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बिहार में लोकशाही पर हावी अफसरशाही

मंत्री मदन साहनी ने की इस्तीफे की पेशकश, मांझी ने भी किया समर्थन

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पटना (Voice4bihar desk)। बिहार में लोकशाही पर अफसरशाही हावी है। राज्य के विधायक से लेकर मंत्री तक इस तरह के आरोप वर्षों से लगाते रहे हैं। पर, यह पहली बार है जब मंत्री ने अफसरशाही से दुखी होकर मंत्रिपद से इस्तीफे की पेशकश कर दी है। राज्य के समाज कल्याण मंत्री मदन साहनी ने अफसरशाही से ऊबकर बृहस्पतिवार को मीडिया के समक्ष इस्तीफे की पेशकश कर दी।

साहनी ने कहा कि उनके विभाग के अफसर भी उनकी नहीं सुनते हैं। सहनी ने यहां तक कह दिया कि जिसका जमीर होगा वह मंत्री नहीं रहेगा। मंत्री का आरोप केवल अफसर तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने यह भी कह दिया कि मुख्यमंत्री के यहां भी उनकी नहीं सुनी जाती है। केवल गाड़ी-बंगला के लिए वे मंत्री बने नहीं रह सकते हैं। हम विधायक हैं, क्षेत्र की जनता समस्या लेकर आती है। हम अफसर को फोन करते हैं तो कहते हैं भेज दीजिए। जब जनता समस्या लेकर जाती है तो उसका वाजिब काम भी अटका दिया जाता है।

जून महीने में होने वाले ट्रांसफर-पोस्टिंग को लेकर गहराया विवाद

हालिया विवाद आम तौर पर जून महीने में बड़ी संख्या में होने वाले विभाग के अफसरों की नियमित ट्रांसफर-पोस्टिंग को लेकर हुआ बताया जाता है। मंत्री साहनी का कहना है कि हम चाहते थे कि एक ही जगह तीन साल से अधिक समय से जमे अफसरों का ट्रांसफर कर दिया जाये। इसकी सूची भी मंगवाई। पर, अपर मुख्य सचिव अतुल प्रसाद ने अपने मन के मुताबिक लिस्ट जारी कर दी।

मंत्री मदन सहनी ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि जो ट्रांसफर- पोस्टिंग मंत्री स्तर पर होना चाहिए था, वो अफसर कर रहे हैं। अब इस अपमान के साथ मंत्री पद पर रहना उचित नही हैं। नीतीश सरकार में मंत्रियों की कोई पूछ नहीं है। विभाग के प्रधान सचिव अतुल कुमार पर मंत्री ने आरोप लगाया कि वे चार साल से एक ही जगह जमे हुए हैं। अब तक क्या किया, यह किसी को मालूम नहीं। कुछ कहने पर सुनते नहीं हैं। इसलिए अब मेरे पास इस्तीफे के अलावा कोई चारा नहीं है।

आरसीपी तक बात पहुंचायी, पर कोई फायदा नहीं

मदन साहनी ने कहा कि उन्होंने इस बारे में सीएम के सचिव चंचल कुमार को भी फोन किया था लेकिन वह फोन उठाते ही नहीं हैं। मैंने सोचा नंबर नया देख कर नहीं उठा रहे हैं तो उनको मैसेज भी किया लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। इसके बाद दीपक कुमार, संजय झा, अशोक चौधरी, आरसीपी सिंह सबको कहा। सहनी ने कहा कि पिछली बार जब खाद्द्य आपूर्ति मंत्री बना तो ऐसा ही सचिव था। बात नहीं सुनता था। इस बार सोचा कि ढंग का सचिव होगा लेकिन ये तो उससे भी दो कदम आगे निकल गये। इनको आंगनबाडी चलने में इंटरेस्ट नहीं है लेकिन ट्रांस्फर पोस्टिंग में इंटरेस्ट है।

