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रुपेश हत्याकांड : क्यों नहीं पच रही पुलिस की मर्डर थ्योरी

रुपेश की हत्या महज रोडरेज का प्रतिशोध है या कहानी कुछ और है

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पटना (voice4bihar Desk)। इंडिगो के स्टेशन मैनेजर रुपेश कुमार की हत्या महज रोडरेज के प्रतिशोध में की गयी या इसकी कोई कड़ी पुलिस से छूट रही है? पटना के एसएसपी ने बुधवार को जबसे इस वारदात के मुख्य आरोपित ऋतुराज के पकड़़े जाने का खुलासा किया है तभी से यह सवाल लोगों के जेहन में घूम रहा है। स्टेशन मैनेजर रुपेश की पत्नी ने भी पुलिस के तर्कों का नकारते हुए कहा है कि ऐसी किसी रोडरेज की जानकारी नहीं है। अगर ऐसी कोई वारदात हुई होती तो वे अवश्य बताते। पत्नी ने कहा कि रूपेश किसी से ऊंची आवाज में बात तक नहीं करते थे, ऐसे में सड़क पर मारपीट की बात पूरी तरह गलत है।

केवल रूपेश की पत्नी ने ही नहीं नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने भी ट्वीट कर कहा कि रूपेश हत्याकांड में मैंने आज से 15 दिन पहले कह दिया था नीतीश कुमार जी अपने नाक के बाल और आंखों के तारे को बचाने को लिए बकरा खोज रहे हैं। आज बिहार पुलिस ने बकरा खोज ही लिया। यक़ीन मानिए ऐसी कहानी C ग्रेड की घिसी-पिटी फ़िल्मों में भी नहीं मिलेगी। भाजपा सांसद विवेक ठाकुर ने इसे पुलिस का चौंकाने वाला खुलासा कहा है तो लोजपा ने भी पुलिस पर अंगुली उठाते हुए रुपेश हत्याकांड की जांच सीबीआई से कराने की मांग दोहरायी है।

क्या पता चलता है आरोपित के रीयल टाइम लोकेशन के खुलासे से

एसएसपी उपेन्द्र शर्मा मे बताया कि हत्यारे ने वारदात में जिस चोरी की बाइक का इस्तेमाल किया था उसका नंबर प्लेट बदल दिया था । नंबर के आधार पर जब पुलस टीम जांच करने दरभंगा गयी तो टीम को उस नंबर की बाइक वहां खड़ी मिली । वह गाड़ी किसी और के नाम पर है । एसएसपी ने बताया कि 12 जनवरी को वारदात के बाद पुलिस ने सीसीटीवी के जरिए बदमाशों का पता लगाने का प्रयास शुरू किया । 13 जनवरी को पुलिस ने घटनास्थल से लेकर इंद्रपुरी तक सीसीटीवी फुटेज की जांच की।

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हत्या के आरोप में गिरफ्तार ऋतुराज के पास से बरामद हथियार के साथ पुलिसकर्मी।

14 जनवरी को इंद्रपुरी से दीघा आशियाना रोड , 15 को आशियाना रोख बकरी बाजार रुकनुपरा तक जांच की गयी । 16 जनवरी को सगुना मोड़ पर कोई फुटेज नहीं मिला । इसके बाद घटनास्थल से सीसीटीवी की जांच शुरू की गयी । वहां तीन बजे दिन में 12 जनवरी को बदमाश सीपीडब्लूडी कार्यालय के पास दिखे। 18 जनवरी की जांच में पता चला कि बदमाश 12 जनवरी को 2.05 बजे राजवंशी नगर मंदिर के पास दिखे । इन लोगों ने वहां रूपेश का इंतजार किया ।

जब रुपेश वहां पहुंचे तो ऋतुराज और उसके साथी दो अलग-अलग बाइक से उनके पीछे गये और वारदात को अंजाम देकर निकल गये। 20 जनवरी को पुलिस ने  चितकोहरा पुल के पास लगे कैमरे की जांच की तो पता लगा कि वह चितकोहरा के पंजाबी कॉलोनी के रास्ते आया था।  दोनों बाइक पर सवार बदमाशों ने लारा पेट्रोल पंप पर 2. 45 बजे चार – चार लीटर पेट्रोल भरवाया था । 22 जनवरी को जांच में पता लगा कि ये लोग फोर्ट हॉस्पीटल के पीछे गये हैं । पुलिस ने वहां के पचास मीटर के दायरे को जांच के घेरे में ले लिया । वहां सीसीटीवी फुटेज में ऋतुराज बाइक से आता-जाता दिखा।

पता लगा कि वह कन्हाई नगर कालोनी में किराये का फ्लैट लेकर पली और बच्चे के साथ रहता है। घटना के दिन वह 2 बजकर 29 मिनट पर घर से निकला। दोस्त के घर अलकापुरी संदलपुर गया। पुलिस टीम को ऋतुराज का फोटो और आधार कार्ड मिला । 12 जनवरी को घटना के बाद ठसका लोकेशन रामकृष्णा नगर मिला। अगले दिन वह रांची भाग गया। जब उसे पता लगा कि पुलिस टेंडर व अन्य कारणों जांच कर रही है तब वह पटना 28 जनवरी को पटना लौट गया।

पटना आने पर उसने अपना मोबाइल ऑन किया और फिर ऑफ कर लिया। इससे पुलिस को जानकारी मिल गयी कि ऋतुराज पटना आ चुका है । जब पटना पुलिस उसके घर पहुंची तो वह बाहर निकल रहा था । मंगलवार को जब पुलिस टीम सादी वर्दी में उसके घर पहुंची तो वह गेट पर ही मिल गया । वह बाहर जाने के लिए गेट पर जूता पहन रहा था उसी वक्त पुलिस ने उसे दबोच लिया। पुलिस ने उसके पास से पिस्तौल, चार कारतूस और हत्या में इस्तेमाल की गयी चोरी की बाइक  उसके पास से बरामद कर लिया

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