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रोहतास और कैमूर में भ्रष्टाचार की एक जैसी कहानी, फिर किसकी मेहरबानी से मस्त हैं हिमानी!

गबन की आरोपी अफसर की गिरफ्तारी रोकने के लिए रोहतास पुलिस पर किसका दबाव?

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नगर विकास एवं आवास विभाग से जुड़े हैं दोनों मामले, भभुआ में भ्रष्ट अफसर पर गिर चुकी है गाज

सासाराम में जिस केस में मुख्य पार्षद की हो चुकी है गिरफ्तारी, उसमें सह अभियुक्तों पर आंच तक नहीं

रोहतास से अभिषेक कुमार के साथ बजरंगी कुमार सुमन की रिपोर्ट

सासाराम (voice4bihar news)। बिहार के कैमूर जिले में भ्रष्टाचार का एक मामला मुख्यमंत्री के जनता दरबार में आया तो भ्रष्ट अफसर पर तत्काल कार्रवाई हो गयी, लेकिन इससे भी गंभीर मामले में एक अफसर व अभियंता को अभयदान मिला हुआ है। ताज्जुब की बात यह है कि विकास योजनाओं में गड़बड़ी और सरकारी राशि गबन के मामले में सह अभियुक्त रहीं मुख्य पार्षद कंचन देवी को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेजा जा चुका है, जबकि तत्कालीन कार्यपालक पदाधिकारी कुमारी हिमानी व कनीय अभियंता अरुण कुमार सिंह पर हाथ डालने में पुलिस भी परहेज कर रही है।

मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप से अनुभूति श्रीवास्तव पर गिरी गाज, कुमारी हिमानी को मिल रहा अभयदान

दरअसल कैमूर जिले के भभुआ नगर परिषद में करोड़ों के घोटाला का पर्दाफाश डीएम की जांच रिपोर्ट में हुआ था। डीएम ने भ्रष्ट अफसर पर कार्रवाई के लिए नगर विकास एवं आवास विभाग को लिखा था, लेकिन इस पर एक्शन की बजाय विभाग में फाइल दबा दी गयी। इसी मामले को लेकर पिछले दिनों एक सोशल एक्टिविस्ट ने मुख्यमंत्री के जनता दरबार में गुहार लगाई थी।

जाहिर है, मुख्यमंत्री ने संज्ञान लिया तो एक्शन भी हुआ। मामूली प्रक्रिया के बाद आरोपी अफसर अनुभूति श्रीवास्तव को सस्पेंड कर दिया गया। इसके विपरीत सासाराम में भ्रष्टाचार की आरोपी अफसर व अभियंता की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है। करीब दो माह पहले कंचन देवी की गिरफ्तारी के बाद मामला ठंडे बस्ते में चला गया।

दो माह बाद भी भ्रष्टाचार के दो अभियुक्तों को नहीं ढूंढ़ सकी पुलिस

विगत 18 जून को मुख्य पार्षद कंचन देवी की गिरफ्तारी के समय रोहतास एसपी ने दावा किया था कि इस कांड में संलिप्त अन्य अभियुक्तों की गिरफ्तारी के लिए उनके संभावित ठिकानों पर पुलिस छापेमारी कर रही है। इसके एक माह बाद भी पुलिस यह पता नहीं लगा सकी कि दोनों अभियुक्त कहां छुपे बैठे हैं।

इस बीच नगर विकास विभाग की वेबसाइट पर दी गयी जानकारी से पता चला है कि कुमारी हिमानी अभी गया जिले के बोधगया नगर परिषद में बतौर कार्यपालक पदाधिकारी तैनात हैं, लेकिन रोहतास पुलिस इससे अनजान बनी हुई है। सूत्र बताते हैं कि पदस्थापना की प्रतीक्षा के बाद इन्होंने 17 अप्रैल 2021 को बोधगया में पदभार ग्रहण किया था।  आश्चर्य यह है कि भ्रष्टाचार के आरोप में केस दर्ज होने के ठीक डेढ़ महीने बाद गया में पदभार ग्रहण किया, लेकिन पुलिस को पता नहीं चला।

यह भी देखें : मुख्य पार्षद, कार्यपालक पदाधिकारी और कनीय अभियन्ता पर एफआईआर

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सरकारी योजनाएं पूरी किये बिना ही निकाल ली गई राशि

