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भारत-नेपाल सीमा पर गायब हो गए 1240 बॉर्डर पिलर, कुछ नदियों में विलीन तो कई अतिक्रमण की भेंट चढ़े

अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर वास्तविक विभाजन रेखा तय करना हो रहा मुश्किल

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नदी के कटाव के मुहाने पर अब भी 53 सीमा स्तंभ, बचाने के लिए हो रहा प्रयास

भारत-नेपाल के बीच 1751 किमी की खुली सीमा पर लगे थे 8000 बॉर्डर पिलर

राजेश कुमार शर्मा की रिपोर्ट

जोगबनी (voice4bihar news)। भारत -नेपाल इंटरनेशनल बॉर्डर पर दोनों देशों के बीच सीमांकन के लिए लगाए गए सैकड़ों बॉर्डर पिलर गायब गायब हो गए हैं, जिससे यह तय करना मुश्किल हो रहा है कि दोनों देशों की वास्तविक विभाजन रेखा कौन सी है। कहीं प्रकृति ने इन पिलर का अस्तित्व मिटा दिया तो कहीं स्थानीय लोगों ने अतिक्रमण कर लिया। भारत-नेपाल के बीच 1751 किमी की खुली सीमा है, जिसमें दोनों देशों के सीमांकन के लिए नो मेन्स लैंड पर 8 हजार पिलर लगाए गए थे। इनमें से 1240 पिलर गायब हो चुके हैं।

हर वर्ष नदी में समा जाते हैं कई बॉर्डर पिलर, सीमांकन मुश्किल

बताया जाता है कि हर वर्ष यहां नदी में बाढ़ आने से कई पिलर नदी की धारा में विलीन हो चुके हैं। नेपाल से जुड़ा भारत का सीमावर्ती क्षेत्र हर वर्ष बाढ़ से प्रभावित होता है। बाढ़ के बाद स्थिति सामान्य होती है लेकिन बाढ़ के बाद सीमांकन को लेकर उहापोह की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। इसका मुख्य कारण नदी में बाढ़ के बाद होने वाले कटाव में बॉर्डर पिलर का विलीन होना है। इस साल भी कई बॉर्डर पिलर नदियों के कटान की चपेट में आने वाले हैं।

53 सीमा स्तम्भ (बॉर्डर पिलर) पर मंडरा रहा कटान का खतरा

बिहार व पश्चिम बंगाल की सीमा से सटे नेपाल के प्रदेश-एक के झापा जिले में 53 सीमा स्तम्भ पर अब भी कटान का खतरा मंडरा रहा है। भारत-नेपाल सीमा पर बहती नदी में बाढ़ के बाद कटान का जोखिम बना हुआ है। इस इलाके में भारत के साथ नेपाल की 144 दशमलव 2 किलोमीटर खुली सीमा है, जिसमें सिर्फ झापा जिले में नदी के कटान के कारण 53 सीमा स्तम्भ जोखिम में है।

इंटरनेशनल बॉर्डर पर आंगन में खड़ा सीमा स्तम्भ।

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नेपाल सशस्त्र पुलिस ने नेपाल सरकार को दी है जानकारी

नेपाल सशस्त्र पुलिस ने जानकारी दी है कि हाल तक बार्डर पर 185 सीमा स्तम्भ गायब हो चुके हैं। नेपाल सरकार को भेजी गई रिपोर्ट में कहा गया है कि अब तक 185 सीमा स्तम्भ में 119 का पता नहीं चल पाया है। नेपाल सशस्त्र पुलिस बल दो नम्बर गण झापा के प्रवक्ता प्रेम भण्डारी के अनुसार सीमा स्तम्भ को निरन्तर ढूंढा जा रहा है। अब तक 185 सीमा स्तम्भ अस्तित्व में नहीं हैं।

119 पिलर के बारे में कोई जानकारी नहीं

इसमें से 119 पिलर के बारे में कोई जानकारी नहीं है। अर्थात यह स्तंभ अभी तक बने या नहीं, इसका कोई प्रमाण नहीं है। अन्य 66 सीमा स्तम्भ नदी के कटान व डुबान के कारण गायब हुए हैं। सरकार को दी गयी सूचना में कहा गया है कि झापा जिले में सिर्फ बिहार- बंगाल से लगी नेपाल की सीमा में छोटे-बड़े 988 सीमा स्तम्भ हैं। पिछले एक वर्ष में सिर्फ 19 सीमा स्तम्भ होने की बात नेपाल सशस्त्र पुलिस ने कही है।

सीमा पर गायब बॉर्डर पिलर को लेकर दोनों देश गंभीर

भारत-नेपाल सीमा पर लगातार गायब हो रहे बॉर्डर पिलर को लेकर दोनों देश संजीदा हैं, लेकिन कोरोना काल के कारण इस पर अमल नहीं हो पा रहा है। तकरीबन डेढ़ वर्ष से सीमा में संयुक्त टीम के द्वारा सर्वे नहीं होने से समस्या जटिल होने की बात कही है। बताया जाता है कि कई स्थानों पर पिलर निरीक्षण का कार्य भी हुआ था लेकिन पुनःस्थापित करने का कार्य नहीं हो पाया है। प्रवक्ता डीएसपी भण्डारी के अनुसार नदी कटान व डुबान के कारण गायब सीमा स्तम्भ का तथ्यांक संकलन कर संबंधित निकायों में भेजा गया है।

कोविड संक्रमण के कारण नहीं हो रही दोनों देशों के अफसरों की बैठक

कोरोना महामारी के कारण भारत- नेपाल के अधिकारियों की संयुक्त बैठक नहीं होने से सीमा सर्वे की संयुक्त टीम काम नहीं कर पाई है, जिसके कारण जोखिम में रहे व हराए स्तम्भ का पुनर्निर्माण नहीं किया जा सका है। क्योंकि भारत नेपाल की संयुक्त सर्वे टीम यहां सर्वे कार्य नहीं कर पाई है। नेपाल–भारत का सीमांकन करने वाले कुछ पिलर नदी व तटीय क्षेत्र में है, जिससे बरसात के साथ ही सीमा स्तम्भ नदी कटान व डुबान के कारण गिर जाता है।

यह भी देखें : कहीं घर की दीवार तो कहीं आंगन में खड़ा है इंटरनेशनल बॉर्डर पिलर

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