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सबौर में खुलेगा कृषि जैव प्रौद्योगिकी महाविद्यालय

नीतीश मंत्रिमंडल ने दी मंजूरी, 24 शैक्षणिक और 15 गैर शैक्षणिक पदों के सृजन की स्वीकृति

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पटना (Voice4bihar desk)। भागलपुर के सबौर में कृषि जैव प्रौद्योगिकी महाविद्यालय की स्थापना की स्वीकृति नीतीश मंत्रिमंडल ने दी है। बिहार कृषि विश्वविद्यालय सबौर के अधीन स्थापित होने वाले इस महाविद्यालय के लिए 24 शैक्षणिक और 15 गैर शैक्षणिक पदों अर्थात् कुल 39 पदों के सृजन की स्वीकृति दी गयी है। वित्तीय वर्ष 2021-22 में महाविद्यालय कार्यों के सुचारू संपादन के लिए बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर को तीन करोड़ रूपये सहायक अनुदान की स्वीकृति दी गई है।

राज्य में कृषि क्षेत्र के सर्वांगीण विकास के लिए वर्ष 2008 से लगातार कृषि रोड मैप कार्यक्रम लागू किया जा रहा है । कृषि रोड मैप कार्यक्रम के अधीन कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा को सुदृढ़ करने पर विशेष बल दिया जा रहा है । कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा के लिए वर्ष -2006 के बाद से राज्य में उद्यान महाविद्यालय, नालंदा, मंडन भारती कृषि महाविद्यालय, सहरसा, भोला पासवान शास्त्री कृषि महाविद्यालय , पूर्णियां, वीर कुंवर सिंह कृषि महाविद्यालय, डुमरांव, डॉ. कलाम कृषि महाविद्यालय, किशनगंज, मत्स्यकी महाविद्यालय, किशनगंज, पशु विकित्सा महाविद्यालय, किशनगंज और वाणिकी महाविद्यालय, मुंगेर की स्थापना की गयी है।

कृषि रोडमैप 2017-22 में कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा की व्यवस्था को और सुदृढ़ बनाने के लिए कृषि जैव प्रौद्योगिकी महाविद्यालय की स्थापना की जा रही है । इस महाविद्यालय की स्थापना से जलवायु परिवर्तन के कारण फसलों पर बढ़ते बायोटिक एवं एबायोटिक स्ट्रेस को बदलते परिवेश के अनुसार कम समय में जलवायु के अनुकूल फसल प्रभेद विकसित करने में मदद मिलेगी। बायोटेक्नोलॉजी के प्रयोग से फसल प्रभेद के विकास में मदद मिलेगी।

बायोटेक्नॉलॉजी तकनीक को अपनाकर पौध सामग्री को बड़े पैमाने पर गुणन किया जा सकता है तथा किसानों को कम समय में बीमारी रहित पौध सामग्री उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। बायोटेक्नॉलॉजी तकनीक के प्रयोग से बीज की शुद्धता की जांच करने में मदद मिलेगी। बायोटेक्नोलॉजी तकनीक के प्रयोग से नये प्रकार की बीमारी की पहचान तथा निदान में मदद मिलेगी।

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बिहार कृषि विश्वविद्यालय के अधीन आरा, भोजपुर में एक नये कृषि अभियंत्रण महाविद्यालय की भी स्थापना की स्वीकृति नीतीश मंत्रिमंडल ने मंगलवार को दी। इस महाविद्यालय के लिए 36 शैक्षणिक तथा 19 गैर – शैक्षणिक सहित कुल 55 पदों के सृजन की स्वीकृति दी गयी। वर्तमान वित्तीय वर्ष में महाविद्यालय के कार्यों के सुचारू संपादन के लिए बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर को पांच करोड़ रुपये सहायक अनुदान की स्वीकृति प्रदान की गई। इस महाविद्यालय की स्थापना से राज्य कृषि परिस्थितियों के अनुसार छोटे जोत वाले किसानों के लिए उपयुक्त कृषि यंत्र को विकसित करने के लिए अनुसंधान का कार्य संभव हो सकेगा।

पोस्ट हार्वेस्ट गतिविधियों का महत्व लगातार बढ़ता जा रहा है। कृषि उपज को खेत से उपभोक्ता तक पहुंचाने के लिए कटनी के बाद सुरक्षित भंडारण, प्रसंस्करण, संरक्षण इत्यादि के लिए नवीनतम तकनीक की आवश्यकता है। महाविद्यालय की स्थापना से इस कार्य को गति मिलेगी। जलवायु परिवर्तन के फलस्वरूप कृषि में सिंचाई जल की कमी की आशंका बनी रहेगी। सिंचाई जल के महत्तम उपयोग के लिए उपयुक्त तकनीक का विकास महत्वपूर्ण होगा । कृषि अभियंत्रण महाविद्यालय की स्थापना से राज्य के युवाओं को उच्च शिक्षा के क्षेत्र में नये अवसर उपलब्ध होंगे।

डॉ . राजेन्द्र प्रसाद केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा के अधीन पंडित दीन दयाल उपाध्याय उद्यान एवं वानिकी महाविद्यालय , मोतिहारी में स्नातक स्तर पर नामांकित बिहार के निवासी छात्रों को इस विश्वविद्यालय के अधीन कृषि, कृषि अभियंत्रण एवं मत्स्यकी महाविद्यालयों के स्नातक छात्रों के समान स्टाइपेन्ड देने की स्वीकृति प्रदान की गई। कृषि रोड मैप के माध्यम से राज्य में कृषि क्षेत्र के सर्वांगीण विकास का कार्यक्रम चलाया जा रहा है।

कृषि रोड मैप के अधीन कृषि शिक्षा को बल देने के लिए राज्य में नये कृषि शिक्षा संस्थानों ( महाविद्यालयों एवं विश्वविद्यालयों ) की स्थापना की गयी है । इसी क्रम में पूसा के कृषि शिक्षा में ऐतिहासिक महत्व को देखते हुये तत्कालीन राजेन्द्र कृषि विश्वविद्यालय को डॉ. राजेन्द्र प्रसाद केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय के रूप में 07 अक्टूबर 2016 को सम्परिवर्तित किया गया। डॉ. राजेन्द्र प्रसाद केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय के अधीन भारत सरकार द्वारा वर्ष 2018 में पंडित दीन दयाल उपाध्याय उद्यान एवं वानिकी महाविद्यालय की स्थापना मोतिहारी में की गयी।

कृषि शिक्षा के प्रति गरीब किन्तु मेधावी छात्रों को आकर्षित करने के लिए राज्य सरकार द्वारा स्नातक स्तर पर नामांकित सभी कृषि छात्रों को 2000 रुपये प्रतिमाह स्टाइपेंड तथा 6000 रुपये प्रति वर्ष पुस्तक आदि क्रय करने के लिए सहायता दी जा रही है। अब यह सहायता पंडित दीन दयाल उपाध्याय उद्यान एवं वानिकी महाविद्यालय, मोतिहारी में स्नातक स्तर पर नामांकित बिहार के छात्रों को उपलब्ध होगा । इसके फलस्वरूप छात्रों का मनोबल बढ़ेगा एवं राज्य के युवा कृषि शिक्षा के प्रति आकर्षित होंगे।

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