जीतन राम मांझी, पूर्व मुख्यमंत्री

मांझी बोले, मैं एनडीए की बैठक में उठा चुका हूं मुद्दा

यह तो रही मंत्री का बात। अब हम बात करते हैं उनकी जो मंत्री तो नहीं हैं पर सत्तारूढ़ गठबंधन के विधायक हैं। हम के राष्ट्रीय अध्यक्ष जीतन राम मांझी भी मंत्री के आरोपों को यही ठहराते हुए कहते हैं कि बिहार के अफसर मंत्री और विधायकों की बातों को तरजीह नहीं देते हैं। दिल्ली से लौटने के बाद जब पत्रकारों ने पटना हवाई अड्डे पर उनसे मंत्री मदन सहनी के इस्तीफे के बाबत पूछा तो उन्होंने कहा कि मैंने एनडीए की बैठक में भी इस मुद्दे को उठाया था।

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पैसे लेकर मेरे यहां कर दी गयी बीडीओ की पोस्टिंग : ठाकुर

इधर, बाढ़ के विधायक ज्ञानेंद्र सिंह ज्ञानू और बिस्फी के विधायक हरि भूषण ठाकुर बचौल के बयानों ने भी सुर्खियां बटोरी। बिहार सरकार के विभिन्न विभागों में जून के अंतिम दिन करीब पांच हजार अफसरों के सामूहिक तबादलों पर इन्होंने पैरवी और पैसे का खेल होने का आरोप लगाया। ठाकुर ने कहा- मेरे यहां पैसे लेकर बीडीओ की पोस्टिंग की गयी है। जाति, आवासीय  और मृत्यु प्रमाणपत्र पत्र के लिए भी बेरोकटोक घूसखोरी हो रही है।

एमएलए का महत्व चपरासी से भी कम : बचौल

भाजपा विधायक बचोल ने भी मीडिया प्रतिनिधियों से बातचीत में अपनी सरकार के कामकाज पर जमकर भड़ास निकाली। उन्होंने कहा कि सीएम की छवि धूमिल कर रहे मंत्री और वरिष्ठ नौकरशाह। यहां तक कहा – एमएलए का महत्व चपरासी से भी कमतर हे। सरकार में भ्रष्टाचार का बोलबाला है। थाना-ब्लॉक में किसी का भी कोई काम बिना पैसे दिये नहीं होता है। बीडीओ के तबादले में लाखों के वारा-न्यारा होने की आम चर्चा है।

ज्ञानेंद्र सिंह ज्ञानू, विधायक बाढ़

ज्ञानू ने मंत्रियों पर पैसे लेकर ट्रांसफर-पोस्टिंग करने के लगाये आरोप

भाजपा विधायक ज्ञानेन्द्र सिंह ज्ञानू  ने कहा भी सरकार पर अपनी खीज उतारी। कहा कि मंत्रियों ने अफसरों और कर्मचारियों के तबादले में जमकर घूस खाई है। उन्होंने अपनी ही पार्टी के मंत्रियों को ज्यादा निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि  सीएम  के डर से जदयू के मंत्रियों ने घूस कम खाई है। उन्होंने आरोप का आधार पूछने पर कहा कि पक्की खबर कई उन अफसरों से ही मिली है, जिनका पैसे लेकर ट्रांसफर किया गया है। अफसरों को बुला-बुला कर उनसे पैसों की मांग की है।

विधायक  ज्ञानू बिहार में मंत्री नहीं बनाये जाने के समय से ही पार्टी में नाराज चल रहे हैं। वे पहले भी भाजपा के प्रदेश नेतृत्व पर  हमला बोल चुके हैं। उन्होंने भाजपा नेतृत्व पर मंत्री बनाए जाने में जातीय समीकरणों का ख्याल नहीं रखने का आरोप लगाया था।

हर साल जून में बड़ी संख्या में अफसरों की होती है ट्रांसफर-पोस्टिंग

एक जगह तीन वर्षों से अधिक समय से जमे अधिकारियों कर्मचारियों का  पहले जून और दिसम्बर में सामूहिक  तबादला होता था । तब भी मनचाही पोस्टिंग के लिए लेन-देन की आम चर्चा होती थी। नीतीश सरकार ने सिर्फ जून महीना  में तबादले का नियम लागू किया। जून के बाद विभाग के राजपत्रित पदों के अधिकारियों का तबादला सीएम के आदेश से होता है। जून को तबादला का महीना कहा जाता है। हर साल जून महीने में अधिकारियों-कर्मियों का तबादला किया जाता है। मंत्रियों पर अब तक विपक्ष की तरफ से तबादला उद्योग चलाने का आरोप लगता रहा है,। इस बार  सत्ताधारी दल में ही मंत्रियों पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

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