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कोरोना वैक्सीन लगे बिना ही आ गया वैक्सीनेशन का सर्टिफिकेट

राजधानी पटना स्थित नूतन राजधानी अंचल के गर्दनीबाग का मामला

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करीब 40 मरीजों के मोबाइल पर मैसेज भेजने का आरोप, विरोध में वैक्सीनेसन सेंटर पर हंगामा

पटना (voice4bihar news)। कोरोना काल में आपदा को अवसर में बदलने का खेल ऑक्सीजन से वैक्सीनेशन तक जा पहुंचा। राजधानी पटना में नगर निगम के नूतन राजधानी अंचल, गर्दनीबाग ऑफिस से ऐसा ही मामला सामने आया है, जब बगैर कोरोना वैक्सीन दिलाए ही लोगों को भी वैक्सीनेशन का मैसेज उनके मोबाइल पर आ गया है। साथ ही कोरोना वैक्सीन लगने का सर्टिफिकेट भी अपलोड हो गया। एक ही सेंटर पर ऐसे लोगों की संख्या करीब 40 है। मामला सामने आने पर उग्र लोगों ने हंगामा किया और मीडिया को इसकी सूचना दी।

दरअसल यह मामला तब खुला जब सासाराम सिविल कोर्ट के अधिवक्ता ओम जी समेत दर्जनों लोग आज वैक्सीनेशन के लिए कोरोना वैक्सीन लेने पहुंचे थे। ताज्जुब यह कि विगत 9 मई को वैक्सीन के लिए रजिस्ट्रेशन कराने के बाद 12 मई को वैक्सीन दिया जाना था। लेकिन एक दिन पहले यानि 11 मई को ही कोवैक्सीन इंजेक्शन दिये जाने का सर्टिफिकेट जारी कर दिया गया। इसी दिन (11मई को) मोबाइल पर मैसेज आया कि आपको सफलता पूर्वक वैक्सीन का पहला डोज दिया जा चुका है।

कई जगह पैरवी के बाद आखिरकार लगा कोरोना वैक्सीन

12 मई को वैक्सीनेशन सेंटर पहुंचे करीब तीन दर्जन लोगों ने ऐसी ही शिकायत दर्ज कराते हुए हंगामा किया। बाद में मीडिया के हस्तक्षेप व संबंधित एक्सक्यूटिव मजिस्ट्रेट की फटकार के बाद सभी लोगों को वैक्सीन दिया गया। बताया जाता है कि एक शिकायतकर्ता को 11 मई दोपहर 02:52 बजे मैसेज आया कि आपको वैक्सीन लग चुका है। इससे पहले ही वैक्सीनेशन का सर्टिफिकेट ऐप पर अपलोड हो चुका था।
मामला तब हल हुआ जब 12 मई को दोपहर 12:18 मिनट पर कोरोना वैक्सीन लगने के बाद पुन: मैसेज आया।

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वैक्सीनेशन से एक दिन पहले जारी हुआ सर्टिफिकेट (बाएं) व वैक्सीन लगने के बाद दुबारा आया मैसेज।

अब सवाल यह है कि इतना सबकुछ सिर्फ तकनीकी गड़बड़ी की वजह से हुआ या फिर इसके पीछे भी कोई बड़ा खेल चल रहा है? पूरे मामले की जानकारी सिविल सर्जन व अन्य स्वास्थ्य पदाधिकारियों की दी गयी है। अब देखना है मामले की तहकीकात के बाद क्या तथ्य निकलकर सामने आता है।

कोरोना काल में ‘आपदा को अवसर’ बनाने का चल रहा खेल

कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों के बीच जब ऑक्सीजन की किल्लत शुरू हुई तो देश भर में हायतौबा मचा। इसका फायदा उठाकर कुछ धंधेबाजों ने मरीजों की ‘उखड़ती सांसों की कीमत’ के एवज में हजारों रुपये वसूले। 5 हजार रुपये में मिलने वाले ऑक्सीजन सिलेंडर की कीमत एक लाख रुपये तक वसूली गयी। इसी तरह कोरोना के इलाज में कारगर रेमडेसिविर इंजेक्शन की खूब कालाबाजारी हुई। धंधेबाजों ने कई जगह नकली रेमडेसिविर बेचकर करोड़ों रुपये कमाये।

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