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मानव कल्याण का सहज उपाय प्रभु का स्मरण : जीयर स्वामी

प्रायश्चित करने से हमारा समाधान हो ही जाएगा, यह कोई जरूरी नहीं

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  1. साधक को संकट आने पर, मृत्यु निकट आने पर या अन्त समय आने पर घबराना नहीं चाहिए
  2. जो व्यक्ति धर्म करता है वह धार्मिक है और जो हठ करके धर्म करता है वह धर्माभास

Voice4bihar desk. प्रख्यात सन्त जीयर स्वामी ने कहा कि प्रायश्चित करने से हमारा समाधान हो ही जाएगा, यह कोई जरूरी नहीं है। हो भी सकता है, नहीं भी हो सकता है। जीयर स्वामी जी महाराज आज भड़सर में प्रवचन करते हुए उद्गार व्यक्त कर रहे थे।

उन्होंने कहा कि शुकदेवजी महाराज ने राजा परीक्षित को मानव कल्याण के लिए सबसे सहज और सरल उपाय परमात्मा के श्रीचरणों में चिन्तन बताया। जिस अवस्था में जिस व्यवस्था में रहें, प्रभु का स्मरण, चिन्तन एवं ध्यान निरन्तर करते रहना चाहिये।

प्रवचन करते जीयर स्वामी।

शास्त्र में बताया गया है कि दान, तप और ध्यान आत्मा के उद्धार व कल्याण का प्रमुख साधन है। मनुष्य को अपनी मृत्यु को याद करते हुये बचपन, जवानी एवं बुढ़ापा में भगवान का चिन्तन मनन और उनके गुणों का श्रवण हर पल हर क्षण करते रहना चाहिए।

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जीयर स्वामी ने आगे बताया कि शास्त्र में कहा गया है साधक को संकट आने पर, मृत्यु निकट आने पर या अन्त समय आने पर घबराना नहीं चाहिए। भगवान प्रभु नारायण के नाम या (ऊँ) जप करते हुये शेष जीवन को बिताएं एवं स्मरण करें। भगवान के स्वरुप का स्मरण करें।

वेद शास्त्र में बताया गया है कि भगवान के श्रेष्ठ स्वरूप में ( चतुर्भुज ) स्वरूप एक है। स्वामी जी ने इस गूढ़ रहस्य को बताया कि चतुर्भुज का मतलब चार भुजा वाला स्वरूप जिसमें (शंख, चक्र, गदा, पद्म ) ऐसे स्वरूप वाले प्रभु को अपने दिल दिमाग में बैठाकर जप, तप, ध्यान एवं पूजन करना चाहिये। यही मावन जीवन के कल्याण का सबसे सरल और सुगम साधन बताया।

भक्तों को सचेत करते हुए जीयर स्वामी ने बताया कि प्रायश्चित द्वारा हमारा समाधान हो ही जाएगा, यह कोई जरूरी नहीं है। हो भी सकता है, नहीं भी हो सकता है। जिंदगी भर उल्टा पुल्टा काम किया और चार धाम की यात्रा करने से सब ठीक हो जाएगा, यह सोच गलत है। केवल यज्ञ से, पूजा से, दान से, तप से व्यक्ति को धार्मिक नहीं माना जाएगा।

जीयर स्वामी ने कहा कि धर्म के 8 खंबे होते हैं। यज्ञ अध्ययन तप, दान।  8 खंभों में से चार खंभे साझे हैं। उसे अच्छे लोग भी करते हैं और बुरे लोग भी करते हैं। लेकिन चार धर्म का जो खंभा है वह केवल अच्छे लोग ही करते हैं। यज्ञ बाबा विश्वामित्र, वशिष्ठ जैसे अच्छे लोग भी करते हैं और यज्ञ पापी रावण व कुम्भकरण जैसे लोग भी करते हैं। अच्छे लोग इसलिए करते हैं कि हमारे पास कुछ बल आ जाए कि उपकार करें। बुरे लोग इसलिए करते हैं कि दूसरे को सताएं।

अन्य चार धर्म के जो खंभे हैं, वह केवल अच्छे लोगों में ही पाया जाता है। धैर्य, क्षमा, संतोष, अलोभ। साबुन, सर्फ, जल से कपड़ा की गंदगी साफ हो जाती है। परंतु और गंदगी साफ नहीं होती है। जो व्यक्ति धर्म करता है वह धार्मिक है। जो हठ करके धर्म करता है वह धर्माभास है।

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