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विधायक सरयू राय ने भाजपा को दिया जवाब

कहा, मेरे ऊपर लगे आरोपों की जांच करा लें मुख्यमंत्री

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रांची (voice4bihar desk)। झारखंड के निर्दलीय विधायक सरयू राय ने अपने ऊपर लगे आरोपों को लेकर भाजपा को जवाब दिया है। साथ ही इस संबंध में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिख कर खुद के खिलाफ जांच कराने की मांग की है। पत्र में विधायक राय लिखते हैं कि जमशेदपुर में पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास के निकटस्थ कुछ लोग विगत कई दिनों से उन पर आरोप लगा रहे हैं कि रघुवर सरकार में मंत्री रहते उन्होंने उस समय के अपने विभाग में कतिपय अनियमितता की है। उन्होंने इस बारे में उपायुक्त, पूर्वी सिंहभूम को ज्ञापन दिया और कहा कि इसकी सीबीआई जांच होनी चाहिये।

राय लिखते हैं कि इस बारे में उन्होंने केंद्रीय गृहमंत्री के पास लिखित प्रस्ताव भेजा कि सीबीआई उनके अधीन है। वे जमशेदपुर भाजपा के रघुवरवादियों की इन शिकायतों की जांच सीबीआई से करा दें। इससे ये लोग इससे संतुष्ट नहीं हैं। अब बयान दे रहे हैं कि इस बारे में राय को अमित शाह की बजाये मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को लिखना चाहिये था। भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता कुणाल षाड़ंगी ने जमशेदपुर में प्रेस कांफ्रेंस आयोजित कर भी यह बात कही थी। इसलिये राय ने झारखंड के मुख्यमंत्री को पत्र लिख कर खुद के खिलाफ जांच कराने की मांग की है।

राय के अनुसार, कुणाल षाड़ंगी ने उन पर दो आरोप लगाये हैं। पहला आरोप है कि मंत्री रहते सरयू राय के कार्यकाल में खाद्य आपूर्ति विभाग में बाबा कंप्यूटर्स को डाटा कॉलिंग के लिये बहाल किया गया, जिसका दर काफी उंचा था। यह दर 80 पैसा प्रति कॉल था जबकि सूचना प्रसारण विभाग यह काम 10 पैसा प्रति कॉल में करा रहा था। दूसरा आरोप है कि मंत्री रहते सरयू राय ने सुनील शंकर, अवकाश प्राप्त मार्केटिंग अफसर को प्रक्रिया का पालन किये बिना पुनः सेवा विस्तार का अवसर दे दिया।

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राय ने पत्र में अपनी ओर से आरोपों का जवाब भी दिया है। उनके अनुसार पहले आरोप के बारे में बाबा कम्प्यूटर ने खुद ही जवाब दे दिया है कि खाद्य आपूर्ति विभाग में उनकी नियुक्ति निविदा के आधार पर हुई थी। इसके पूर्व वे झारखंड सरकार के नगर विकास, आईटी विभाग एवं कतिपय अन्य विभागों में भी निविदा के आधार पर यह काम कर चुके हैं। इन सभी विभागों में उनका कार्य दर करीब-करीब समान था। राय लिखते हैं कि उस वक्त नगर विकास विभाग के मंत्री श्री सीपी सिंह थे जबिक आईटी तो खुद मुख्यमंत्री रघुवर दास ने अपने पास रखा था। राय के अनुसार उन पर आरोप लगाते समय रघुवर वादियों ने प्रेस को यह बताना उचित नहीं समझा।

दूसरे आरोप मार्केटिंग अफसर सुनील शंकर की पुनर्नियुक्ति के बारे में सरयू राय का कहना है कि सुनील शंकर आज भी धनबाद में काम कर रहे हैं। वे अन्य 15 लोगों के साथ निविदा आधारित उन्हीं शर्तों पर पुनर्नियुक्त किये गये हैं। कई लोगों की नियुक्ति राय के मंत्री नहीं रहने के बाद वर्तमान सरकार ने की है। राय ने कहा कि उनके कार्यकाल में ही तय हुआ था कि खाद्य आपूर्ति विभाग में कार्यबल की कमी के मद्देनजर जो सेवानिवृत्त हुये हैं, उनसे उनकी इच्छा जान कर विभाग में काम करने का अवसर दिया जाय।

सुनील शंकर को वे तबसे जानते हैं जब वे पटना में विद्यार्थी थे। उनका परिवार कदमकुआं में रहता था। बाद में उनका विवाह भी राय के मित्र परिवार में हुआ। अवकाश ग्रहण के बाद उन्होंने इच्छा जाहिर की कि विभागीय घोषणा के अनुरूप निर्धारित शर्तों पर वे अवकाश प्राप्त करने के बाद विभाग को सेवा देना चाहते हैं। वे योग्य थे, उनपर आरोप नहीं थे। मुझे एवं विभागीय सचिव को उन्होंने आवेदन दिया। विभाग ने उन्हें नियुक्त किया। इस बीच कई अन्य लोगों ने भी विभाग में सेवा देने की इच्छा जाहिर की। विभागीय प्रक्रिया के अनुसार सुनील शंकर सहित अन्य करीब डेढ़ दर्जन लोग नियुक्त किये गये। वे अभी भी कार्यरत हैं।

फिर भी यदि लगता है कि सुनील शंकर की नियुक्ति में अनियमितता हुई है, इससे सरकार को वित्तीय नुकसान हुआ है, उन्हें वह वित्तीय लाभ मिला है जिसके वे हकदार नहीं थे और इस कारण राजकोष पर अतिरिक्त बोझ पड़ा है और यह सब मेरे अनियमितता बरतने के कारण हुआ है तो मुख्यमंत्री इसकी त्वरित जांच किसी भी सक्षम एजेंसी से करा लें। दोषी पाये जाने पर मैं सजा भुगतने के लिये तैयार हूं।

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