आहत होने की बात कहते हुए कहा कि जदयू के प्रति निष्ठा व पार्टी का पक्ष मजबूती से रखते हुए पार्टी का सिर कभी झुकने नहीं दिया। ऐसे नेता की अनदेखी को कहीं से सही नहीं ठहराया जा सकता है।

मुख्यमंत्री के समक्ष अपनी बात रखेंगे जदयू प्रवक्ता राजीव रंजन

उन्होंने यह भी कहा कि लंबे समय से कायस्थ समाज को हाशिए पर रखने की कोशिश हो रही है। पहले विधानसभा में अनदेखी की गई और अब विधान परिषद में अनदेखा किया गया। राजीव रंजन ने कहा जेपी आंदोलन से निकले नेता नहीं चाहते कि कायस्थ जाति को राजनीति में जगह मिले। यह बहुत आहत करने वाला फैसला है। जदयू प्रवक्ता राजीव रंजन ने कहा कि वह इस मामले में वे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के समक्ष अपनी बात रखेंगे।

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