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फजीहत के बाद बिना वारंट गिरफ्तारी और तलाशी पर सफाई लेकर सामने आये आलाधिकारी

बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस अधिनियम में है बिना वारंट तलाशी और गिरफ्तारी की शक्ति

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पटना (voic4bihar desk)। सड़क से लेकर सदन तक राज्य सरकार की फजीहत कराने के बाद बृहस्पतिवार को राज्य सरकार के आलाधिकारी बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस अधिनियम , 2021 को लेकर सफाई देने मीडिया के सामने आये। अधिकारियों ने इस मौके पर स्पष्ट किया कि इस विशेष बल को बिना वारंट तलाशी और गिरफ्तारी का अधिकार केवल उन खास जगहों की सुरक्षा के संदर्भ में होगा जहां उनकी तैनाती की जायेगी। साथ ही इन अधिकारियों ने बताया कि उन खास जगहों पर गिरफ्तार व्यक्ति को निकटवर्ती थाने में सौंप दिया जायेगा जहां उनके खिलाफ विधि सम्मत कार्रवाई की जा सकेगी।

पुलिस मुख्यालय में मीडिया के सामने आये अपर गृह सचिव चैतन्य प्रसाद, डीजीपी एसके सिंघल और बीएमपी के डीजी आरएस भट्‌टी ने कहा कि इस अधिनियम की धारा -8 ( 2 ) में यह उपबंधित है कि तलाशी के दौरान दंड प्रक्रिया संहिता , 1973 ( 1974 का 2 ) के प्रावधान लागू होंगे , जिससे नागरिकों को प्राप्त सभी अधिकार अक्षुण्ण रहेंगे । जैसे कि सीआरपीसी  की धारा 51 (2 ) के आलोक में जब कभी किसी स्त्री की तलाशी आवश्यक हो तो ऐसी तलाशी शिष्टता का पूरा ध्यान रखते हुए अन्य स्त्री द्वारा ही की जायेगी।

इस शक्ति के दुरुपयोग को रोकने के लिए विभागीय दंड के अतिरिक्त इस अधिनियम की धारा 11 एवं 12 में कड़े दंड के प्रावधान किये गये हैं । आंतरिक अपराध एवं दंड, ( धारा -11 एवं 12 ) केन्द्र एवं राज्यों के सशस्त्र पुलिस बलों का गठन अर्द्धसैनिक बलों के मापदण्ड के आधार पर किया गया है । इन सशस्त्र पुलिस बलों को उग्रवाद एवं विधि – व्यवस्था से संबंधित कठिन क्षेत्रों एवं परिस्थितियों से निपटने के लिए प्रशिक्षित किया जाता है और अधिक मार करने वाले शस्त्रों का ज्ञान दिया जाता है।

इस आलोक में सशस्त्र पुलिस बलों का अनुशासन स्तर जिला पुलिस की अपेक्षा उच्च स्तर का रखा जाता है । इसी कारण बंगाल मिलिट्री पुलिस अधिनियम , 1892 की धारा 5 एवं 6 के अनुरूप इस अधिनियम की धारा 11 एवं 12 में दंड के कड़े प्रावधान किये गये हैं । दंड संबंधी प्रावधान सशस्त्र बलों में विद्रोह, देशद्रोह, घोर अनुशासनहीनता, कर्तव्यहीनता आदि से संबंधित हैं और यह दंड सशस्त्र बलों में अनुशासन बनाये रखने के लिए आवश्यक हैं।

पश्चिम बंगाल, उड़ीसा एवं उत्तर प्रदेश राज्यों के सशस्त्र पुलिस अधिनियम के अतिरिक्त केन्द्रीय सशस्त्र पुलिस बलों यथा – केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल, सशस्त्र सीमा बल, सीमा सुरक्षा बल आदि में भी दंड के प्रावधान इसी अनुरूप हैं। इस अधिनियम के तहत कोई विशेष सशस्त्र पुलिस अधिकारी अगर अपराध करता है तो उसका संज्ञान न्यायालय, सरकार द्वारा अधिकृत पदाधिकारी की लिखित रिर्पोट एवं मंजूरी पर लेगा , क्योंकि यह अपराध बलों के आंतरिक घोर अनुशासनहीनता एवं कर्तव्यहीनता से संबंधित हैं लेकिन इस अधिनियम के अतिरिक्त अगर कोई विशेष सशस्त्र पुलिस अधिकारी किसी अन्य अधिनियम जैसे आईपीसी आदि के अंतर्गत अपराध करता है तो उसे किये गये अपराध के लिए इस अधिनियम से कोई संरक्षण प्राप्त नहीं होगा और उसके विरूद्ध विधि – सम्मत कानूनी कार्रवाई की जायेगी ।

