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सियाराम विवाह की अलौकिक छटा देख भावविभोर हुए श्रद्धालु

समस्तीपुर के पटसा गांव में सियाराम विवाह महोत्सव में जीवंत हुई सीता-राम विवाह की कल्पना

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मिथिला में प्रचलित सभी विधि-विधान के साथ संपन्न हुआ श्रीराम सहित चारो भाइयों का विवाह

Voice4bihar desk. समस्तीपुर जिले के पटसा गांव में शनिवार की शाम जब सियाराम विवाह महोत्सव शुरू हुआ तो ऐसा लगा मानो जनकपुर इसी गांव में आ बसा है। सीता की सखियों की ठिठोली और राजा दशरथ का व्यंग्य फिजाओं को बेहद खुशनुमा बना रहा था। सीता की सखियां राम को तानें देती हैं और प्रभु राम मुस्कुराते रहते हैं। बीच-बीच में दशरथ जरूर माहौल को अपने पक्ष में करने की कोशिश करते हैं।

लक्ष्मण, जो बात बात पर धनुष उठा लेते हैं, वे भी आज जनकपुर में मौन हैं। राम के साथ लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न भी दूल्हा बनकर आज जनकपुर में पधारे हैं। जनकपुर में दूल्हे के रूप में आए चारो शूरवीर तीनों लोकों को जीतने की क्षमता रखते हैं, पर आज जनकपुर में इन्होंने हथियार डाल दिए हैं। नजारा ऐसा कि आज इस उत्सव में शामिल होने के लिए इस धरती के सभी जीव जंतु तो आए ही हैं स्वर्ग लोक से देवी-देवता भी पधारे हों। वहां मौजूद सभी लोग त्रिलोक के सर्व शक्तिमान प्रभु श्रीराम पर हो रही गालियों की बौछार का आनंद ले रहे हैं।

विवाह के वक्त मंडप में बैठे श्रीराम व जानकी।
विवाह के वक्त मंडप में बैठे श्रीराम व जानकी।

भजन गायिकाओं ने विवाह महोत्सव में बांधा समां

प्रसिद्ध भजन गायिका तुलसी दीदी, ममता दीदी और इनकी आठ बहनों ने अपनी मंडली के साथ सियाराम विवाह महोत्सव का ऐसा समां बांधा कि हजारों दर्शकों ने शाम सात बजे जो अपना स्थान ग्रहण किया वे देर रात तक अपनी सीट पर जमे रहे। तुलसी दीदी, ममता सखी और युगल प्रिया मिथिलांचल के कुछ पारंपरिक और कुछ आधुनिक गीतों से प्रभु राम गालियां दे रहीं थीं। वहीं “हमरा संअ बढि क केकर भाग हम मिथिला वासी और मिथिला के बढि गेलई शान हे ….” जैसे गीत गाकर उनका बखान भी कर रहीं थीं।

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तुलसी दीदी और उनकी टीम की प्रस्तुति कितनी मनमोहक थी इसका अंदाजा इसी से लगा सकते हैं कि महोत्सव में वृंदावन, सीतामढ़ी और जनकपुर से आए कथा व्यास भी खुद को झूमने से नहीं रोक सके। इन्हें मंच पर झूमते देख लगा देवता झूम रहे हैं।

सियाराम विवाह के साक्षी बने गांव-जवार व बाहर से आए श्रद्धालु।

कन्यादान के वक्त माहौल हुआ गमगीन

जनवासे पर बारात संग प्रभु श्रीराम के आने से लेकर, विवाह मंडप की तैयारी, दूल्हों का विवाह मंडप पर पहुंचना, औठंगर, कन्यादान, सिंदूरदान और कोहबर जैसे मिथिलांचल में विवाह में आम तौर पर होने वाले सभी विधि विधान का पारंपरिक तरीके से मंचन किया गया।‌ कन्यादान के वक्त माहौल गमगीन हो गया।

दिन में निकली बारात, रात में संपन्न हुआ विवाह

इससे पूर्व सियाराम विवाह महोत्सव को लेकर शनिवार को दिन में ही पटसा गांव में भव्य बारात निकली। पटसा गांव के संकटमोचन हनुमान मंदिर से निकली बारात यात्रा में शामिल अयोध्या, वृंदावन, सीतामढ़ी और जनकपुर से आए संत इसकी शोभा में चार चांद लगा रहे थे। रथ पर सवार राम, लक्ष्मण के दर्शन करने के लिए सड़क के दोनों ओर सैकड़ों ग्रामवासी खड़े थे।

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