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चार माह की धार्मिक यात्रा के बाद बिहार लौटे जीयर स्वामी, 22 को धनडीहां में होगा यज्ञ

कोइलवर के धनडीहां में दो दिनों के प्रवास के बाद चंदौली रवाना होंगे जीयर स्वामी

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लक्ष्मी नारायण यज्ञ में हिस्सा लेने व संत के दर्शन के लिए कोइलवर पहुंच रहे अनुयायी

आरा (voice4bihar desk)। करीब चार माह की धार्मिक यात्रा के बाद संत श्री जीयर स्वामी जी फिर से बिहार पहुंचे हैं। वे मंगलवार को भोजपुर जिले के कोइलवर के पास धनडीहां जाएंगे, जहां 22 व 23 जून को आयोजित हो रहे श्री लक्ष्मी नारायण यज्ञ में हिस्सा लेंगे। इसके बाद 24 जून को उत्तर प्रदेश के चंदौली जिला में चतुर्मास व्रत के लिए रवाना हो जाएंगे।

विदित हो कि प्रख्यात संत श्री त्रिदंडी स्वामी के शिष्य श्री जीयर स्वामी जी चार माह बाद अपनी कर्मभूमि पर लौटे हैं। पिछले मार्च महीने में हरिद्वार में चल रहे महाकुंभ में शरीक होने के लिए वे 15 मार्च को हावड़ा-हरिद्वार एक्सप्रेस ट्रेन से आरा स्टेशन से अपने शिष्यों के साथ हरिद्वार कुंभ के लिए रवाना हुए थे। उस वक्त मीडिया प्रभारी अखिलेश बाबा ने कहा था कि हरिद्वार कुंभ की समाप्ति के बाद स्वामी जी चार धाम यात्रा पर अपने भक्तों के साथ निकलेंगे। मई के अंत में स्वामी जी का बिहार आगमन होगा।

धनडीहां में जीयर स्वामी के दर्शन के लिए जुट रहे लोग

मीडिया प्रभारी अखिलेश बाबा ने बताया कि काफी संख्या में भक्तगण धनडिंहा में स्वामी जी के दर्शन को लेकर जुट रहे हैं जिसके लिए व्यापक स्तर पर व्यवस्था की गई है। स्वामी जी ने लोगों को संदेश देते हुए कहा कि भगवान के अवतारों की कथा बार-बार सुननी चाहिए। जिससे हृदय का विकार बाहर हो जाता है। उन्होंने कहा कि जिस घर में श्रीमद्भागवत की पूजा होती है उस घर में लक्ष्मी का वास होता है। हर घर में श्रीमद्भागवत की पूजा होनी चाहिए।

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भागवत कथा एक बार सुनना पर्याप्त नहीं : जीयर स्वामी

बार-बार कथा सुनने की बात को उन्होंने समझाते हुए कहा कि जिस प्रकार एक बार भोजन कर लेने से एक बार सांस ले लेने से काम नहीं चल सकता है। उसी प्रकार एक बार कथा सुनने से काम कैसे चल सकता है। भगवान के अवतारों की चर्चा कथा के रूप में हमेशा सुननी चाहिए। इससे मन का विकार बाहर हो जाता है और मन चीत को शांति मिलती है। साथ ही वह प्राणी सांसारिक मोहमाया में मन फंसने से बच जाता है।

उन्होंने कहा कि कथा एक स्टेटस है एक संस्कार है यह ईश्वर की कृपा है। जिसे बार-बार सुनने के बाद जीवन में ईश्वर की कृपा बरसने लगती है। जीवन में शांति की प्राप्ति होती है शालीनता आती है सादगी आती है विनम्रता आती है। जिन शब्दों को सुनने के बाद हमारे मन बुद्धि दिमाग को ईश्वर में स्थापित होने का सौभाग्य प्राप्त होता है। उसे कथा कहते हैं।

जैसे बाल्मीकि जी ईश्वर का नाम जपते जपते गलत मार्गो से हटकर प्रशस्त मार्गों के अधिकारी बन गए। अंगुलीमाल डाकू भी भगवान गौतम बुद्ध के उपदेशों को सुन कर अहिंसा का पुजारी बन गया। कालिदास ने अपनी पत्नी की कृपा से जीवन को धन्य कर लिया। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को श्रीमद्भागवत कथा सुननी चाहिए। ईश्वर के अवतारों की चर्चा बार-बार सुननी चाहिए।उन्होंने कर्म के बारे में समझाते हुए विस्तार पूर्वक बताते हुए कहा कि कर्म करते समय व्यक्ति को सतर्क रहने की आवश्यकता है।

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