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सबसे बुरे दौर दौर से गुजर रहे हैं चिराग

लोजपा के पूर्व महासचिव समेत पार्टी के दो सौ नेता, कार्यर्ता जदयू में शामिल

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नीरज सिंह

पटना। लोजपा प्रमुख चिराग पासवान अपने सबसे बुरे राजनीतिक दौर से गुजर रहे हैं। गत विधानसभा चुनाव के दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को चुनाव के बाद जेल भिजवाने का दंभ भरने वाले चिराग के अपने अब एक-एक कर उनका साथ छोड़ने लगे हैं। लोजपा के पूर्व महासचिव केशव सिंह जहां पार्टी के दो सौ नेताओं और कार्यर्ताओं के साथ जदयू में शामिल हो चुके हैं वहीं भाजपा से लोजपा में गये रामेश्वर चौरसिया ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है।

लोजपा के टिकट पर विधानसभा चुनाव लड़ने वाले चौरसिया आगे किस पार्टी का दामन थामेंगे अभी उन्होंने इसका खुलासा नहीं किया है लेकिन राजनीतिक हलकों में माना जा रहा है कि वे अपनी पुरानी पार्टी भाजपा में ही लौटेंगे। माना यह भी जा रहा है कि भाजपा के कई अन्य नेता जो गत विधानसभा चुनाव के दौरान लोजपा के टिकट पर चुनाव लड़ चुके हैं वापस अपनी पुरानी पार्टी में लौटेंगे। इनमें राजेंद्र सिंह, उषा विद्यार्थी, तारकेश्वर सिंह, कामेश्वर सिंह मुन्ना आदि के नाम लिये जा रहे हैं।

राजनीति के सबसे बड़े मौसम वैज्ञानिक कहे जाने वाले राम विलास पासवान के जाते ही लोजपा के पतन का दौर शुरू हो गया है। रामविलास पासवान ने इस उम्मीद के साथ चिराग के हाथों पार्टी की कमान सौंपी कि वे झोपड़ी को रोशन करेंगे। पर, चिराग अपनी झोपड़ी को रोशन करने की बजाये उसमें आग लगाने लगे।

विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही चिराग अपनी पार्टी के लिए एनडीए में 40 सीटों का दावा करने लगे। उन्होंने राज्य सरकार के कामकाज की आलोचना भी शुरू की ताकि एनडीए पर दबाव पड़े और वह उनके 40 सीटों के दावे को मान ले। पर, हुआ इसका उलटा और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने उनसे मिलने तक से इनकार कर दिया। शुरू में भाजपा ने बीच बचाव की कोशिश की पर बात नहीं बनी और अंतत: लोजपा एनडीए से अलग चुनाव लड़ी।

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पार्टी ने एनडीए से अलग होने के लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को जिम्मेदार बताया और पूरे प्रदेश में जदयू के खिलाफ उम्मीदवार खड़ा करने की घोषणा की। पर, ज्यों-ज्यों चुनाव आगे बढ़ता गया लोजपा की नीति बदलती गयी। लोजपा चुनाव लड़ रहे छह भाजपा उम्मीदवारों के खिलाफ भी मैदान में आ गयी। इनमें राघोपुर का विधानसभा सीट भी है जहां भाजपा के सतीश यादव राजद के तेजस्वी को कड़ी चुनौती दे रहे थे। भाजपा ने यहां तेजस्वी को हराने के लिए घेराबंदी की थी पर लोजपा उम्मीदवार ने सारा खेल खराब कर दिया।

इसके बाद पूरे चुनाव में तेजस्वी खुद को नरेंद्र मोदी का हनुमान बताते रहे पर भाजपा के नेता उन्हें नकली हनुमान, नकली बताते रहे। भाजपा और जदयू के नेताओं ने लोजपा को वोटकटवा पार्टी करार दिया। चुनाव बाद प्राप्त वोटों के आधार पर आकलन किया गया कि लोजपा के कारण जदयू 33 सीटों पर चुनाव हार गया। इसके बाद लोजपा से खार खाए नीतीश कुमार ने पार्टी के एनडीए में वापसी पर ब्रेक लगा दिया। अब लोपजा ने घर की रही न घाट की। गठन के बाद से रामविलास पासवान की जीवित रहने तक लोजपा कभी इतनी बेवश कभी नहीं दिखी।

विधानसभा चुनाव का परिणाम आने के बाद लोजपा की स्थिति और खराब होते जा रही है। पार्टी के छह में से आधे सांसद नेतृत्व से नाराज बताये जाते हैं। पार्टी के एकमात्र विधायक राजकुमार सिंह के जदयू में जाने के कयास लगाये जा रहे हैं। चुनाव पूर्व भाजपा छोड़ कर लोजपा में गये नेता भी घर वापसी की राह देख रहे हैं।

नीतीश कुमार को बड़ा दिल दिखाना चाहिए : उषा विद्यार्थी

बृहस्पितवार को लोजपा नेत्री उषा विद्यार्थी ने एक न्यूज पोर्टल से बात करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को बड़ा दिल दिखाना चाहिए। उन्हें चुनाव के वक्त की बातों को भूल जाना चाहिए। बिहार के विकास के लए उन्हें चिराग को साथ लेकर चलना चाहिए। पूर्व विधायक उषा ने कहा कि छोटे अगर गलती करते हैं तो बड़ों को उन्हें माफ कर देना चाहिए। बता दें कि उषा विद्यार्थी भाजपा के उन नेताओं में से हैं जो 2020 के विधानसभा चुनाव के पूर्व लोजपा में शामिल हुए और लोजपा के टिकट पर चुनाव लड़े। उषा विद्यार्थी पटना जिले कि बिक्रम विधानसभा से मैदान में उतरीं थीं। हालांकि उन्हें सफलता नहीं मिली।

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