यह मामला योजनाओं में की गई गड़बड़ी का है, जिसमें बगैर कार्य कराए दूसरे मद की राशि से पूरी की गई योजना के आलोक में अन्य मद की राशि की वित्तीय वर्ष 2019-20 में मापी पुस्तिका तैयार कर निकासी कर ली गयी थी। योजना में गड़बड़ी का मामला नगर परिषद के वार्ड संख्या 11 से जुड़ा है। यहां 14वें वित्त योजना से 05 और नगर निधि की 02 सहित कुल 07 योजनाओं के संबंध में नगर परिषद के वर्तमान कार्यपालक पदाधिकारी अभिषेक आनंद ने जांच प्रतिवेदन सौंपा था। विगत 13 अगस्त 2020 को पत्रांक संख्या 2495 के द्वारा रोहतास जिला पदाधिकारी को यह जांच प्रतिवेदन समर्पित किया गया था।

डीएम के निर्देश पर हुई थी मुख्य पार्षद व कार्यपालक पदाधिकारी के विरुद्ध प्राथमिकी

जिलाधिकारी के उक्त निर्देश के आलोक में कार्यपालक पदाधिकारी अभिषेक आनंद ने स्थानीय नगर थाने में तत्कालीन कार्यपालक पदाधिकारी कुमारी हिमानी, मुख्य पार्षद कंचन देवी सहित कनीय अभियंता अरुण कुमार सिंह के विरुद्ध नामजद प्राथमिकी दर्ज कराई है। नगर थाने में धारा 419, 420, 467, 468, 471, 120 बी, 406/34 के तहत कांड संख्या 156/21 दर्ज हुआ था जिसके आलोक में गिरफ्तारी की कार्रवाई हुई है। कुमारी हिमानी भी इसी मामले में अभियुक्त हैं, जिनकी गिरफ्तारी अब तक नहीं हो पायी है।

सासाराम नप की पूर्व मुख्य पार्षद व कार्यपालक पदाधिकारी (फाइल फोटो) तथा एफआईआर की प्रति।

इसे भी पढ़ें : सासाराम नगर परिषद की मुख्य पार्षद कंचन देवी गिरफ्तार

एक बार निलंबन के आरोप से मिल चुका है अभयदान

बिहार नगर सेवा की पदाधिकारी कुमारी हिमानी पूर्व में भी अनियमितता को लेकर चर्चा में रही हैं। उनके ऊपर वाहनों के क्रय एवं आपूर्ति में अनियमितता के साथ-साथ जिला लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी को गलत एवं भ्रामक प्रतिवेदन समर्पित करने का आरोप लग चुका है। इस आरोप के आलोक में डीएम ने अनुशासनिक कार्रवाई की अनुशंसा नगर विकास एवं आवास विभाग में की थी। इसके आलोक में सरकार के विशेष सचिव ने 25 मार्च 2020 को हिमानी को निलंबित करने का आदेश जारी किया था।

हालांकि इसके 4 माह बाद ही विभाग ने अभयदान दे दिया।  इसके पीछे वजह यह बतायी गयी थी कि विभाग में पदाधिकारियों की कमी को देखते हुए कार्य हित में कुमारी हिमानी को तत्काल प्रभाव से निलंबन मुक्त किया जाता है। इस संबंध में निर्देश 6 अगस्त 2020 को जारी पत्र संख्या 25/ 81 द्वारा जारी किया जा चुका है। ऐसे में देखना दिलचस्प होगा कि गिरफ्तारी की लटकती तलवार के बावजूद कुमारी हिमानी को इस बार भी अभयदान मिलता है अथवा नहीं?

कुमारी हिमानी कहां पदस्थापित हैं, यह रोहतास पुलिस को पता नहीं

इस संबंध में सासाराम टाउन थानाध्यक्ष कामाख्या सिंह ने कहा कि इस केस में गंभीर आरोप है और सभी अभियुक्तों की गिरफ्तारी तय है। केस का सही पोजिशन इसके अनुसंधानकर्ता अशोक कुमार ही बताएंगे। इस बाबत  पुलिस अधीक्षक आशीष भारती ने बताया कि अभियुक्तों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस प्रयासरत है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि आरोपी अफसर कुमारी हिमानी के कहीं और पदस्थापित होने की जानकारी उन्हें नहीं है। दूसरी ओर सूत्र बताते हैं कि बोधगया में पदस्थापना के बावजूद कार्यपालक पदाधिकारी बहुत कम लोगों से मिलती हैं।

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