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पटना साहिब और बाललीला गुरुद्वारा को उड़ा देने की धमकी

शरारती तत्व ने मांगी पचास करोड़ की रंगदारी

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पटना (voice4bihar desk)। तख्त श्री हरिमंदिर साहिब से 50 करोड़ रुपये की रंगदारी मांगी गयी है। रंगदारी नहीं देने पर सिरफिरे ने गुरु गोविंद सिंह की जन्मस्थली पटना साहिब गुरुद्वारा और बाललीला गुरुद्वारा को उड़ा देने की धमकी दी है। रंगदारी मांगने के लिए सिरफिरे ने तख्त श्री हरिमंदिर साहिब को पत्र भेजा है। पत्र भेजने वाले ने खुद का नाम रंजन कुमार बताया है। उसके अनुसार वह कंकड़बाग के महात्मा गांधी नगर का रहने वाला है। पत्र में इसकी जानकारी पुलिस को देने पर जान से मार डालने की बात कही गयी है।

महासचिव ने पुलिस महानिदेशक से की शिकायत

हालांकि गुरु गोविंद सिंह के अनुयायी डरने वाले कहां होते हैं। तख्त श्री हरिमंदिर साहिब के महासचिव महेंद्र पाल सिंह  ढिल्लन ने पत्र मिलते ही पूरे मामले की शिकायत पुलिस महानिदेशक से कर दी है। उन्होंने बताया कि पत्र भेजने वाले ने एक ही लिफाफे के अंदर दो पत्र भेजे हैं। एक पत्र के जरिये 50 करोड़ रुपये बतौर रंगदारी मांगी गयी है वहीं दूसरे पत्र में पटना सिटी के मारवाड़ी उच्च विद्यालय के प्राचार्य पर स्कूल को 70-72 साल पहले दान में मिली पुस्तकों को सुरक्षित रखने की जगह उसे जला देने और बेच देने के आरोप लगाये गये हैं। रंगदारी की रकम चुकाने के लिए एक माह का समय दिया गया है।

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पत्र भेजने वाले ने पत्र में अपना मोबाइल नंबर भी दिया है। महासचिव के अनुसार यह किसी शरारती  तत्व का काम है। उन्होंने पत्र की प्रतिलिपि जिलाधिकारी, वरीय पुलिस अधीक्षक और  चौक  थानाध्यक्ष को भेजी है। उन्होंने अधिकारियों से इस संबंध में कानूनी कार्रवाई करने का अनुरोध किया है। पुलिस पत्र का सत्यापन कर रही है।

सिखों के दसवें गुरु गोविंद सिंह का है जन्मस्थान 

बता दें कि यहां सिखों के दसवें गुरु गोविंद सिंह का जन्मस्थान है। गुरु गोविंद सिंह का जन्म 26 दिसम्बर, 1666 शनिवार को 1.20 बजे माता गुजरी के गर्भ से यहां हुआ था। उनका बचपन का नाम गोबिंद राय था। यहां महाराजा रंजीत सिंह द्वारा बनवाया गया गुरुद्वारा है जो स्थापत्य कला का सुन्दर नमूना है। यह स्थान गुरु नानक  देव और गुरु तेग बहादुर सिंह की पवित्र यात्राओं से जुड़ा है।

आनंदपुर जाने से पूर्व गुरु गोविंद सिंह के प्रारंभिक वर्ष यहीं व्यतीत हुये। यह गुरुद्वारा सिखों के पाच पवित्र तख्तों में से एक है। भारत और पाकिस्तान में कई ऐतिहासिक गुरुद्वारों की तरह, इस गुरुद्वारा को भी महाराजा रणजीत सिंह ने बनाया था। बताया जाता है कि यह जगह श्री सलिसराय जौहरी का घर था। श्री सलिसराय जौहरी श्री गुरू नानक देव जी के भक्त थे।

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