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जटिल होती जा रही शिक्षक बहाली, अभ्यर्थियों का धैर्य दे रहा जवाब

शुक्रवार तक काउंसिलिंग शिड्यूल जारी नहीं होने पर दो अभ्यर्थियों ने दी आत्महत्या की धमकी

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पटना (voice4bihar desk)। बिहार में चल रही 94 हजार प्राथमिक शिक्षकों की बहाली प्रक्रिया एक ओर जटिल होती जा रही है वहीं अभ्यर्थियों का धैर्य भी अब जवाब देने लगा है। मुख्यमंत्री से बहाली की हरी झंडी मिलने के एक हफ्ते बाद भी काउंसिलिंग का शिड्यूल नहीं जारी होने से अभ्यर्थियों में आक्रोश पनप रहा है। इस बीच, इस बहाली से जुड़े दो अभ्यर्थियों ने सोशल मीडिया पर शुक्रवार तक काउंसिलिंग का शिड्यूल नहीं जारी होने पर आत्महत्या करने की धमकी दी है।

पलामू (डाल्टेनगंज) के शिवकांत शर्मा ने अपने ट्वीटर हैंडल पर लिखा है कि बिहार प्रारंभिक शिक्षक बहाली में अगर शुक्रवार यानी 6 फरवरी, 2021 तक काउंसलिंग की डेट जारी नहीं हुई तो मैं शनिवार 7 फरवरी को आत्महत्या कर लूंगा। इसकी सारी जवाबदेही बिहार शिक्षा विभाग की होगी। क्योंकि इस तरह की बहाली प्रक्रिया से समाज ने जीना मुश्किल कर दिया है।

एक अन्य टवीटर यूजर नवीन कुमार ने लिखा है कि शुक्रवार तक मैं भी इंतजार करूंगा और शनिवार को आत्महत्या कर लूंगा। जिसकी सारी जवाबदेही बिहार सरकार और शिक्षा विभाग की होगी। पढ़ाई-लिखाई कर कर इस जिंदगी से ऊब चुका हूं। बहाली को देखते-देखते।

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हालांकि मुश्ताक अली और सुभाशीष पाठक जैसे कई ट्वीटर यूजर ने अपने इस साथी को इस बहुमूल्य जीवन को यूं ही नहीं गंवाने की सलाह दी है। उन्होंने कहा है कि जीवन रहेगा तो कई नौकरी मिलेगी। साथ ही कई अभ्यर्थियों ने सरकार को चेतावनी दी है कि जल्द काउंसिलिंग शिड्यूल जारी नहीं हुई तो वे फिर महा आंदोलन छेड़ेंगे। कई अभ्यर्थियों ने बिहार के विपक्षी नेताओं से विधानसभा के आगामी सत्र में उनकी आवाज उठाने की अपील की है।

इधर, शिवकांत शर्मा और नवीन कुमार जैसे हजारों अभ्यर्थी पूछ रहे हैं कि मुख्यमंत्री से बहाली प्रक्रिया पूरी करने की हरी झंडी मिलने के बाद शिड्यूल कहां अटक गयी। गत 27 जनवरी को प्राथमिक शिक्षा निदेशक ने कहा था कि एक-दो दिन में शिड्यूल जारी कर दी जायेगी। प्रधान शिक्षा सचिव ने भी अपने ट्वीटर हैंडल कहा कि मुख्यमंत्री ने शिक्षक बहाली प्रक्रिया को तार्किक अंजाम तक पहुंचाने को निर्देश दिया है । इसके बाद शिक्षक अभ्यर्थियों को उम्मीद जगी कि करीब डेढ़ साल से जारी बहाली प्रक्रिया अब अपने अंजाम तक पहुंचेगी। पर हफ्ते बाद भी प्रक्रिया वहीं अटकी हुई है जहां महीनों पहले थी।

इस बीच शिक्षा विभाग के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, मामले में अब भी अदालती पेंच फंसा हुआ है। असल में दिव्यांग अधिकार अधिनयम के तहत कुछ लोगों ने 2019 में राज्य नि:शक्तता आयुक्त के न्यायालय में अपील दायर कर शिकायत की थी कि इस बहाली में दिव्यांगों के लिए सीट आरक्षित नहीं की गयी है। राज्य में सरकारी नौकरियों में चार फीसद आरक्षण दिव्यांगों के लिए लागू है। बाद में राज्य नि:शक्तता आयुक्त के फैसले के अनुसार दिव्यांगों को चार फीसद आरक्षण का रोस्टर जारी किया गया। साथ ही उनके आवेदन के लिए 15 दिनों का समय भी अलग से दिया गया।

इधर, इसी तरह का मामला हाईस्कूलों में शिक्षक बहाली के संबंध में पटना हाईकोर्ट में लंबित है। हालांकि इस मामले का प्राथमिक शिक्षा से सीधा कोई मतलब नहीं है पर प्राथमिक शिक्षा निदेशक को भी पार्टी बनाया गया है। यही कारण है कि शिक्षा विभाग काउंसिलिंग का शिड्यूल जारी नहीं कर पर रहा है। अब इस मामले में शिक्षा विभाग ने अटार्नी जनरल को विशेष अनुमति याचिका दायर करने को कहा है। जाहिर है कि मामला जब कोर्ट में गया है तो फैसला एक-दो दिनों में नहीं आयेगा। इससे न केवल काउंसिलिंग शिड्यूल जारी होने में देरी होगी बल्कि बहाली में भी देरी होगी।

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