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बिहार में पकड़ा गया जाली नोटों का सबसे बड़ा नेटवर्क, 7.50 लाख के भारतीय जाली नोट जब्त

गिरोह के सरगना व उसकी पत्नी समेत 9 धंधेबाजों को स्पेशल पुलिस टीम ने दबोचा

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नेपाल से आता था नोट छापने का कागज, बिहार में चलता था फर्जी टकसाल

मुजफ्फरपुर के अलावा सीतामढ़ी, दरभंगा, मोतिहारी समेत कई जिलों में जाल फैला

मुजफ्फरपुर (voice4bihar news)। उत्तर बिहार में जाली नोटों की छपाई कर बाजार में खपाने वाले एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश पुलिस की विशेष टीम ने किया है। स्पेशल टीम ने मुजफ्फरपुर जिले के मोतीपुर, सीतामढ़ी के मेजरगंज व पूर्वी चंपारण के पताही में छापेमारी कर इस रैकेट को बेनकाब करते हुए गिरोह के सरगना समेत 9 धंधेबाजों को धर दबोचा है। साथ ही 7.50 लाख की फेक करेंसी और 50 हजार रुपये के असली नोट बरामद किये हैं।

मोतिहारी के रतनसायर गांव में अजय भगत के घर में होती थी नोट की छपाई

बताया जाता है कि इस गिरोह का सरगना पूर्वी चंपारण जिले के पताही थाना क्षेत्र अंतर्गत रतन सायर गांव निवासी अजय भगत है। इसके साथ ही तीन जिलों के विभिन्न स्थानों पर छापेमारी में इस गिरोह से जुड़े 8 धंधेबाज पकड़े गए हैं। पुलिस ने जाली नोट के धंधेबाजों के ठिकानों से 7.50 लाख रुपए के भारतीय जाली नोट तथा 50 हजार के असली नोट जब्त किये हैं। संभवत: नोटबंदी के बाद बिहार में पकड़ी गई जाली नोटों की यह सबसे बड़ी खेप है।

पत्नी व बच्चों को साथ लेकर फर्जी नोट पहुंचाने निकलता था सरगना

मुजफ्फरपुर के सिटी एसपी राजेश कुमार ने इसका खुलासा करते हुए बताया कि जाली नोट तस्करी का सरगना अजय भगत नेपाल से कागज मंगवाकर अपने घर में ही भारतीय जाली नोट की छपाई करता था। वह इतना शातिर है कि तैयार नोटों को बाजार में खपाने के लिए किराये की गाड़ी का इस्तेमाल करता था और अपने साथ पत्नी व बच्चों को भी साथ ले जाता था। शायद महिला व बच्चों को साथ में देखकर किसी को इसकी कारिस्तानी पर शक नहीं होता था।

उतर बिहार के कई जिलों में खपाये जा रहे थे जाली नोट

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सिटी एसपी ने मीडियाकर्मियों को बताया कि रविवार को इस गिरोह के सरगना अजय भगत सहित तीन लोगों को उस वक्त दबोचा गया, जब वे जाली नोटों के बंडल लेकर बाजार में खपाने जा रहे थे। पुलिस ने उन्हें मुजफ्फरपुर के मोतीपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत NH-28 पर रतनपुरा से गिरफ्तार किया। अजय भगत से की गई पूछताछ के बाद सीतामढ़ी के मेजरगंज में छापेमारी की गयी, जहां काफी संख्या में नोट बरामद किए गए।

नेशनल हाईवे पर नाकेबंदी कर पुलिस ने सरगना को दबोचा

जाली नोटों का सौदागर अजय भगत मोतिहारी से एक अटैची में जाली नोट की खेप लेकर एक भाड़े की गाड़ी से अपनी पत्नी सुनीता देवी के साथ मुजफ्फरपुर आ रहा था, जहां ये नोट इस गिरोह के दूसरे धंधेबाजों को देना था। इस बात की भनक पुलिस को लग गयी और एएसपी पश्चिमी सैयद इमरान मसूद के नेतृत्व में मोतीपुर थानाध्यक्ष अनिल कुमार ने विशेष टीम के साथ रविवार को हाईवे पर नाकेबंदी कर दी। जैसे ही अजय की गाड़ी रतनपुरा के पास पहुंची, पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर लिया।

अजय व उसकी पत्नी की निशानदेही पर जाली नोट की खेप लेने आ रहे गायघाट इलाके के रामनगर निवासी मंजीत कुमार सिंह को दबोचा गया। पूछताछ में पता चला कि इन तस्करों का मुजफ्फरपुर के अलावा सीतामढ़ी, दरभंगा, मोतिहारी समेत कई जिलों में जाल फैला है और इस धंधे में कई धंधेबाज सक्रिय हैं। पकड़े गए गिरोह के तीन सदस्यों की निशानदेही पर मोतिहारी में छापेमारी की गई, वहां से आधा दर्जन लोगों को गिरफ्तार किया गया।

एक ही गांव के छह धंधेबाज पकड़े गए

सिटी एसपी ने बताया कि गिरफ्तार जाली नोट के धंधेबाजों में मधुरंजन कुमार, चितरंजन कुमार, राकेश महतो व राजा कुमार सिंह भी मोतिहारी के उसी गांव के रहने वाले हैं, जहां इस गिरोह के सरगना अजय भगत का गांव हैं। अन्य गिरफ्तार लोगों में पूर्वी चंपारण के पताही का गोलू सिंह, पकड़ीदयाल शेखपुरवा का मनोज कुमार शामिल हैं।

नेपाल से बिहार तक फैला जाली नोटों का नेटवर्क

सिटी एसपी ने बताया कि अजय भगत सीतामढ़ी जिले के मेजरगंज के अपने एक रिश्तेदार के माध्यम से जाली नोट की सप्लाई गांव के हाट बाजारों में करा रहा था। इसका नेटवर्क नेपाल में बैठकर भारतीय जाली नोटों का धंधा करने वाले अन्य तस्करों से जुड़ा है। जांच पड़ताल के दौरान नेपाल से बिहार तक फैले भारतीय जाली नोटों का व्यापार करने वाले एक बड़े सिंडिकेट का पता चला है। पुलिस इस सिंडिकेट को ध्वस्त करने में जुट गयी है।

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