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ब्रेकिंग न्यूज : भ्रष्टाचार के आरोप में निलंबित कार्यपालक पदाधिकारी अनुभूति श्रीवास्तव के आवास पर छापा

नगर विकास विभाग के अफसरों की शामत, डिप्टी सीएम तारकिशोर प्रसाद हैं विभाग के मंत्री

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कुमारी हिमानी की गिरफ्तारी के बाद अनुभूति श्रीवास्तव के खिलाफ बड़ी कार्रवाई

काले कारनामों की वजह से काजल की कोठरी बना नगर विकास विभाग

पटना (voice4bihar news)। भ्रष्टाचार और काले कारनामे के कारण अक्सर सुर्खियों में रहने वाले नगर विकास विभाग के अफसरों पर गाज गिरने लगी है। बोधगया नगर परिषद की कार्यपालक पदाधिकारी कुमारी हिमानी की गिरफ्तारी के बाद एक अन्य भ्रष्ट अफसर पर बड़ी कार्रवाई की सूचना है। पिछले दिनों भ्रष्टाचार के आरोप में निलंबित होने वाले भभुआ नगर परिषद के तत्कालीन कार्यपालक पदाधिकारी अनुभूति श्रीवास्तव के पटना स्थित आवास पर छापेमारी की गयी है।

आय से अधिक संपत्ति के मामले में निगरानी की विशेष इकाई ने की जांच

निगरानी विभाग की विशेष इकाई ने आय से अधिक संपत्ति के मामले में अनुभूति के यहां दबिश दी है। पिछले दिनों भभुआ नप में हुए भ्रष्टाचार के मामले में डीएम ने जांच रिपोर्ट के साथ कार्रवाई की अनुशंसा नगर विकास विभाग से की थी , लेकिन इस फाइल को सचिवालय में ठंडे बस्ते में डाल दिया गया था।

बाद में एक समाजसेवी ने इसकी शिकायत मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के जनता दरबार में की थी। सीएम ने संज्ञान लिया तो अनुभूति श्रीवास्तव को अगले ही दिन सस्पेंड कर दिया गया। तब वे हाजीपुर नगर परिषद में बतौर कार्यपालक पदाधिकारी तैनात थे।

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अफसरों को कार्रवाई से बचाने के कारण विभाग की हुई किरकिरी

विभिन्न कस्बों में विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार की शिकायतें मिलीं और जांच रिपोर्ट में आरोपों की पुष्टि भी हुई। इसके बाद भी नगर विकास एवं आवास विभाग इन अफसरों पर कार्रवाई की बजाय उन्हें अभयदान देता रहा। तत्कालीन सासाराम नगर परिषद की कार्यपालक पदाधिकारी कुमारी हिमानी व भभुआ नगर परिषद के अनुभूति श्रीवास्तव के मामले में विभाग की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े हो गए।

यह भी देखें :  बोधगया नगर परिषद की कार्यपालक पदाधिकारी गिरफ्तार

नगर विकास विभाग की रही खास मेहरबानी

कुमारी हिमानी पर गिरफ्तारी की तलवार लटकने के बावजूद उन्हें न सिर्फ नई जगह पर पदस्थापित कर दिया गया, बल्कि एक साथ दो नगर परिषद का कार्यभार सौंप दिया गया। इसी तरह अनुभूति श्रीवास्तव के खिलाफ डीएम की अनुशंसा को नजरअंदाज कर दिया गया ।

इन दोनों मामलों में नगर विकास विभाग की खूब किरकिरी हुई। माना जा रहा है कि अनुभूति श्रीवास्तव के ठिकानों पर छापेमारी इसी दबाव की वजह हुई। बहरहाल छापेमारी के दौरान निगरानी टीम के हाथ क्या कुछ लगा है, इसका खुलासा नहीं हो सका है।

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