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लोजपा का बंगला : न चिराग को मिलेगा न पशुपति पारस को!

सिंबल पर दावे का विवाद निर्वाचन आयोग तक पहुंचा, फिलहाल 'बंगला" चुनाव चिह्न फ्रीज

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विधानसभा उपचुनाव में दोनों गुटों को मिलेगा अलग सिंबल, पार्टी का नाम भी अलग होगा

पटना (voice4bihar news) । लोजपा में जारी कलह भारत निर्वाचन आयोग पहुंच गया है। भारत निर्वाचन आयोग ने लोजपा का चुनाव चिह्न बंगला तत्काल प्रभाव से फ्रीज कर दिया है। आयोग लोजपा के दोनों गुटों को अलग से चुनाव चिह्न आवंटित करेगा और दोनों को अलग पार्टी का नाम भी रखना पड़ेगा। चिराग पासवान और पशुपति कुमार पारस दोनों ने भारत निर्वाचन आयोग के समक्ष दावा पेश कर रखा था कि पार्टी के असली अध्यक्ष वही हैं और उनके नेतृत्व वाले गुट को ही लोजपा की मान्यता मिलना चाहिये।

भागलपुर के तारापुर तथा दरभंगा के कुशेश्वरस्थान में होना है उपचुनाव

निर्वाचन आयोग ने चिराग और पारस दोनों गुटों के लिए कई दिशा निर्देश भी जारी किये हैं। लोजपा के दोनों गुट चार अक्टूबर को दिन में एक बजे तक चुनाव आयोग को ये बतायेंगे कि उनके गुट का नाम क्या होगा। वे चुनाव आयोग को ये भी बतायेंगे कि अगर तारापुर और कुशेश्वरस्थान में उनका उम्मीदवार उतरता है तो चुनाव चिन्ह क्या होगा। वे तीन चुनाव चिन्ह चुनेंगे जिनमें से एक आवंटित किया जायेगा। वहीं आयोग ने कहा है कि यह अंतरिम आदेश है। लोजपा पर किसका अधिकार है और कौन अध्यक्ष है इस पर सुनवाई जारी रहेगी।

उपचुनाव के बाद बंगला के विवाद पर फिर सुनवाई करेगा आयोग

अंतरिम आदेश उप चुनाव को लेकर जारी किया गया है। चुनाव आयोग उप चुनाव के बाद सुनवाई करेगा। 5 नवंबर को चिराग और पारस गुट के दावों पर फिर से सुनवाई होगी। लोजपा की लड़ाई इस साल जून से चल रही है। पशुपति कुमार पारस ने 17 जून को चुनाव आयोग को पत्र लिख कर दावा किया था कि वे लोजपा संसदीय दल के नेता चुने गये हैं।

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इसी दिन पार्टी के पूर्व सांसद सूरजभान ने चुनाव आयोग को पत्र लिखकर कहा था कि पशुपति पारस को लोजपा का अध्यक्ष चुन लिया गया है। पारस ने 19 जून को आयोग को ये बताया था कि उन्होंने अपनी कमेटी बनायी है, जिसमें 2 उपाध्यक्ष, 5 महासचिव और एक सचिव बनाये गये हैं।

15 जून को चिराग पासवान ने चुनाव आयोग को लिखा था पत्र

उधर चिराग पासवान ने भी चुनाव आयोग को कई पत्र लिखे थे। उन्होंने 15 जून को आयोग को पत्र लिखा था कि लोजपा से पशुपति पारस, वीणा देवी, महबूब अली कैसर, चंगन सिंह और प्रिंस राज को निकाल दिया गया है। चिराग पासवान ने 15 जून से 21 जुलाई तक चुनाव आयोग को चार पत्र लिख कर पार्टी पर अपना दावा जताया था। उनकी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष राजू तिवारी ने 22 जून को चुनाव आयोग को पत्र लिख कर कहा था कि वह पशुपति पारस द्वारा लोजपा के नाम के उपयोग पर रोक लगाये।

चिराग पासवान ने भी सितंबर में चुनाव आयोग को पत्र लिखा था और कहा था कि वह पशुपति पारस द्वारा लोजपा के नाम के उपयोग पर रोक लगाये। चिराग के पत्र के बाद चुनाव आयोग ने पशुपति पारस को 27 सितंबर को पत्र लिखकर कहा था कि वे 8 अक्टूबर तक जवाब दें।

हाईकोर्ट में याचिका खारिज हुई तो चुनाव आयोग को जारी करना पड़ा अंतरिम आदेश

अगले ही दिन पारस ने चुनाव आयोग को कहा कि वे लोकसभा में लोजपा संसदीय दल के नेता हैं। उनके खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में दायर याचिका खारिज कर दी गयी है। ये सुनवाई चल ही रही थी कि बीच में उप चुनाव आ गया। उपचुनाव में दोनों गुटों में से कौन लोजपा का नाम और चुनाव चिन्ह उपयोग में लायेगा इसका फैसला नहीं हो पाया था। लिहाजा चुनाव आयोग ने अंतरिम आदेश जारी किया है।

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