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चायनीज कंपनियों पर नेपाल सरकार मेहरबान, भारतीय कंपनियां दरकिनार

काठमांडू-तराई फास्टट्रैक मार्ग के सुरंग का टेंडर भरने का अधिकार तीन चायनीज कम्पनियों को मिला

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  • अन्य स्वदेशी व विदेशी कम्पनी नहीं ले सकतीं टेन्डर प्रक्रिया में हिस्सा, भारतीय कंपनियां निराश
  • एक अरब से ज्यादा के टेन्डर चायनीज कंपनियों को, अयोग्य घोषित कंपनी के हाथ में थमा दिया टेंडर

राजेश कुमार शर्मा

जोगबनी (voice4bihar desk)। नेपाल में बढ़ते चीनी वर्चस्व की एक और परिघटना सामने आई है, जब सरकार ने नेपाली व भारतीय कंपनियों को दरकिनार कर एक अरब से ज्यादा का टेंडर चायनीज कंपनियों की झोली में डाल दिया। नेपाल के विभिन्न बड़े बजट वाले निर्माण कार्य में अपना वर्चस्व कायम कर चुकी चीनी कम्पनी के हाथ फिर एक बड़ा प्रोजेक्ट आया है। अब चायनीज कंपनियां काठमांडू-तराई/मधेस फास्टट्रैक सड़क मार्ग के सुरंग निर्माण का ठेका भी लेने में सफल हुई है।

नेपाली सेना के लिए माइलस्टोन मानी जा रही उक्त परियोजना में सुरंग मार्ग के लिए टेन्डर आमंत्रित किये गए हैं। सेना की देखरेख में बन रही इस सड़क के रास्ते में पड़ने वाले तीन सुरंग का दो पैकेज में टेन्डर निकाला गया है । पहले चरण में महादेवडाँडा में निर्माण होने वाले 3.300 किलोमीटर सुरङ्ग मार्ग सहित मोटरेबल पुल व सड़क का सेक्सन भी है । वहीं दूसरे चरण में (सिम्पानी से चालिसे खोल्सी 1.370 किमी) व लेनडाडा में ( घट्टेपाखा से बाँदरेखोल्सी 1.400 किमी) के दो सुरङ्ग मार्ग, पुल व सड़क का सेक्सन है । तीन सुरङ्ग को मिला कर कुल लंबाई करीब 6.07 किलोमीटर है।

इपीसी मॉडल में होगा सुरंग का निर्माण

नेपाली सेना की ओर से निकाली गयी सूचना के अनुसार आगामी साढे़ तीन वर्ष में निर्माण कार्य को सम्पन्न करने के लक्ष्य के साथ टेन्डर निकाला गया है। उक्त टेन्डर में इच्छुक निर्माण कम्पनी को 45 दिन के अंदर आवेदन देना होगा। उसके बाद किसी कंपनी को निर्माण का जिम्मा देने की तैयारी है। उक्त निर्माण कार्य इंजीनियरिंग प्रोक्युरमेन्ट कन्स्ट्रक्सन (इपीसी) मॉडल में निर्माण किया जाएगा। जिसमें सुरङ्ग मार्ग पांच वर्षों तक निर्माण कंपनी के जिम्मे होगा।

सुरङ्ग का निर्माण सम्पन्न होने के बाद एक वर्ष डिफेक्ट लायबिलिटी पीरियड (डीएलपी) रहेगा। उक्त अवधि में किसी भी प्रकार की टूट फुट की जिम्मेदारी निर्माण कंपनी की होगी। बाँकी चार वर्ष मेन्टेनेन्स का पीरियड होगा। एक वर्ष के सभी जिम्मेदारी निर्माण कम्पनी की होगी। वही चार वर्ष के लिए आवश्यक सामान्य मेन्टेन का बजट दिया जाना है ।

