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“बोरा ले लो, बोरा” की टेर लगाने वाले शिक्षक नेता हुए सस्पेंड, प्रखंड शिक्षा कार्यालय में अटैच किये गए तमीजुद्दीन

विभाग की कार्यशैली पर व्यंग्य करना पड़ा महंगा, कटिहार के कदवां प्रखंड के शिक्षक हैं मो. तजीमुद्दीन

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मध्याह्न भोजन का बोरा बेचने का वीडियो वायरल होने पर शिक्षा विभाग ने उठाया कदम

शिक्षा विभाग के विशेष सचिव के निर्देश पर पंचायत नियोजन समिति ने किया निलंबित

पटना (voice4bihar news)। बिहार में शिक्षा विभाग की कार्यशैली पर व्यंग्य करने के लिए “एमडीएम का बोरा” बेचने वाले शिक्षक नेता मो. तमीजुद्दीन को आखिरकार नियोजन समिति ने निलंबित कर दिया है। मो. तमीजुद्दीन ने जूट के खाली बोरा का बंडल सिर पर रखकर “बोरा ले लो, बोरा” की टेर लगाते हुए वीडियो बनाया है, जो इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। उन पर विभागीय आदेश का अनुपालन नहीं करने तथा प्रशासन व सरकार की छवि धूमिल करने जैसे आरोप लगे हैं। निलंबित शिक्षक को प्रखंड शिक्षा कार्यालय में अटैच करते हुए इनके विरुद्ध विभागीय कार्रवाई के लिए आरोप पत्र गठित करने का भी संकेत दिया गया गया है।

वायरल वीडियो में क्या है आखिर!

दरअसल, कटिहार के प्रारंभिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष मो. तमीजुद्दीन का एक वीडियो वायरल हो रहा जिसमें वे बोरा बेचते नजर आ रहे हैं। वीडियो में सिर पर बोरा की गठरी लेकर शिक्षक तमीजुद्दीन लोगों से बोरा खरीदने की अपील करते हुए कह रहे हैं कि अगर वे बोरा नहीं खरीदेंगे तो उन्हें वेतन नहीं मिलेगा। बताया जाता है कि शिक्षा विभाग की मध्याह्न भोजन प्रशाखा ने वर्ष 2014-15 और 2015-16 में विद्यालयों को उपलब्ध कराये गये चावल के खाली बोरों को 10 रुपये प्रति बोरा की दर से बेच कर इसकी राशि जमा करने का निर्देश दिया है। साथ ही विभाग ने बोरा की बिक्री करने में असफल रहने पर शिक्षकों पर कार्रवाई करने की बात कही है।

शिक्षक तमीजुद्दीन ने विभाग के इसी आदेश का विरोध अनोखे अंदाज में किया है। शिक्षक तमीजुद्दीन ने इस संबंध में मीडिया से बात करते हुए कहा है कि चावल के बोरों को चूहे कुतर देते हैं। ऐसे में कोई उन्हें खरीदता नहीं है। पर सरकार का आदेश इन बोरों को 10 रुपये की दर से बेचने का है। इसी को लेकर शिक्षक नेता मो. तजीमुद्दीन ने करीब 1.22 मिनट का एक वीडियो बनाया है जो इन दिनों सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इस वीडियो में शिक्षक नेता मो. तमीजुद्दीन लोगों को भाई और चाचा कहकर पुकारते हुए कम से कम एक बोरा खरीदने की अपील करते दिख रहे हैं। वे कह रहे हैं कि मास्टर से बोरा खरीद लीजिए नहीं तो उन्हें वेतन नहीं मिलेगा।

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शिक्षा विभाग हुआ नाराज, तत्काल कार्रवाई का निर्देश

सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद शिक्षा विभाग की भौंहें तन गयी। शिक्षा विभाग के विशेष सचिव -सह निदेशक मध्याह्न भोजन योजना ने कटिहार के जिला शिक्षा पदाधिकारी को उक्त शिक्षक नेता के खिलाफ कार्रवाई का निर्देश दे दिया। इसके आलोक में जिला शिक्षा पदाधिकारी ने पंचायत नियोजन समिति को कार्रवाई का आदेश दिया। वरीय अधिकारी का आदेश मिलते ही कदवां प्रखंड अंतर्गत भोगांव पंचायत के सचिव ने मो. तमीजुद्दीन को निलंबित करने का आदेश जारी करते हुए इसकी प्रतिलिपि वरीय अफसरों को भेज दी है। बता दें कि तमीजुद्दीन का नियोजन भोगांव पंचायत नियोजन समिति ने किया था और फिलहाल वे प्राथमिक विद्यालय कान्ताडीह, कदवा में पंचायत शिक्षक के तौर पर कार्यरत हैं।

यह भी देखें : बोरा बेचने वाले शिक्षक के पीछे पड़ा विभाग

शिक्षक नियोजन नियमावली के उल्लंघन का आरोप

पंचायत सचिव ने शिक्षक के निलंबन संबधित आदेश में कहा है कि मो. तमीजुद्दीन का यह आचरण बिहार पंचायत प्रारंभिक विद्यालय सेवा (नियुक्ति, प्रोन्नति, स्थानांतरण, अनुशासनिक कार्रवाई एवं सेवाशर्त) नियमावली 2020 का उल्लंघन करता है। नियमावली की कंडिका 17 के अन्तर्गत यह कृत्य शिक्षक आचरण संहिता के प्रतिकूल है एवं सरकारी राजस्व की हानि तथा वित्तीय अनियमितता का द्योतक है। साथ ही शिक्षक के उक्त कृत्य से जिला प्रशासन तथा सरकार की छवि धूमिल हुई है। आदेश में कहा गया है कि निलंबन अवधि में तमीजुद्दीन को बीईओ कार्यालय कदवा में योगदान करना होगा। इस दौरान इन्हें नियमानुसार मूल वेतन की 50 प्रतिशत राशि जीवन निर्वाह भत्ता के रूप में मिलेगी।

शिक्षक नेता तमीजुद्दीन का विवादों से पुराना नाता, पहले भी हो चुके हैं सस्पेंड

कटिहार के कदवां प्रखंड अंतर्गत प्राथमिक विद्यालय कांताडीह के प्रभारी प्रधानाध्यापक तमीजुद्दीन का विवादों से पुराना नाता रहा है। शायद इसी लिए इन्हें दूसरी बार निलंबन का दंड मिला है। बिहार प्रारम्भिक शिक्षक संघ के जिला अध्यक्ष के तौर पर काम कर रहे शिक्षक नेता तमीजुद्दीन को पहली बार तब निलंबित किया गया था, जब कलेक्ट्रेट के गेट पर आक्रोशपूर्ण धरना दिया था। इन पर एक शिक्षक की मौत पर राजनीतिक चमकाने व समाहरणालय गेट धरना प्रदर्शन करने का आरोप लगा था। सूत्रों के अनुसार तमीजुद्दीन ने धरना प्रदर्शन करने के लिए जान-बूझकर ऐसा दिन तय किया था, जब शहर में तत्कालीन उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी का आगमन होना था।

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