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हिमालय में फिर मंडरा रहा ग्लेशियर फटने का खतरा, बिहार पर भी संकट के बादल

नेपाल के हिमालय में ग्लशियर फटा तो बिहार में भी आ सकती है उत्तराखंड जैसी तबाही

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  • कोसी बेसिन (जलाधार) में 64 ग्लेशियर, यहां 42 हिमताल काफी ही जोखिमपूर्ण अवस्था में
  • अनुसंधान में दावा- हिमालय के 15 ग्लेशियर किसी भी वक़्त फुट कर तबाह कर सकते हैं मानवीय बस्तियां
  • नेपाल, भारत तथा चीन में तीन हजार 624 ग्लेशियर होने का अनुसंधान कर्ता का दावा

राजेश कुमार शर्मा की रिपोर्ट

जोगबनी (voice4bihar desk)। पिछले दिनों उत्तराखण्ड के चमोली जिले में जिस तरह से पर्वत की धाराओं से पिघल कर निकले जल प्रलय ने भारी तबाही मचाई थी, वैसी तबाही का खतरा बिहार व पड़ोसी देश नेपाल पर भी मंडरा रहा है। नेपाल के हिमालय की गोद से निकलने वाली विभिन्न पहाड़ों के बीच ऐसे ही हजारो गेलेशियर का पता लगाने के लिए बनी कमेटी ने इसकी आशंका व्यक्त करते हुए ऐसे हजारों गेलेशियर होने की रिपोर्ट सार्वजनिक की है।

क्या है ग्लेशियर का फटना या टूटना

पहाड़ियों के बीच की खाई में वर्षों से जमा पानी की धारा जब पहाड़ से गिरने वाले पत्थरों से भरती है तो पहाड़ी इलाकों से सटी मानवीय बस्तियों में ऐसे ही प्रलय की आशंका हमेशा से बनी रहती है। सर्दियों के मौसम में बर्फ का एक बड़ा टुकड़ा जब पहाड़ों की गोद में रहे ऐसे पानी की नदी में गिरती है तो प्रलयंकारी बाढ़ का स्वरुप अख्तियार कर लेता है। हाल के दिनों में उत्तराखंड के चमोली जिले में हुए ऐसे ही घटनाक्रम से सचेत होते हुए यह अनुसंधान किया गया, जिसमें नेपाल के पहाड़ी इलाकों में बने ऐसे छोटे-छोटे हिमताल व हिमनदी के घर के रूप में परिचित नेपाल में भी ऐसे संकट की बड़ी सम्भावना के प्रति विशेषज्ञों ने सचेत किया है।

अध्ययन की रिपोर्ट की गयी सार्वजनिक

हिमनदी, हिमताल व हिमालयी हवा पानी के सम्बंध में अध्ययन कर रहे ‘अन्तर्राष्ट्रीय एकीकृत पर्वतीय विकास केन्द्र’ (इसिमोड) व संयुक्त राष्ट्रसंघ विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) की ओर से पिछले दिनों ही सार्वजनिक किए गए एक अध्ययन रिपोर्ट के अनुसार नेपाल में भी हिमताल व हिमनदी से बड़ा खतरा दिख रहा है । इसिमोड व यूएनडीपी साथ मिलकर तकरीबन तीन वर्ष से इस संबंधित अध्ययन कर रही है, जिसके अनुसार पहाड़ों की गोद में ऐसे सैकड़ों हिमताल की पहचान की गई है जो कभी भी फूट सकता है। सर्वाजनिक किये गए अध्ययन रिपोर्ट के अनुसार नेपाल, भारत तथा चीन में मानवीय बस्ती को क्षति पहुंचाने वाले ऐसे तीन हजार 624 ग्लेशियर का पता चला है।