सिर्फ चीनी कम्पनी ही टेन्डर प्रक्रिया में ले सकती हैं भाग

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नेपाली सेना की इस टेन्डर प्रक्रिया में सिर्फ तीन चायनीज कंपनियां की भाग ले सकती हैं। अन्य कोई भी देशी या विदेशी कंपनी इस टेन्डर प्रक्रिया के लिए अयोग्य होगी। इसके पीछे नेपाली सेना की ओर से तर्क दिया गया है कि पिछले वर्ष मार्च महीने में प्री-क्वालिफिकेसन के लिए टेन्डर निकलाने की बात कही गयी है । जिसमें पहले पैकेज में 22 व दूसरे पैकेज में 21 कम्पनियों ने आवेदन दिया था। इनमें भी अधिकांश कम्पनियां चायनीज ही बताई गयी हैं।

एक अरब से ज्यादा के टेन्डर चीनी कम्पनी को

हाल के दिनों में नेपाल में निकलने वाले एक से ज्यादा के टेन्डर में सिर्फ चीनी कम्पनी ही आवेदन दे रही है । पूर्व के सभी अधिकांश ठेके चीनी कम्पनी को ही मिले है । वही पिछले महीने नेपाली सेना द्वारा निकाले गए टेंडर के पहले पैकेज में चीनी कम्पनी चाइना इंजीनियरिंग कार्पोरेशन लिमिटेड व पोली च्यागदा इंजीनियरिंग कर्पोरेशन लिमिटेड को मिला है। वही दूसरे पैकेज के लिए पोली च्यागदा इंजीनियरिंग कर्पोरेशन लिमिटेड का ही चयन किया गया है। पहले पैकेज के लिए सूचीकृत हुई दो व दूसरे के लिए एक कम्पनी ने सिर्फ आवेदन दिया है।

Nepalभौतिक पूर्वाधार तथा यातायात मन्त्रालय से जुड़े एक अधिकारी की मानें तो इस परियोजना के लिए 6 से ज्यादा कम्पनियों का चयन हुआ था लेकिन सिर्फ एक कंपनी का चयन होना चौकाने वाला है। जबकि ज्यादा कम्पनियों के बीच प्रतिस्पर्धा करवाने के बाद टेन्डर की राशि कम होती। उदाहरण के तौर पर अगर 15 अरब का टेन्डर है तो 14 अरब 99 करोड़ 99 लाख 99 हजार रुपये का टेन्डर भरने पर टेंडर मिल सकता है, लेकिन अगर ज्यादा कम्पनी है तो यह काम 12 से 13 अरब में ही हो सकता है।

एक खरब 75 अरब की है परियोजना

नेपाली सेना के वेबसाइट पर टेंडर संबंधित जारी सूचना के अनुसार यह परियोजना की अनुमानित लागत करीब 1 खरब 75 अरब रुपये है। उपलब्ध विवरण के अनुसार इस परियोजना में अब तक 17 अरब 83 करोड रुपये खर्च किया जा चुका है यह विवरण जनवरी तक का है।

टेंडर हड़पने वाली दोनों कंपनियां विवादों के घेरे में

नेपाल में कार्य कर रही चाइना स्टेट इंजीनियरिंग वही कम्पनी है, जिसे नारायणगढ़-बुटवल सड़क विस्तार का ठेका मिला है। 115 किलोमीटर सड़क विस्तार की जिम्मेवारी ली हुई इस कम्पनी के साथ कार्य विवाद होने पर दो वर्ष में तीन प्रतिशत ही काम कर पाई है। उक्त निर्माण कम्पनी ने इस सड़क से जुड़े टेन्डर की अनुमानित राशि से 20 प्रतिशत कम में टेंडर लिया था। वही दूसरी कम्पनी पोलि च्यागदा वह कम्पनी हो जो फास्टट्रैक सड़क में विशेष प्रकृति के पुल के प्री-क्वालिफिकेशन में अयोग्य घोषित की गई थी।

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