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निगरानी जांच : शिक्षकों का फोल्डर जमा करने के लिए रजिस्ट्रेशन शुरू, जरूरी होंगे ये कागजात

विजिलेंस को कागजात जमा नहीं करने वाले नियोजित शिक्षकों को आखिरी मौका

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20 जुलाई 2021 तक दिया गया है वक्त, विलंब हुआ तो फिर पड़ेगा महंगा

13 पर्सनल इनफॉरमेशन देने के बाद मिलेगा लॉगिन आईडी, फिर अपलोड होंगे दस्तावेज

पटना (voice4bihar news)। बिहार में 2006 से 2015 के बीच नियुक्त लाखों शिक्षकों के फजीवाड़े की निगरानी जांच के लिए उन 80 हजार से अधिक शिक्षकों को बिहार सरकार ने अंतिम मौका दिया है जिनके प्रमाण पत्रों के फोल्डर नियोजन इकाई से गायब हैं। कई जिलों में ऐसे शिक्षकों के नाम शिक्षा विभाग की वेबसाइट पर अपलोट कर दिये गए हैं। इन शिक्षकों के लिए कागजात जमा करने के लिए रजिस्ट्रेशन शुरू हो चुका है। यह रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया बिल्कुल आसान है। अपनी पर्सनल इंफॉरमेशन देकर लॉगिन आईडी तैयार करने के बाद सभी कागजात अपलोड किये जा सकते हैं।

रजिस्ट्रेशन करने के लिए जरूरी होंगे ये कागजात

निगरानी जांच के लिए फोल्डर जमा करने के लिए पंजीयन कराने वाले शिक्षकों को सबसे पहले कुछ जरूरी इनफॉरमेशन देने होंगे। इसके लिए निम्नांकित जानकारियां देनी होंगी। –
1. नियुक्ति तिथि                2. UAN नंबर यानि ईपीएफओ का विवरण
3. शिक्षक का नाम             4. पिता या पति का नाम
5. जन्मतिथि                      6. लिंग
7. मोबाइल नंबर               8. आधार नंबर
9. जिला का नाम              10. प्रखंड का नाम
11. पंचायत का नाम         12. विद्यालय का यू डाइस कोड
13. ईमेल आईडी व पासवर्ड

उपरोक्त विवरण भरने के पश्चात रजिस्ट्रेशन हो जाएगा। सफलतापूर्वक पंजीयन होने के उपरांत एक आईडी एवं पासवर्ड मिलेगा, उसी आईडी पासवर्ड से लॉगिन करने के पश्चात सभी प्रमाण पत्र, फोटो एवं सिग्नेचर अपलोड किए जाएंगे। ध्यान रहे कि शिक्षा विभाग की वेबसाइट पर फोल्डर जमा नहीं करने वालों की सूची में जिनका नाम है, सिर्फ वही शिक्षक अपना पंजीयन कराएंगे।

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निगरानी जांच के दायरे में क्यों है शिक्षक नियोजन?

उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार ने विभिन्न चरणों के तहत 2006 से लेकर 2015 तक शिक्षकों की बहाली की। यह बहाली मेधा सूची के आधार पर हुई थी। इसमें कई नियोजन इकाईयों ने अवैध कमाई के लिए काफी घालमेल किया और नियमों को ताक पर रख अयोग्य अभ्यर्थियों को भी शिक्षक की नौकरी दे दी। इनमें नॉनमैट्रिक व जाली प्रमाण पत्र वाले भी अभ्यर्थी शामिल हैं। नियोजन पर उंगली उठी तो कई नियोजन इकाइयों ने दस्तावेज गायब कर दिये। कई दफ्तरों में आग लगने की घटनाएं भी सामने आई, जिनमें शिक्षक नियोजन संबंधी दस्तावेज जलने की बात कही गयी।

TET/STET की अनिवार्यता के बाद भी शिक्षक नियोजन में जारी रही धांधली

शुरुआती दौर में हुई इस धांधली को रोकने के लिए वर्ष 2011 में सरकार ने टीईटी व एसटीईटी की बाध्यता लगाई। इसके भी जाली प्रमाण पत्र व अंक पत्र के आधार पर सैकड़ों की संख्या में अभ्यर्थी आए और उनकी बहाली भी करा ली गयी। मामले को गंभीर होता देख पूरे राज्य के शिक्षक बहाली की जांच निगरानी के हवाले कर दी गयी। निगरानी ने जांच शुरू होते ही चेतावनी दी थी कि फर्जी प्रमाण पत्र पर बहाल शिक्षक यदि खुद ही अपना इस्तीफा सौंप देते हैं तो वे गिरफ्तारी की कार्रवाई से बच सकते हैं।

तय समय के अंदर कागजात जमा नहीं कराते हैं तो जाएगी नौकरी

निगरानी की चेतावनी के बाद राज्य में करीब 10 हजार शिक्षकों ने अपना इस्तीफा देकर जांच से पिंड छुड़ा लिया। इस बीच मामले में हाईकोर्ट ने खुद संज्ञान लिया था और जांच अपनी देख रेख में करानी शुरू की। जांच में ऐसे-ऐसे खुलासे हुए कि सरकार की भी आंख-भौं तन गई। फिर एफआईआर व अन्य कार्रवाई शुरू हो गई। बावजूद काफी संख्या में फर्जी शिक्षक ढीठता दिखाते हुए जमे हुए हैं। ऐसे ही शिक्षकों पर कार्रवाई के लिए निगरानी ने सरकार व हाईकोर्ट को अपनी रिपोर्ट दी है। अब इनके नाम सार्वजनिक कर इनसे कागजात जमा कराने को कहा गया है। 20 जुलाई तक कागजात नहीं जमा हुए तो शिक्षक की नौकरी भी जा सकती है।

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