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निगरानी और आर्थिक अपराध इकाई की कार्रवाई से अफसरों में हड़कंप

निगरानी की गिरफ्त में आया नौ करोड़ का इंजीनियर, बालू के खेल में लाल हुए एसडीओ के घर छापा, रिश्वतखोर सीडीपीओ धरायी

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पटना (voice4bihar desk)। निगरानी और आर्थिक अपराध इकाई की ताबड़तोड़ कार्रवाई से पिछले 24 घंटे से राजधानी पटना और आरा के अफसर महकमे में हड़कंप मचा हुआ है। निगरानी ने जहां इस दौरान पटना में इंजीनियर की नौ करोड़ की अवैध रूप से अर्जित संपत्ति पर से पर्दा हटाया वहीं सीडीपीओ और आंगनबाड़ी सेविका को 20 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ गिरफ्तार किया है। इधर, आर्थिक अपराध इकाई ने बालू बेचकर लाल हुए एसडीओ के तीन ठिकानों पर छापेमारी कर उसकी अवैध संपत्ति का पता लगाया है। बताया जाता है कि डेहरी के इस निलंबित एसडीओ के ठिकानों की तलाशी का काम शुक्रवार की सुबह शुरू हुआ था जो देर रात तक जारी है।

हम विस्तार से सबसे पहले बात नौ करोड़ के इंजीनियर की करते हैं। राजधानी पटना समेत पूरे राज्य में इन दिनों बड़े-बड़े फ्लाई ओवर, ब्रिज और चमचमाती सड़कें बनायी जा रहीं हैं। इनके निर्माण में जुटी एजेंसी बिहार राज्य पुल निर्माण निगम और पथ निर्माण विभाग के इंजीनियर कितने मालामान हो रहे हैं इसे आप कार्यपालक अभियंता रविंद्र कुमार के उदाहरण से समझ सकते हैं।

वर्तमान में पटना में बिहार राज्य पुल निर्माण निगम लिमिटेड में पदस्थापित रविन्द्र कुमार इसके पहले बतौर कार्यपालक अभियंता वैशाली पथ प्रमंडल में तैनात थे। निगरानी ने इनके खिलाफ 11 अगस्त को आय के ज्ञात वैध स्रोत से 1,47,86,835 रुपये अधिक कमाई के संदर्भ में कांड संख्या 030 / 2021 दर्ज किया था। अनुसंधान के क्रम में शुक्रवार को निगरानी की एक टीम रविंद्र कुमार के पटना के मोहनपुर, पुनाईचक में अवस्थित रजिया निवास पर तलाशी लेने पहुंची। शास्त्रीनगर थाना क्षेत्र में स्थित आवास पर सुबह से लेकर देर रात तक की तलाशी में निगरानी टीम इंजीनियर की करीब नौ करोड़ की अवैध संपत्ति का पता लगा चुकी है। नोट के इतने बंडल मिले के उसे गिनने के लिए निगरानी को मशीन मंगानी पड़ी।

देर शाम तक निगरानी ने बताया कि इंजीनियर के रजिया निवास से नकद लगभग 1.43 करोड़ रुपये, 20 लाख रुपये के फिक्स डिपोजिट के कागजात, 67 लाख के सोने एवं चांदी के आभूषण, विभिन्न बैंकों के 15 खातों में करीब 53 लाख रुपये के अलावा लाखों रुपये निवेश के कागजात बरामद हुए हैं। अब तक तलाशी में कुल 2.83 करोड़ रुपये से अधिक की चल सम्पत्ति एवं इससे संबंधित कागजात बरामद हुए हैं। जांच के क्रम में इंजीनियर तथा उनकी पत्नी के नाम से आठ जमीन के दस्तावेज मिले हैं जिसकी कीमत उन्होंने 1,23,03,948 रुपये बतायी है। निगरानी का कहना है कि अभी भी तलाशी का काम जारी है। इंजीनियर द्वारा विभाग को दिये गये वार्षिक सम्पत्ति विवरणी में इनमें से कई निवेशों का उल्लेख नहीं है। माना जा रहा है कि आगे के अनुसंधान में और अधिक सम्पत्ति के बारे में पता चल सकता है।

बालू माफिया से जुड़े अफसरों की कुंडली खंगालने में जुटी आर्थिक अपराध इकाई, डेहरी के निलंबित एसडीओ के तीन ठिकानों पर छापा