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अधिकारियों ने बताया कि बिना वारंट गिरफ्तारी एवं तलाशी की शक्ति सभी राज्यों के जिला पुलिस को अपने पूरे क्षेत्राधिकार में पूर्व से ही दंड प्रक्रिया संहिता , 1973 ( सीआरपीसी ) की धारा 41 165 आदि में प्रदत्त है , जबकि इस अधिनियम में प्रदत्त शक्ति का प्रयोग केवल वही विशेष सशस्त्र पुलिस अधिकारी कर सकेगा जिसे सरकार द्वारा अधिसूचित प्रतिष्ठानों की सुरक्षा हेतु प्राधिकृत किया गया हो । इन प्रावधानों का उद्देश्य अधिसूचित प्रतिष्ठानों में संज्ञेय अपराध को रोकना एवं जान – माल की सुरक्षा सुनिश्चित करना है ।

उन्होंने बताया कि राज्य के विकास एवं व्यापक हित में कार्यरत बिहार सैन्य पुलिस को समर्पित , कुशल प्रशिक्षित, पूर्णतः सुसज्जित और बहुज्ञानक्षेत्रीय ( मल्टीडोमेन ) सशस्त्र पुलिस बल के रूप में विकसित करने हेतु बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस बल का गठन किया गया है। उन्होंने बताया कि राज्य के महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों, बोधगया स्थित विश्व धरोहर महाबोधि मंदिर और दरभंगा हवाई अड्डा आदि की सुरक्षा बिहार सैन्य पुलिस को सौंपी गई है ।

बिहार तीव्रता से विकसित होता राज्य है , जिसमें वर्ष 2017 में औद्योगिक संस्थानों की सुरक्षा हेतु केन्द्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल के तर्ज पर दो सैन्य पुलिस वाहिनियों का सृजन किया गया । अतः केन्द्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल के तर्ज पर सरकार द्वारा अधिसूचित प्रतिष्ठानों की सुरक्षा हेतु सैन्य पुलिस को गिरफ्तारी एवं तलाशी की शक्ति दिया जाना आवश्यक है। इन बलों की तैनाती से राज्य में पूंजी निवेश , औद्योगिक विकास , ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक धरोहर के स्थलों एवं पर्यटन स्थलों के संरक्षण एवं सुरक्षा को बल मिलेगा । राज्य की आंतरिक सुरक्षा को और सुदृढ़ किये जाने के परिप्रेक्ष्य में एक सशक्त सशस्त्र बल की आवश्यकता है ।

पिछले एक दशक से राज्य की केन्द्रीय पुलिस बलों पर निर्भरता में वृद्धि हुई है । वर्ष 2010 में केन्द्रीय पुलिस बलो की 23 कम्पनियां बिहार में कार्यरत थीं, जो वर्ष 2020 में बढ़कर 45 हो गयी हैं । राज्य की सशस्त्र पुलिस के संगठित विकास से इस निर्भरता को कम किया जा सकेगा , जिससे कि राज्य के आर्थिक बोझ में कमी आयेगी तथा स्थानीय नागरिकों को नियोजन के अधिक अवसर प्राप्त होंगे । बिहार एवं अन्य राज्यों की पुलिस व्यवस्था पूर्व से ही दो भाग में विभक्त हैं क्रमशः जिला पुलिस एवं सैन्य पुलिस ।

बिहार पुलिस अधिनियम , 2007 पारित होने से पूर्व , जिला पुलिस में तैनात पुलिस अधिकारी , पुलिस अधिनियम , 1861 द्वारा शासित थे और सैन्य पुलिस के कर्मी , बिहार राज्य में यथा लागू बंगाल मिलिट्री पुलिस अधिनियम , 1892 द्वारा शासित होते थे । बिहार पुलिस अधिनियम, 2007 मुख्यतः जिला पुलिस के संचालन हेतु कार्यरत है और यह महसूस किया गया है कि सैन्य पुलिस के सुचारु संचालन एवं संगठित विकास के लिए पृथक अधिनियम की आवश्यकता है ।

पश्चिम बंगाल एवं उड़ीसा राज्य , सशस्त्र पलिस पूर्व में बंगाल मिलिट्री पुलिस अधिनियम , 1892 के अधीन शासित थी , आज भी अपनी सशस्त्र पुलिस को अलग अधिनियम के तहत शासित कर रहे हैं । इसी प्रकार उत्तर प्रदेश , राजस्थान , मध्य प्रदेश , महाराष्ट्र आदि राज्यों में भी सशस्त्र पुलिस बल के लिए अलग अधिनियम कार्यरत है । बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस अधिनियम , 2021 के मुख्य उपबंध 1. भूमिकाः { धारा -3 ( 1 ) } इस अधिनियम के अनुसार विशेष सशस्त्र पुलिस ‘ लोक – व्यवस्था का संधारण , उग्रवाद से मुकाबला , विनिर्दिष्ट प्रतिष्ठानों की बेहतर संरक्षा एवं सुरक्षा , इस तरह सुनिश्चित करेगी , जैसा कि अधिसूचित हो , साथ ही ऐसे अन्य कर्तव्यों का निर्वहन करेगी , जो सरकार द्वारा अधिसूचित किए जाए ।

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