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शिक्षक बहाली : चीफ जस्टिस ने मंगायी दिव्यांग संघ की फाइल

पटना हाईकोर्ट हटा सकता है बहाली पर से रोक, महाधिवक्ता ने की पैरवी

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पटना (voice4bihar desk)। प्राथमिक शिक्षक अभ्यर्थियों के ट्वीटर पर चलाये गये अभियान #Bihar_Needs_Teachers का असर दिखने लगा है। सोमवार को ट्वीटर पर चलाये गये इस अभियान के बाद शिक्षा मंत्री विजय कुमार चौधरी ने कहा था कि पटना हाईकोर्ट द्वारा रोक लगाये जाने के कारण नियुक्ति प्रक्रिया रुकी हुई है। साथ ही उन्होंने कहा था कि न्यायालय आज इजाजत दे तो हम कल से नियुक्ति शुरू कर देंगे। मीडिया में यह बयान देने के बाद उन्होंने विभागीय स्तर पर भी कार्रवाई की जिसका असर बुधवार को पटना हाई कोर्ट में दिखा।

बुधवार को बिहार सरकार के महाधिवक्ता ललित किशोर ने शिक्षा मंत्री के अनुरोध पर एक बार फिर इस मामले को पटना हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस के समक्ष रखा। महाधिवक्ता ने चीफ जस्टिस से कहा कि राज्य सरकार ने हलफनामा दायर कर अंडरटेकिंग दिया है कि विकलांग उम्मीदवारों को चार प्रतिशत आरक्षण का लाभ दिया जाएगा। इसी मुद्दे को लेकर ब्लाइंड एसोसिएशन ने रिट याचिका दायर की थी, जिस पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने बहाली पर रोक लगा दी थी।

उन्होंने चीफ जस्टिस को यह भी जानकारी दी कि गत मार्च में ही मामले की सुनवाई निर्धारित थी, लेकिन होली के अवकाश व कोरोना के कारण सुनवाई नहीं हुई। महाधिवक्ता ने कहा कि याचिकाकर्ता की मांग सरकार ने मांग ली है, इसलिए पूरी बहाली को रोके रखने का कोई औचित्य नहीं रह गया है। इस पर चीफ जस्टिस ने कोर्ट मास्टर को संधित फाइल पेश करने का निर्देश दिया।

अब तक इतने रोक लगे हैं कि अभ्यर्थियों को बहाली का भरोसा नहीं

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चीफ जस्टिस के आज के रुख के बाद बिहार में करीब 94 हजार प्राथमिक शिक्षकों की नियुक्ति पर हाईकोर्ट की लगी रोक हटने की उम्मीद बढ़ गयी है। हालांकि 2019 में निकले शिक्षक बहाली के इस विज्ञापन पर एक के बाद एक इतने रोक लगे हैं कि अभ्यर्थियों को अब भी भरोसा नहीं हो रहा है कि रोक हटेगी और बहाली होगी। कई अभ्यर्थियों ने सोशल मीडिया पर कहा कि जब तक उन्हें नियुक्ति पत्र नहीं मिल जाता है, इस पर विश्वास करना मुश्किल है।

यहां बता दें कि 94 हजार प्राथमिक शिक्षकों की बहाली को लेकर जारी प्रकिया पिछले करीब तीन महीने से अपने अंतिम मुकाम पर आकर अटकी हुई है। विभाग ने पंचायत और प्रखंड वार अभ्यर्थियों की मेरिट लिस्ट बना ली है। अब केवल काउंसिलिंग कर अभ्यर्थियों को नियोजन पत्र देना बाकी रह गया है। जनवरी माह में कड़ाके की ठंड के बीच अभ्यर्थियों ने गर्दनीबाग में 11 दिनों तक लगातार धरना दिया था। इस दौरान पुलिस की लाठियां खाकर भी अभयर्थी धरना पर डटे रहे। बाद में विभाग द्वारा एक हफ्ते में काउंसिलिंग की शिड्यूल जारी करने का आश्वासन मिलने पर उन्होंने धरना समाप्त किया।

हालांकि पटना हाईकोर्ट द्वारा लगायी गयी रोक के कारण विभाग काउंसिलिंग की शिड्यूल नहीं जारी कर सका। अभ्यर्थी इसके बाद से कोरोना के बीच भी अपने आंदोलन को जिंदा रख हुए हैं। सोशल मीडिया पर वे लगातार अभियान चला रहे हैं। पटना हाईकोर्ट के आज के रुख को देखते हुए माना जा रहा है कि जून के पहले हफ्ते में यह मामला कोई निर्णायक रुख अख्तियार कर सकता है।

शिक्षा मंत्री विजय कुमार चौधरी ने पिछले दिनों कहा था कि विभाग आरक्षण के सभी प्रावधानों का पालन करने को तैयार है। इसके बावजूद अगर दिव्यांगों को आपत्ति है तो विभाग ने उनके लिए आरक्षित पदों को छोड़कर शेष पदों पर बहाली प्रक्रिया पूरी करने की मांग पटना हाईकोर्ट से की है। ऐसे में उम्मीद है कि अगली सुनवाई में सरकार के तर्कों से विकलांग संघ सहमत नहीं होगा तो न्यायालय उनके पदों को छोड़कर बहाली प्रक्रिया पूरी करने की अनुमति दे सकता है।

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