सरकार की ओर से बालू उत्खनन पर रोक लगाये जाने के बाद भी पूरे राज्य में बालू माफिया का धंधा बदस्तूर जारी रहा। इससे सरकार को राजस्व का घाटा हुआ पर बालू माफिया की तिजोरी भरती रही। और यह सब सालों चलता रहा स्थानीय अधिकारियों की मिलीभगत से। अब जब सरकार की नींद खुली है तो उसने दो आईपीएस समेत दर्जनों एसडीओ, डीएसपी, अंचलाधिकारी, और डीटीओ को निलंबित कर उनकी अवैध रूप से अर्जित संपत्ति की जांच शुरू कर दी है। ईडी ने इसी सिलसिले में शुक्रवार को डेहरी के तत्कालीन एसडीओ सुनील सिंह के पटना, पालीगंज और गाजीपुर में उनके ठिकानों पर छापेमारी की।

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ईडी के अनुसार, डेहरी के तत्कालीन एसडीओ सुनील सिंह की बालू माफिया से अच्छी साठगांठ थी। उन्होंने पटना व अन्य स्थानों पर करोड़ों रूपये मूल्य की जमीन व फ्लैट  खरीदे हैं । उनके खिलाफ अप्रत्यानुपातिक धनार्जन ( disproportionate assets case ) संबंधी आर्थिक आर्थिक अपराध थाने में 11 अगस्त को कांड संख्या 12 / 21 दर्ज किया गया है । न्यायालय से सर्च वारंट प्राप्त कर सुनील सिंह के ठिकानों पर आर्थिक अपराध इकाई ने डीएसपी स्तर के पदाधिकारी के नेतृत्व में दबिश दी है।

शुक्रवार को तत्कालीन एसडीओ सुनील सिंह के गृह जिला गाजीपुर सहित बिहार के पालीगंज एवं पटना स्थित ठिकानों पर तलाशी ली जा रही है । ईडी का कहना है कि तलाशी में प्राप्त साक्ष्यों का संकलन कर विधिवत अनुसंधान किया जाएगा । तलाशी के क्रम में कई महत्वपूर्ण दस्तावेजों / सूचनाओं के मिलने की संभावना है । विस्तृत सूचना बाद में दी जाएगी । छापामारी अभी जारी है ।

आंगनबाड़ी केंद्र की क्रय पंजी पर हस्ताक्षर करने के बदले सीडीपीओ मांग रही थी 20 हजार रुपये, सेविका के साथ चढ़ी निगरानी के हत्थे

निगरानी की टीम ने भोजपुर के तरारी की सीडीपीओ मंजू कुमारी और आंगनबाड़ी सेविका रीता देवी को 20 हजार रुपये रिश्वत लेते रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया है। आंगनबाड़ी सेविका रीता देवी तरारी की पिकरहट्टा पंचायत की सेविका थी। निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की मुख्यालय टीम ने 12 अगस्त को दोनों को निगरानी थाना कांड संख्या 031 / 2021 में गिरफ्तार किया है।

इनके खिलाफ ईमादपुर के विकाश पांडेय ने निगरानी अन्वेषण ब्यूरो में 05 अगस्त को शिकायत दर्ज करायी थी। विकाश पांडेय का आरोप है कि सीडीपीओ मंजू कुमारी उसकी मां आंगनबाड़ी केन्द्र, ईमादपुर की सेविका नीलम देवी से उनके केन्द्र की आठ माह की क्रय पंजी पर हस्ताक्षर करने के लिए 2,500 रुपये प्रति माह की दर से 20,000 रुपये बतौर रिश्वत मांग रही है। ब्यूरो ने सत्यापन के क्रम में रिश्वत मांगे जाने के आरोप को प्रथम दृष्टया सत्य पाया।

इसके बाद अनुसंधानकर्ता पुलिस उपाधीक्षक कुमारी किरण पासवान के नेतृत्व में धावादल का गठन किया गया। धावा दल ने अभियुक्त मंजू कुमारी एवं अप्राथमिकी अभियुक्त रीता देवी को 20,000 रुपये रिश्वत लेते बाल विकास परियोजना पदाधिकारी कार्यालय, तरारी से रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। अभियुक्त को पूछताछ के बाद पटना की निगरानी अदालत में पेश किया गया जहां से न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।

निगरानी ने आम लोगों को सचेत किया है कि रिश्वत मांगने से संबंधित कोई भी शिकायत कार्यालय अवधि में वे ब्यूरो के दूरभाष संख्या 0612-2215344 एवं मोबाइल नंबर 7765953261 पर कर सकते हैं।

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