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Breaking News : फोर्स लीव पर भेजे गए वीर कुंवर सिंह विवि के कुलपति प्रो. देवी प्रसाद तिवारी

राजभवन की ओर से भेजी गयी जांच टीम के काम में अड़ंगा डालना पड़ा भारी

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मगध विश्वविद्यालय के कुलपति को मिला वीकेएसयू का अतिरिक्त प्रभार

आरा (voice4bihar news)। वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. देवी प्रसाद तिवारी को राजभवन के आदेश पर अनिवार्य अवकाश (Force Leave) पर भेज दिया गया है। इस अवधि में वीकेएसयू के दैनिक व आवश्यक कार्य सुचारू रखने के लिए मगध विवि के मौजूदा कुलपति प्रो राजेन्द्र प्रसाद को वीर कुंवर सिंह विवि का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। राजभवन के आदेशानुसार मगध विवि के कुलपति प्रो. राजेन्द्र प्रसाद को तब तक वीकेएसयू का प्रभार संभालना होगा जब तक प्रो. तिवारी पर लगे आरोपों का अग्रिम आदेश नहीं आते हैं। राजभवन ने यह आदेश प्रो. तिवारी पर लगे अनियमितता को लेकर दिए गए है।

वित्तीय अनियमितता समेत कई आरोपों की चल रही जांच

मालूम हो कि पांच मार्च 2021 को बिहार विधान परिषद में कुलपति की नियुक्ति और उनके ऊपर भ्रष्टाचार के मामले को लेकर ध्यानाकर्षण के जरिए यह मामला सदस्यों की तरफ से लाया गया था। इसमें वीर कुंवर सिंह विवि के कुलपति के ऊपर लखनऊ विवि में रहते हुए वित्तीय अनियमितता, आउटसोर्सिंग में बहाली व वेतन भुगतान के अलावा पुस्तक घोटाले समेत अन्य तरह के आरोप लगे थे। इतना ही नहीं बल्कि वो लखनऊ विश्वविद्यालय में जांच का सामना कर रहे हैं। इसके बावजूद बिहार में उन्हें वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय का कुलपति बनाए जाने को लेकर सदन में सरकार से जवाब की मांग की गई थी।

कुलपति के खिलाफ जांच के लिए राज्यपाल ने बनाई थी कमेटी

वहीं इस मामले में बिहार के राज्यपाल ने कमेटी का गठन किया था और कुलपति के ऊपर लगे आरोपों की जांच राजभवन से कराने की बात कही गई थी। इस आदेश के आलोक में 21 मार्च 2021 को जांच कमेटी जब वीर कुंवर सिंह विवि आरा में जांच करने आई तो जांच कमेटी में डॉ वीरेंद्र नारायण यादव को आयोजक और भोजपुर व बक्सर के विधान परिषद राधाचरण साह को सदस्य बनाया गया था।

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जांच कमेटी ने काम में रुकावट पैदा करने की बात कही

जांच टीम ने केंद्रीय पुस्तकालय का निरीक्षण किया। कई पुस्तको की मूल्य की भी जांच की। विवि के कुलपति प्रो देवी प्रसाद तिवारी, कुलसचिव श्रीकृष्ण व सीसीडीसी डॉ हीरा प्रसाद सिंह से पूछताछ की गई थी। इस मामले में सीसीडीसी ने बताया था कि 12 प्लान में एक करोड़ 25 लाख से खरीदी गई पुस्तकों की सभी जानकारियां कमेटी को सौंप दी गई है। टीम ने जो भी कागजात की मांग की थी वो सभी उपलब्ध करा दिये गये हैं। लेकिन कमेटी को जवाब से संतुष्टि नहीं मिली थी। इतना ही नहीं कमेटी ने जांच में रुकावट पैदा करने की भी बात कही थी।

राजभवन ने लिखा-आपका आचरण अत्यंत आपत्तिजनक

राज्यपाल के विशेष सचिव आरएल चोंग्थू के हस्ताक्षर से जारी पत्र में कहा गया है कि आपके आचरण से स्पष्ट होता है कि आपके ऊपर लगाये गए सभी गंभीर आरोपों की जांच नहीं होने देना चाहते हैं, जो अत्यंत आपत्तिजनक है। आपके इस तरह के अमर्यादित, अनुशासनहीन आचरण, असंतोषजनक स्पष्टीकरण एवं जांच समिति की ओर से समर्पित प्रतिवेदन तथा बिहार राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम, 1976 ( अद्यतन संशोधित) की धारा -10 ( 3 ) एवं 11 में प्रदत्त शक्तियों के आलोक में यह कार्रवाई की जाती है। नैसर्गिक न्याय के सिद्धांत के अनुरूप न्याय के हित में जांच समिति को बिना किसी भय या व्यवधान के निष्पक्ष जांच पूर्ण करने के राज्यपाल ने यह आदेश दिया है।

विधान परिषद में उठा था पुस्तक खरीद में गड़बड़ी का मसला

बता दें कि वर्ष 2012 में यूजीसी मद से पुस्तक की खरीदारी का मामला विधान परिषद में उठा था, जिसके बाद सरकार ने एक जांच टीम गठित की थी। वर्ष 2013 में टीम ने एक बार जांच की थी। उसके बाद 2016 में भी सदन में एक बार फिर पुस्तक घोटाले का मामला उठाया गया था। वहीं जांच के लिए विवि पहुंची टीम ने एमबीए में खरीदी लगभग 30 लाख रुपये की पुस्तक, बीएड में 25 लाख रुपये की पुस्तक व 12 प्लान में खर्च की गई 1 करोड़ 25 लाख रुपये का हिसाब मांगा। इसके साथ ही टीम ने विवि द्वारा खर्च की गई राशि का उपयोगिता प्रमाण पत्र के मामले पर भी सवाल पूछा था।

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