कोसी बेसिन (जलाधार) में सबसे ज्यादा ग्लेशियर मौजूद

इसिमोड व यूएनडीपी की रिपोर्ट के अनुसार कोसी बेसिन (जलाधार) अन्तर्गत सबसे ज्यादा ग्लेशियर देखा गया है। इनमें कोसी बेसिन अन्तर्गत 64, कर्णाली बेसिन में एक हजार एक सौ 28 व गण्डकी बेसिन में चार सौ 32 ग्लेशियर होने की बात कही गयी है। सेटलाइट इमेज व अन्य माध्यम से किये गए अनुसंधान के बाद जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि 47 गेलेशियर किसी भी वक़्त फूटने से नेपाल तरफ की मानव बस्ती को बड़ी क्षति पहुंचा सकता है। इससे ज्यादा नुकसान होने की आशंका कोसी बेसिन अर्थात कोसी तटीय क्षेत्र के इलाके में दिखाया गया है।

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कोसी तटीय इलाकों में भारी तबाही की आशंका

बता दें कि कोसी तटीय इलाका का अधिकतम भाग बिहार में ही पड़ता है। नेपाल से आकर बिहार से गुजरने वाली कोसी नदी अपने रौद्र रुप के लिए जानी जाती है। ऐसे में यदि ग्लेशियर टूटा तो तबाही का अनुमान लगाना भी मुश्किल होगा। कोसी बेसिन अन्तर्गत 42 हिमताल काफी ही जोखिमपूर्ण अवस्था में होने के कारण इस ग्लेशियर के फूटने का खतरा ज्यादा रहने की बात इसिमोड के रिपोर्ट में है। वही गण्डकी बेसिन अन्तर्गत तीन ग्लेशियर कर्णाली बेसिन अन्तर्गत दो ग्लेशियर के फटने की संभावना बताई गई है।

25 ग्लशियर चीन की तरफ तो 21 नेपाल की तरफ, भारत की ओर सिर्फ एक

रिपोर्ट में बताया गया है कि हिमालय के 25 ग्लेशियर चीन की तरफ है तो 21 नेपाल की तरफ है जो काफी कमजोर है। वही भारत की तरफ एक ग्लेशियर है । इसिमोड के द्वारा जारी रिपोर्ट का आधार पहाड़ी इलाकों में के भौगोलिक अवस्थिति, बादल फटने सहित अन्य सम्भावना को आधार बना कर जोखिमपूर्ण गेलेशियर के पहचान करने की बात कही गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि नेपाल में 1997 से ही गेलेसियर में विस्फोट हो कर क्षति पहुचाते रहा है वही 24 वर्ष के अवधि में26 गेलेशियर बिस्फोट होने की बात कही गई है। जिसमें 14 ग्लेशियर नेपाल में ही फटा है। जिससे वर्षो से प्राकृतिक प्रकोप से बड़ा मानवीय व भौतिक क्षति होता आ रहा है।

नेपाल के पहाड़ी में क्यों बढ़ रहा है ग्लेशियर?

नेपाल में ग्लेशियर की संख्या लगातार बढ़ रही है। रिपोर्ट के अनुसार1977 में 1960 गेलेसियर कोसी बेसिन में मिला था वही 2010 में 2168 गेलेसियर मिलने की बात कही गई है वही अन्य रिभर बेसिन में भी गेलेसियर बढ़ने के संकेत मिले है। जानकारों की माने तो नेपाल में लगातार ग्लेशियर बढ़ने का कारण जलवायु परिवर्तन व बढ़ रहे तापक्रम के कारण यह परिवर्तन नजर आया है।जिसके कारण सिर्फ नेपाल ही नही सभी हिमाल में यह बदलाव देखने को मिल रहा है। इसिमोड व यूएनडीपी के द्वारा सार्वजनिक की गयी रिपोर्ट के अनुसार 15 ग्लेशियर किसी भी वक़्त विस्फोट कर मानवीय नुकसान पहुंचा सकते हैं।

अतिजोखिम में है हिमताल इम्जा च्छो

प्रदेश एक के सोलुखुम्बु में रहे इम्जा नेपाल के सबसे जोखिमपूर्ण हिमतालमध्य का एक है। इम्जा हिमनदी से आए पानी जम कर ग्लशियर बनने की बात कही जाती रही है। यह हिमताल 1960 से ही अस्तित्व में है। इसमे पानी के मात्रा की वृद्धि दर (इन्क्रिज रेट) 42.1 प्रतिशत रहने की बात इसिमोड के रिपोर्ट में है। खतरा बढ़ने के बाद 2016 से इम्जा के पानी को कटान किया जा रहा है।

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