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अंजु रंजन की दो नई पुस्तकों का विमोचन

भारतीय विदेश सेवा की वरिष्ठ अधिकारी हैं अंजु रंजन

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पटना (voice4bihar desk)। भारतीय विदेश सेवा की वरिष्ठ अधिकारी और साहित्यकार अंजु रंजन की कविताओं के प्रथम संग्रह में प्रेम के विभिन्न रंग देखने को मिले थे। उनके दूसरे संग्रह विस्थापन और यादें में देश की माटी से दूर रहने के कारण उपजे दर्द को समेटा-सहेजा गया है। वाणी प्रकाशन से प्रकाशित संग्रह विस्थापन और यादें कवयित्री के फलक को विस्तृत कर जाता है।

कविता संग्रह का लोकार्पण बिहार विधान परिषद सभागार में सभापति अवधेश नारायण सिंह, विधान पार्षद डॉ संजय पासवान, नई धारा पत्रिका के संपादक डॉ. शिवनारायण और लखनऊ के प्रमंडलीय आयुक्त रंजन कुमार ने किया। साथ ही उनकी स्मृतियों के संग्रह वो कागज की कश्ती का लोकार्पण भी किया गया।

पुस्तकों का विमोचन करते हुए विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह ने कहा कि जहां-जहां राजनीति फिसलती है, साहित्य उसे सहारा देता है। नई धारा और थावे विद्यापीठ द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित कार्यक्रम में कविता संग्रह के बारे में वरिष्ठ कवि आलोक धन्वा ने कहा कि अंजु रंजन की कविताएं सदिच्छाओं की सहज अभिव्यक्ति हैं।

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अपनी नव लिखित पुस्तकों वो कागज की कश्ती और विस्थापन और यादें के साथ साहित्यकार अंजु रंजन।

इनमें जीवन के श्वेत-श्याम व बाकी तमाम रंग मौसमों की तरह आते जाते हैं। जो कहीं उल्लास पैदा करते हैं और कहीं हमारी पीड़ा व त्रासदी को बयां करते हैं। जीवन के अंतरविरोध को समझती हैं अंजु और उसे जाहिर करने से कभी हिचकती नहीं, भले वह पारम्परिक सौन्दर्य-बोध को बाधित करता हो पर एक वैचारिक दृढ़ता को दर्शाता है।

वरिष्ठ साहित्यकार भावना शेखर ने अंजु रंजन के संस्मरण को नई पीढ़ी की लड़कियों के लिए प्रेरणास्पद बताया। कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. शिव नारायण ने किया । मौके पर युवा साहित्यकार दिलीप कुमार, कवि कुमार मुकुल, शंकर कैमुरी, संतोष कुमार गुप्ता, अविनाश झा, मंजू रंजन सहित अनेक साहित्यकार और कला प्रेमी उपस्थित रहे।

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