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ऑक्सीजन की किल्लत से चौतरफा दबाव में सरकारी अस्पताल के डॉक्टर

डीएमसीएच के औषधि विभागाध्यक्ष डॉ. यूसी झा ने की खुद को पदभुक्त करने की मांग

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दरभंगा (voice4bihar desk)। ऑक्सीजन की किल्लत को लेकर सरकारी अस्पतालों के डॉक्टर चौतरफा दबाव में हैं। सरकारी अस्पतालों में ऑक्सीजन उपलब्ध कराना वहां के हेल्थ मैनेजर, अधीक्षक, प्राचार्य और आपूर्तिकर्ताओं के जिम्मे है पर निशाने पर मरीज का इलाज करने वाले डॉक्टर हैं। सामने पड़ा मरीज जब ऑक्सीजन सपोर्ट के बिना छटपटा रहा होता है तो पीड़ा डॉक्टर को भी होती है पर वे बेबस होते हैं क्योंकि अस्पताल प्रबंधन ऑक्सीजन उपलब्ध कराने में नाकाम रहता है। पर मरीज के परिजन से लेकर शासन-प्रशासन तक को जवाब डॉक्टर को दी देना पड़ता है।

इसी स्थिति में फंसे डीएमसीएच के औषधि विभागाध्यक्ष ने खुद को पदभुक्त करने की मांग प्राचार्य से की है। इसके पहले एनएमसीएच के अधीक्षक और गोपालगंज के सिविल सर्जन ऐसी ही मांग सरकार से कर चुके हैं। डीएमसीएच के औषधि विभागाध्यक्ष को दो दिन पहले दरभंगा के जिलाधिकारी ने अस्तपाल में ऑक्सीजन की अनुपलबता को लेकर कारण बताओ नोटिस जारी किया था। इसका जवाब देने के अगले दिन अस्पताल के औषधि विभाग में दोबारा हुई ऑक्सीजन की किल्लत को लेकर अस्पताल प्रबंधन से सहयोग नहीं मिलने के कारण विभागाध्यक्ष डॉ. यूसी झा ने खुद को पदभुक्त करने की मांग कर दी है।

डीएमसीएच के औषधि विभागाध्यक्ष डॉ. झा ने अपने प्राचार्य को लिखे पत्र में कहा है कि औषधि विभाग में कोरोना को लेकर आपातकाल जैसी स्थिति है। सैकड़ों मरीज वार्ड में या तो कोरोना से या अन्य बीमारी से पीडि़त होकर भर्ती हैं। अपने सीमित अधिकार एवं सीमित संसाधन के तहत औषधि विभाग के सभी चिकित्सकों, पीजी छात्रों एवं अन्य कर्मचारियों को उनकी कार्यक्षमता के अनुरूप काम पर लगाया गया है फिर भी जिला पदाधिकारी एवं अन्य स्रोतों से मेरी कार्यक्षमता को लेकर असंतोष जाहिर किया जाता है। ऐसी परिस्थति में विभागाध्यक्ष का काम एवं पूरे कोविड – वार्ड की देखरेख सीमित संसाधनों में नहीं की जा सकती है ।

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डॉ. झा ने पत्र में लिखा है कि इस महामारी एवं आपातकाल में ऑक्सीजन की सप्लाई और मेनपावर उपलब्ध कराना अस्पताल अधीक्षक एवं प्राचार्य का काम है, परन्तु ऑक्सीजन की आपूर्ति नहीं होने पर विभागाध्यक्ष को ही दोषी ठहराया जाता है। ऑक्सीजन की सप्लाई का आदेश अधीक्षक देते हैं एवं संवेदक उसका पूर्ति करता है। बढ़ते मरीजों की संख्या को देखते हुए उस अनुपात में ऑक्सीजन की आपूर्ति नहीं होने के लिए अधीक्षक या संवेदक ही बता सकते हैं जिन पर मेरा कोई नियंत्रण नहीं है।

उन्होंने लिखा है कि 06.05.2021 की रात्रि में औषधि विभाग में ऑक्सीजन की भारी कमी हो गई। जब मुझे लगा कि ऑक्सीजन के अभाव में औषधि विभाग में बहुत सारे मरीज दम तोड सकते हैं तो मैंने अधीक्षक एवं प्राचार्य को त्राहिमाम संदेश भेजा फिर भी ऑक्सीजन की आपूर्ति नहीं हुई। फिर मैने उप विकास आयुक्त को दूरभाष पर इसकी सूचना दी और उनसे अनुरोध किया कि कोविड वार्ड में ऑक्सीजन सिलिंडर है उसे तत्काल औषधि विभाग में भेज कर इस समस्या का समाधान निकाला जाय। उप विकास आयुक्त ने अपने आदेश से ऑक्सीजन की आपूर्ति करवायी, जिससे मरीजों की जान बचायी जा सकी।

ऑक्सीजन के लिए मैं बार-बार अधीक्षक, जिलाधिकारी और कोविड सेल को संदेश देता रहा हूं परन्तु समस्या का कोई भी सार्थक निदान अब तक नहीं हुआ है। अतः आप से अनुरोध है कि राज्य स्वास्थ्य विभाग द्वारा दिये गये अधिकार को उपयोग करते हुए मुझे विभागाध्यक्ष के पद से हटाया जाय तथा विभाग का कार्य सुचारू रूप से चलाने के लिए किसी अन्य सक्षम पदाधिकारी को इस पद पर नियुक्त किया जाय।

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