Header 300×250 Mobile

पैसों के लिए मां-बाप को मार डाला, अब पत्नी, बेटे संग जेल में कटेगी जिंदगी

राजधानी पटना में घटी मां-बाप की हत्या की दिल दहला देने वाली वारदात

- Sponsored -

688

- Sponsored -

- sponsored -

पटना (voice4bihar desk)। यह कहानी है राजधानी पटना की। यहां एक बेटे ने अपनी पत्नी और बेटे के साथ मिलकर मां-बाप को मौत के घाट उतार दिया। मां-बाप का कसूर बस इतना था कि उन्होंने अपने इस नालायक बेटे को पैसे देने से मना कर दिया था। पुलिस ने वृद्ध दंपति की हत्या करने वाले बेटे, बहू और पोते को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। साथ ही पुलिस ने उस रस्सी को भी बरामद कर लिया है जिससे फंदा बनाकर दोनों की सांसें बंद कर दी गयी थी।

घटना राजधानी पटना के रामकृष्णानगर की है। यहां के शिवाजी चौक के समीप ब्रज किशोर प्रसाद अपना मकान बनाकर रहते थे। इसे मकान में ब्रज किशोर प्रसाद की पत्नी कनकलता देवी के अलावा उनकी इकलौती संतान रंजीत उर्फ निप्पू, बहू संजू देवी और पोता अभिषेक भी रहते थे।

ब्रज किशोर प्रसाद 13 साल पहले सरकारी स्कूल में फिजिकल टीचर की नौकरी से सेवानिवृत्त हुए थे। उन्हें पेंशन मिलती थी जिस पर रंजीत और उसकी पत्नी की नजर थी। रंजीत टेंपो चलाता था लेकिन उससे उसका खर्चा पूरा नहीं होता था। इसके चलते पैसों को लेकर घर में हमेशा किचकिच होती थी। इसी किचकिच से तंग आकर तीन-चार साल पहले ब्रज किशोर प्रसाद अपनी पत्नी को लेकर पास में किराये के मकान में रहने चले गये थे।

मां-बाप के अलग हो जाने के बाद रंजीत को खाने पर भी आफत हो गयी। करीब दो साल पहले रंजीत ने मां-बाप को माफी मांग कर मनाया और उन्हें वापस अपने घर में रहने को राजी कर लिया। दो साल से ब्रज किशोर प्रसाद अपनी पत्नी के साथ फिर अपने घर में आकर रहने लगे। मां-बाप घर के ऊपर वाले फ्लोर पर रहते थे जबकि बेटा, बहू और पोता नीचे वाले फ्लोर में रहते थे।

2019 में रंजीत की बेटी की शादी में दादा यानी ब्रज किशोर प्रसाद ने भरपूर आर्थिक मदद की। यही वजह थी कि ब्रज किशोर प्रसाद जब अपने मकान में आकर दुबारा रहने रहने लगे तो शुरू में सब ठीक ठाक रहा लेकिन बाद में पैसे को लेकर किचकिच फिर शुरू हो गयी। ब्रज किशोर प्रसाद जरूरत के मुताबिक पैसे देते थे पर इससे रंजीत का काम नहीं चलता था क्योंकि उसका खर्चा ज्यादा था। इसको लेकर रंजीत की अपने मां-बाप से रोज किचकिच होती थी।

महुली में ब्रज किशोर प्रसाद ने छह कट्‌ठे का एक और प्लॉट ले रखा था। इसके अलावा उनके पुश्तैनी घर गौरीचक में खानदानी संपत्ति भी थी। मोहल्ले के लोगों का कहना है कि रंजीत गौरीचक की जमीन को बेचना चाहता था जिसके लिए उसके पिता तैयार नहीं थे। दूसरी ओर, रंजीत हर हाल में अपने पिता की संपत्ति पर मालिकाना हक चाहता था। ब्रज किशोर प्रसाद के जीते जी यह संभव नहीं था। इसलिए उसने ब्रज किशोर प्रसाद यानी अपने पिता को ही रास्ते से हटाने की ठानी। इसके लिए उसने अपनी पत्नी के साथ मिलकर साजिश रची।

