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देश का सबसे बड़ा खेल रत्न अवार्ड अब मेजर ध्यानचंद के नाम पर होगा, राजीव गांधी का नाम हटाएगी मोदी सरकार

ओलंपिक में भारतीय हॉकी टीम की जीत पर झूमते देशवासियों को पीएम मोदी ने दिया आश्वासन

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राजीव गांधी खेल रत्न अवार्ड के रूप में विगत 20 वर्षों से खेल प्रतिभाओं को दिया जा रहा था पुरस्कार

पीएम की घोषणा से खेलप्रेमियों में खुशी की लहर, कांग्रेस ने कहा- मेजर के नाम पर राजनीति कर रहे मोदी

Voice4bihar desk. भारत का सबसे बड़े खेल पुरस्कार का नाम अब पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के नाम पर न होकर हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद के नाम पर होगा। अर्थात 20 वर्ष पहले शुरू हुए “राजीव गांधी खेल रत्न अवार्ड” को अब “मेजर ध्यानचंद खेल अवार्ड” के नाम से जाना जाएगा। इस आशय की घोषणा करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जहां खेल प्रेमियों व मेजर ध्यानचंद के चाहने वालों को खुशी का क्षण दे दिया, वहीं इस अवार्ड से राजीव गांधी का नाम हटाकर नए विवाद को जन्म दे दिया। मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया जताई है।

दरअसल टोक्यो ओलंपिक में भारतीय हॉकी टीम को कांस्य पदक मिलने के साथ ही भारत में हॉकी के सुनहरे दिनों की याद ताजा हो गयी। देश भर में हो रहे खुशी के इजहार के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीटर पर बधाई संदेश में लिखा – “ओलंपिक खेलों में भारतीय खिलाड़ियों के शानदार प्रयासों से हम सभी अभिभूत हैं। विशेषकर हॉकी में हमारे बेटे-बेटियों ने जो इच्छाशक्ति दिखाई है, जीत के प्रति जो ललक दिखाई है, वो वर्तमान और आने वाली पीढ़ियों के लिए बहुत बड़ी प्रेरणा है।”

इसके तुरंत बाद प्रधानमंत्री ने ट्वीटर हैंडल पर ही इस बात का ऐलान कर दिया कि अब खेल रत्न अवार्ड का नाम बदल जाएगा। उन्होंने ट्वीट किया- “देश को गर्वित कर देने वाले पलों के बीच अनेक देशवासियों का ये आग्रह भी सामने आया है कि खेल रत्न पुरस्कार का नाम मेजर ध्यानचंद जी को समर्पित किया जाए। लोगों की भावनाओं को देखते हुए, इसका नाम अब मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार किया जा रहा है।” इस ऐलान के साथ ही देश भर से अलग-अलग प्रतिक्रियाएं आने लगी।

क्या है खेल रत्न अवार्ड

देश के सबसे बड़े खेल पुरस्कार के तौर पर इस अवार्ड को वर्ष 1991-92 में शुरू किया गया था। तब इसका नाम देश के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के नाम पर रखा गया था। इस अवार्ड की स्थापना का मुख्य उद्देश्य खेल के क्षेत्र में सराहना और जागरूकता फैलाना है। साथ ही खिलाड़ियों को सम्मानित कर उनकी प्रतिष्ठा बढ़ाना है, ताकि वह समाज में और ज्यादा सम्मान प्राप्त कर सकें। करीब 20 वर्षों से विभिन्न खेल प्रतिभाओं को इस अवार्ड से नवाजा जा चुका है।

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प्रधानमंत्री ने कहा- मेजर ध्यानचंद ने भारत के लिए सम्मान व गौरव अर्जित किया

पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि मेजर ध्यानचंद भारत के उन अग्रणी खिलाड़ियों में से थे जिन्होंने भारत के लिए सम्मान और गौरव अर्जित किया। उन्होंने कहा कि तोक्यो ओलिंपिक में पुरुष और महिला हॉकी टीम का असाधारण प्रदर्शन ने समूचे देशवासियों के दिलो-दिमाग में बस गया है। देश के एक छोर से लेकर दूसरे छोर तक हॉकी के प्रति एक नए सिरे से रुचि उभर रही है। यह आने वाले समय के लिए बेहद सकारात्मक संकेत है। इसके विपरीत कांग्रेस ने इस निर्णय पर अफसोस जताया है।

कांग्रेस ने कहा- मेजर ध्यानचंद के नाम पर राजनीति कर रहे प्रधानमंत्री

दूसरी ओर कांग्रेस के ट्वीटर हैंडल पर पार्टी प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने लिखा – “मेजर ध्यानचंद जी का नाम अगर भाजपा और पीएम मोदी अपने राजनीतिक उद्देश्यों के लिए न घसीटते तो अच्छा था। राजीव गांधी जी इस देश के नायक थे, नायक रहेंगे। राजीव गांधी जी पुरस्कारों से नहीं, अपनी शहादत, अपने विचारों और आधुनिक भारत के निर्माता के तौर पर जाने जाते हैं: श्री”

राष्ट्रीय खेल दिवस के रुप में मनाई जाती है मेजर ध्यानचंद की जयंती

ब्रिटिशकालीन भारत में अपनी खेल प्रतिभा का पूरी दुनिया में डंका बजाने वाले मेजर ध्यानचंद को आज भी सम्मान से याद किया जाता है। वर्ष 1928, 1932 और 1936 में ओलंपिक के दौरान भारतीय हॉकी टीम को स्वर्ण पदक जिताने का श्रेय मेजर ध्यानचंद को ही जाता है। उन्होंने अपने खेल कॅरियर में कुल 400 गोल दागे। 29 अगस्त, 1905 को यूपी के इलाहाबाद में जन्मे ध्यानचंद ने खेल के मैदान में आश्चर्यजनक करतब दिखाते हुए पूरी दुनिया को हैरत में डाल दिया था। इसी वजह से इन्हें हॉकी का जादूगर (Hockey Wizard) के रुप में ख्याति मिली।

स्वतंत्र भारत में भी मेजर ध्यानचंद को समुचित सम्मान देने के लिए उनकी जयंती को राष्ट्रीय खेल दिवस के रुप में मनाया जाता है। हर वर्ष 29 अगस्त को मेजर ध्यानचंद की जयंती पर राष्ट्रीय खेल सम्मान समारोह आयोजित होता है, जिसमें भारत के राष्ट्रपति के हाथों खेल जगत की विभूतियों को सम्मानित किया जाता है। राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार, मेजर ध्यानचंद पुरस्कार, अर्जुन पुरस्कार व द्रोणाचार्य पुरस्कार को वितरण इसी दिन किया जाता है।

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