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रद्द खनन पट्‌टा का लौह अयस्क बेच रहे पश्चिम सिंहभूम के खनन पदाधिकारी

विधायक सरयू राय ने झारखंड के मुख्यमंत्री को लिखी चिट्‌ठी, बताया आपराधिक कृत्य

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रांची (voice4bihar desk)। झारखंड के पश्चिम सिंहभूम जिले में लौह अयस्क खनन भण्डार का अवैध रूप से बिक्री करने और इसके उठाव के लिए निजी स्तर पर चालान देने का मामला सामने आया है। पूर्व मंत्री और विधायक सरयू राय ने झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को इस संबंध में पत्र लिखकर मामले की जांच कराने का अनुरोध किया है। श्री राय ने कहा है कि पश्चिमी सिंहभूम के जिला खनन पदाधिकारी और सारण्डा वन प्रमण्डल क्षेत्र के वन पदाधिकारी का यह कृत्य आपराधिक है। सरकार इन दोनों को तुरंत निलंबित कर इनके खिलाफ आईपीसी की सुसंगत धाराओं के तहत कार्रवाई करे।

विधायक सरयू राय

भारतीय लोक प्रशासन के इतिहास का यह अनोखा उदाहरण

जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय ने मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में कहा है कि झारखंड सरकार के खान एवं भूतत्व विभाग तथा वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के जिला स्तरीय पदाधिकारियों के जिस कारनामे का उल्लेख मैं इस पत्र के माध्यम से कर रहा हूं, वह भारतीय लोक प्रशासन के इतिहास में अनोखा उदाहरण प्रस्तुत करनेवाला है।

ऐसा किसी अन्य राज्य की सरकार अथवा केन्द्र सरकार में नहीं हुआ होगा कि बिना किसी सक्षम पदाधिकारी के आदेश के किसी जिला खनन पदाधिकारी ने खनन पट्टा रद्द हो चुके खदान अवस्थित लौह अयस्क भंडार को बेचने का चालान दे दिया हो और वहां के वन पदाधिकारी ने इस लौह अयस्क के परिवहन हेतु अपने स्तर से परमिट जारी कर दिया हो।

श्री राय ने कहा कि झारखंड में इसी सप्ताह ऐसा हुआ है और ऐसा किया है, पश्चिम सिंहभूम के जिला खनन पदाधिकारी और सारण्डा वन प्रमण्डल के वन पदाधिकारी ने। श्री राय के अनुसार, पश्चिम सिंहभूम के जिला खनन पदाधिकारी ने सारण्डा वन क्षेत्र के करमपदा स्थित एक ऐसी लौह अयस्क खदान से जिसका खनन पट्टा आज तक रद्द है, वहां पड़े लौह अयस्क के भंडार को बेचने के लिए अपने स्तर से खनन पट्टाधारी को चालान दे दिया है और जो प्रतिष्ठान बिक्री के लिए वहां से लौह अयस्क उठायेंगे उन्हें भी रेल साईडिंग से विशाखापटनम तक लौह अयस्क ले जाने के लिए अनुमति दे दी है। ये प्रतिष्ठान वहां से लौह अयस्क का उठाव भी करने लगे हैं।

बिना सक्षम पदाधिकारी के निर्देश के कार्य कर रहे जिला खनन पदाधिकारी

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झारखंड के पूर्व मंत्री ने कहा है कि जिला खनन पदाधिकारी यह कार्य खान विभाग के किसी सक्षम पदाधिकारी ने इस आशय के वैध निर्देश के बिना कर रहे हैं। यदि जिला खनन पदाधिकारी पूर्व में खान विभाग के सचिव के आदेश संख्या -1594 दिनांक 18.11.2020 को मार्गदर्शन मानते हैं तो यह आदेश अब निष्प्रभावी है।

पहले भी यह आदेश खनिज समानुदान नियमावली -2016 की धारा -12 (gg) और 12 (hh) के विरूद्ध था, जिसका उल्लेख मैंने आपको पिछले साल एक दिसंबर को लिखी चिट्‌ठी में किया है। खान सचिव के 18 दिसंबर, 2020 को जारी पत्र की कंडिका- v में अंकित है कि- “ (v) The above decision is taken with the approval of competent authority as per MMDR Act, 2015 and other Acts and Rules”. परन्तु जहां तक मेरी जानकारी है विभाग के किसी भी सक्षम पदाधिकारी ने इसके लिए प्रासंगिक अधिनियमों एवं नियमों के अंतर्गत कोई आदेश आज तक जारी नहीं किया है।

इस तरह जिला खनन पदाधिकारी, पश्चिम सिंहभूम द्वारा रद्द खनन पट्टा वाली लौह अयस्क खदान से लौह अयस्क उठाव के लिए चालान दिया जाना निहायत अवैध है और उनकी अनुशासहीनता और आपराधिक मनोवृति का द्योतक है। इसके लिए उनके विरूद्ध निलम्बनोपरांत सुसंगत कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई करने का आदेश आपके स्तर से दिया उचित होगा।

श्री राय ने लिखा है कि ऐसा ही आचरण सारण्डा वन प्रमण्डल के वन पदाधिकारी ने प्रस्तुत किया है। उन्होंने जिला खनन पदाधिकारी द्वारा जारी किए गये चालान को आधार बनाकर उक्त खदान से बिक्री के लिए ले जानेवाले लौह अयस्क के लिए परिवहन परमिट दे दिया है जबकि नियम है कि खनन पट्टा रद्द हो चुके खदान से अथवा उस खदान से जिसे वन मंजूरी (Forest Clearance) नहीं है अथवा उस खदान से जिस पर सरकार का बकाया है, लौह अयस्क के उठाव के लिए परिवहन परमिट वन विभाग द्वारा नहीं दिया जा सकता है।

इसके बावजूद सारण्डा वन प्रमंडल के वन पदाधिकारी ने यह गैर-कानूनी कृत्य किया है और अपने स्तर से परिवहन परमिट निर्गत कर दिया है। इसके लिए न तो उन्हें विभाग के किसी सक्षम पदाधिकारी का आदेश प्राप्त है अथवा न ही उन्होंने इस बारे में किसी विभागीय सक्षम पदाधिकारी से मार्गदर्शन ही मांगा है। उनका भी यह कृत्य न केवल अवैध है बल्कि आपराधिक भी है। इसके लिए उन्हें निलंबित कर उनके विरुद्ध भारतीय दंड संहित की सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज किया जाना चाहिए।

श्री राय का कहना है कि खदान से लौह अयस्क की बिक्री करने के लिए माईनिंग चालान देने और परिवहन देने में पश्चिमी सिंहभूम के जिला खनन पदाधिकारी और सारण्डा वन प्रमंडल के वन पदाधिकारी ने मिलकर संयुक्त साजिश रची है। इनका यह आपराधिक एवं दुःसाहसिक आचरण देश के लोक प्रशासन के इतिहास में काले अक्षरों में दर्ज हो गया है।

यदि खान एवं भूतत्व विभाग और वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के किसी भी सक्षम पदाधिकारी ने इस बारे में पश्चिम सिंहभूम के जिला पदाधिकारी एवं सारण्डा वन प्रमंडल के वन पदाधिकारी को इस बारे में कोई वैध आदेश दिया है तो मुझे बतायें। साथ ही श्री राय ने लिखा है कि यदि आपके स्तर से इसका संज्ञान लेने की कृपा नहीं की जाती है तो मुझे इस मामले में वैकल्पिक मार्ग अपनाने के लिए विवश होना पड़ेगा।

 

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