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बेरोजगारों से चिढ़ती क्यों है नीतीश सरकार

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रुपाली झा

बिहार में लोग पूछने लगे हैं कि बिहार सरकार बेरोजगारों से चिढ़ती क्यों है। बिहार में सरकारी घोषणाओं को देखें तो आये दिन यहां सैकड़ों-हजारों लोगों को नौकरी देने की खबरें अखबारों की सुर्खियां बनतीं हैं। पर, उससे भी ज्यादा यहां इन नौकरी की प्रक्रिया में धांधली की खबरें देखने-सुनने को मिलतीं हैं।

हाल के दिनों की बात करें तो इस महीने राजधानी पटना में कम-से-कम तीन ऐसे प्रदर्शन हुए जो सीघे रोजगार से जुड़े थे। बिहार में इन दिनों यूं तो बहाली की कई प्रक्रियायें चल रहीं हैं पर उनमें से तीन हैं जिन्हें लेकर विवाद चरम पर है। इनमें से 94 हजार प्राथमिक शिक्षकों के नियोजन का मामला अभी सबसे गरम है। अभ्यर्थियों के करीब हफ्ते भर के धरना-प्रदर्शन के बाद अगस्त 2019 में शिक्षा विभाग ने 94 हजार प्राथमिक शिक्षकों के नियोजन का विज्ञापन जारी किया था। शिक्षा विभाग की लापरवाही के चलते बहाली का यह मामला कोर्ट में चला गया। चार दिसंबर, 2020 को मामला कोर्ट से बाहर आया। इसके बाद सरकार की नीयत बदल गयी।

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सरकार बहाली के इस विज्ञापन को रद्द कर नया विज्ञापन निकालना चाहती है। सरकार का कहना है कि वह फर्जीवाड़ा से बचना चाहती है पर अभ्यर्थियों का कहना है कि सरकार बहाली नहीं करना चाहती है। इस मुद्दे को लेकर सैकड़ों अभ्यर्थी, जिनमें काफी संख्या में महिलाएं भी हैं, 18 जनवरी से गर्दनीबाग में धरना पर बैठे हैं। 19 जनवरी को प्रशासन ने इन आंदोलनरत अभ्यर्थियों पर लाठीचार्ज कर उनके टेंट, शामियाना और खाना बनाने की सामग्री तथा उपकरण नष्ट कर दिया इसके बावजूद ये अभ्यर्थी अपनी मांगों पर डटे हुए हैं।

अभ्यर्थियों का कहना है कि सरकार काउंसिलिंग का शिड्यूल जारी कर उन्हें नियुक्त करे। साथ ही उनके प्रमाण पत्रों को जांच करे और सही पाये जाने पर सैलरी दे, फर्जी पाये जाने पर जेल भेज दे। सरकार जब तक ऐसा नहीं करती है तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।

इधर, इस मामले में सरकार के रुख की बात करें तो उसने इन अभ्यर्थियों पर लाठी चलवाने के बाद इनकी बातों को सुनने तक की जहमत अब तक नहीं उठायी। धरनास्थल पर तैनात मजिस्ट्रेट की पहल के बावजूद शिक्षा मंत्री छात्रों से नहीं मिले। प्राथमिक शिक्षा निदेशक छात्रों के प्रतिनिधिमंडल से मिले पर उनके पास इनके सवालों का कोई जवाब नहीं था। अब छात्रों ने 27 जनवरी को राजधानी में बड़ा प्रदर्शन करने की चेतावनी दी है।

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