विज्ञापन

ब्रज किशोर प्रसाद रोज सुबह दूघ लाने जाते थे। साजिश के मुताबिक हमला उसी वक्त करना था। 13 मई की सुबह उठकर ब्रज किशोर प्रसाद दूध लाने के लिए जाने की तैयारी कर रहे थे इधर रंजीत और उसकी पत्नी उनकी अंतिम यात्रा की तैयारी कर रहे थे। ब्रज किशोर प्रसाद ऊपर वाले फलोर पर रहते थे। सीढ़ियों से नीचे उतरते समय जब वे नीचे वाले फ्लोर के दरवाजे के सामने पहुंचे तो दरवाजे के अंदर पहले से मुश्तैद रंजीत ने झटके से दरवाजा खोल दिया। दरवाजे से टकराकर ब्रज किशोर प्रसाद सीढ़ियों पर गिर गये। रंजीत इसी मौके के इंतजार में था।

पिता के गिरते ही उसने और उसकी पत्नी ने मिलकर उन्हें दबोच लिया। इतने में रंजीत का बेटा पहले से तैयार रस्सी का फंदा लेकर आ गया और तीनों ने मिलकर ब्रज किशोर का गला उसी फंदे से घोंट दिया। इधर, शोरगुल सुनकर रंजीत की मां कनकलता पहुंची तो तीनों ने मिलकर उनका भी गला घोंटकर उन्हें भी मौत की नींद सुला दिया।

इसके बाद तीनों ने मिलकर दोनों की लाश पहले तल के कमरे में ही रख दी और पड़ोसियों को बताया कि दोनों की मौत कोरोना से हो गयी। मोहल्ले के लोगों को इस बात पर विश्वास नहीं हुआ। क्योंकि उन्हें बाप-बेटे के कटु रिश्ते की जानकारी पहले से थी। ब्रज किशोर प्रसाद ने रंजीत के खिलाफ मारपीट का मामला पहले ही रामकृष्णानगर थाने में दर्ज करा रखा था।

रंजीत ने अपने मां-बाप की कोरोना से मौत की सूचना भूतनाथ रोड में रहने वाले अपने एक रिश्तेदार को भी दी। सूचना पाकर जब रिश्तेदार मौके पर पहुंचा तो उसे रंजीत की कहानी पर विश्वास नहीं हुआ। उसने रामकृष्णानगर थाने की पुलिस को घटना की सूचना दी।

पुलिस मौके पर पहुंची तो उसने दंपति के कोरोना संक्रमित होने अथवा उनका इलाज कराये जाने के संबंध में कागजात मांगे तो रंजीत के होश उड़ गये। कोरोना की बात तो बनावटी थी। वह ऐसा कोई कागजात पुलिस को नहीं दे सका। पुलिस के सवालों में जब रंजीत और उसकी पत्नी उलझने लगे तो पुलिस तीनों को थाने ले गयी और लाश को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया।

लाश का पंचनामा करने के दौरान पुलिस को ब्रज किशोर प्रसाद के सिर में चोट लगने की जानकारी हुई। सीढ़ी पर गिरने से ब्रज किशोर प्रसाद का सिर फट गया था। तीनों मिलकर जब उनका गला घोंट रहे थे और फिर उनकी लाश को कमरे रख रहे थे उस वक्त संयोग से तीनों की अंगुलियों में खून लग गया था। हड़बड़ी में उन्हें इसका पता नहीं चला और पुलिस के आने तक वे इसे साफ भी नहीं कर सके।

फॉरेंसिक विशेषज्ञों ने जब इस खून का मिलान किया तो वह ब्रज किशोर प्रसाद का ही था। रंजीत, उसकी पत्नी संजू और बेटे अभिषेक के पास इसका कोई जवाब नहीं था। क्योंकि तीनों ने कहा था कि मौत कोरोना से हुई है। उन्होंने ब्रज किशोर प्रसाद के सीढ़ी पर गिरने की बात नहीं कही थी। पुलिस ने जब रंजीत के कमरे की तलाशी ली तो उसमें वह रस्सी भी मिल गयी जिससे फंदा बनाकर उसने अपने जन्मदाता मां-बाप की हत्या करने जैसा जघन्य अपराध किया था। इसके बाद तीनों ने हत्या की पूरी कहानी पुलिस को बता दी। पुलिस ने फिलहाल तीनों को जेल भेज दिया है।

- Sponsored -

- Sponsored -

- Sponsored -

- Sponsored