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सिस्टम की खामियों ले ली जान, मरने पर दी गयी 21 रायफल की सलामी

पंचतत्व में विलीन हुए पूर्व मंत्री मेवालाल

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सरकार के प्रतिनिधि के रुप में पहुंचे सम्राट चौधरी, जदयू ने उमेश कुशवाहा को भेजा

मुख्यमंत्री या दोनों उप मुख्यमंत्रियों में से कोई भी नहीं पहुंचा दाह-संस्कार में

Voice4bihar news. बिहार सरकार में 72 घंटों के लिए मंत्री रहे मेवालाल चौधरी को आज 21 रायफल की सलामी के बीच पूरे राजकीय सम्मान के साथ पंचतत्व में विलीन कर दिया गया, लेकिन जीते जी मेवालाल के साथ हुए बर्ताव का जवाब अब तक नहीं मिला। मुंगेर जिले में कोरोना जांच के लिए 12 अप्रैल को सेंपल देने के बाद से लेकर पटना में इलाज को लेकर हुई लापरवाही व सौतेले व्यवहार ने ही उनकी जान ली है, यह बात अब जगजाहिर हो चुकी है।

आम जन के बीच यह सवाल उठना लाजिमी है कि जब एक सत्ताधारी दल के विधायक व पूर्व मंत्री को सही वक्त पर इलाज नहीं मिल सकता तो फिर आम नागरिक का क्या होगा? बहरहाल मेवालाल चौधरी का निधन होते ही मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शोक संवेदना जताने में तनिक भी देर नहीं की। मीडिया में जारी शोक संदेश के साथ ही राजकीय सम्मान के साथ अंत्यक्रिया की बात कह दी। लिहाजा वह सारे प्रोटोकॉल पूरे किये गए जो राजकीय सम्मान के लिए होता है।सरकार के प्रतिनिधि के तौर पर एक मंत्री भी इस मौके पर उपस्थित रहे।

आम तौर पर कोरोना मरीजों का दाह संस्कार राजधानी के बांसघाट पर किया जाना है, लेकिन मेवालाल का दाह संस्कार पटना के गुलबी घाट पर हुआ। तिरंगे में लिपटे पार्थिव शरीर के पास शोक वाली धुन बजाई गयी। एक-एक कर 21 रायफल से फायर किया गया। राजकीय सम्मान के बतौर पंचायती राज मंत्री सम्राट चौधरी की मौजूदगी रही, जबकि पार्टी की तरफ से प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुश्वाहा ने अंत्येष्टि में भाग लिया। हालांकि ऐसी उम्मीद जताई जा रही थी कि मुख्यमंत्री अथवा दोनों उपमुख्यमंत्रियों में से कोई एक इस मौके पर मौजूद होगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

जहां जाते हैं मुख्यमंत्री, वहीं जाते हैं दोनों डिप्टी सीएम!

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इस बीच चर्चा यह भी है कि दोनों डिप्टी सीएम उसी बड़े कार्यक्रम में जाते हैं, जहां मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को जाना होता है। दीघा-एम्स फ्लाईओवर के उद्धाटन समारोह से लेकर एम्स में जाकर कोरोना वैक्सीन लेने तक दोनों साये की तरह मुख्यमंत्री के साथ रहे। जबकि आज मेवालाल चौधरी की अंत्यष्टि में पहुंचने वाले दोनों महानुभाव उनकी ही जाति के थे।

स्वास्थ्य व्यवस्था की अपंगता से अब तो मिले निजात!

विगत 10 वर्षों का इतिहास देखें तो कई बार ऐसे मौके आए जब स्वास्थ्य व्यवस्थाा की खामियों ने पूरे देश के सामने बिहार की नाक कटवाई, लेकिन इसे दूर करने का प्रयास नाकाफी दिखता है। मुजफ्फरपुर में जापानी इंसेफेलाइटिस या एईएस से मरते बच्चों की दास्तान हो या कोरोना काल में इलाज व ऑक्सीजन की कमी से मरते मरीजों के आंकड़ों के बावजूद सिस्टम अपने ढर्रे पर चलता दिख रहा है।

हाल ही में एनएमसीएच के अधीक्षक का त्राहिमाम संदेश सामने आया तो ऐसा लगा कि स्वास्थ्य विभाग में कोई बड़ा बदलाव होगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। बहरहाल देखना होगा कि अपनी मनमर्जी के मुताबिक चलता बिहार का हेल्थकेयर सिस्टम अब भी बदलता है या मेवालाल जैसे तमाम मरीजों की मौत की दास्तान यूं ही भुला दी जाएगी।

गरीब परिवार से निकले मेवालाल चौधरी थे बहुमुखी प्रतिभा के धनी

शिक्षाविद मेवालाल चौधरी ने डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा (समस्तीपुर) और बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर (भागलपुर) में बतौर कुलपति कार्य किया। इसके अलावा बिहार कृषि रोडमैप का मसौदा तैयार करने वाली कमेटी के अहम सदस्य थे। भारत सरकार के बागवानी आयुक्त के रूप में काम करते हुए उन्होंने मसौदा बागवानी मिशन, सूक्ष्म सिंचाई परियोजना और राष्ट्रीय बांस मिशन के विकास में सहायता की। साथ ही उन्होंने दलितों व पिछड़े वर्गों के उत्थान के लिए कई काम किये।

मेवालाल चौधरी उर्फ मेवालाल कुशवाहा ने एग्रीकल्चर में मास्टर ऑफ साइंस की डिग्री ली थी। इनके पिता दीपनाराण चौधरी थे। जदयू विधायक नीतू चौधरी से उनका विवाह हुआ था लेकिन घर में हुए रसोई गैस सिलेंडर विस्फोट के कारण नीतू की मृत्यु हो गई। 2010 में सक्रिय राजनीति में मेवालाल का प्रवेश हुआ और और जनता दल (यूनाइटेड) के टिकट पर वर्ष 2015 में बिहार विधानसभा सीट पर जीत हासिल की। उन्होंने उस चुनाव में हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के शकुनी चौधरी को हराया था।वर्ष 2020 में मेवालाल कुशवाहा ने एक बार फिर तारापुर सीट से जीत हासिल की और नीतीश कुमार कैबिनेट में शिक्षा मंत्री के रूप में शपथ ली थी।

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