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10 से अधिक पंचायत वाले अंचलों में तैनात होंगे दो अंचलाधिकारी

मंत्री रामसूरत राय बोले- राजस्व कर्मचारी व अमीन का होगा स्टेट कैडर

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राजस्व कर्मी व अमीन का राज्य भर में कहीं भी हो सकता है तबादला

पटना/मुजफ्फरपुर (Voice4bihar news)। कार्य की अधिकता और कर्मचारियों-अफसरों की भारी कमी झेल रहे भूमि सुधार एवं राजस्व विभाग में बड़े बदलाव की तैयारी चल रही है। राज्य के भूमि सुधार एवं राजस्व मंत्री रामसूरत राय ने कहा है कि राज्य के उन सभी अंचलों में दो अंचलाधिकारी तैनात होंगे, जिनमें 10 से अधिक ग्राम पंचायतें होंगी। अर्थात अब एक अंचलाधिकारी के जिम्मे अधिकतम 10 पंचायतों का कार्यभार ही होगा। इसके साथ ही मंत्री ने यह भी ऐलान किया कि राजस्व कर्मचारी व अमीन का स्टेट कैडर होगा। इनका बिहार के किसी भी जिले में स्थानान्तरण किया जा सकता है।

मुजफ्फरपुर स्थित सर्किट हाउस में एक कार्यक्रम के दौरान मंत्री श्री राय ने भूमि सुधार एवं राजस्व विभाग में होने वाले बड़े बदलाव के संकेत दिये। केंद्र सरकार के ‘अभियान रैन बसेरा’ के तहत 25 लाभुकों को भूमि का पर्चा वितरण के दौरान मंत्री ने कहा कि बागमती व लखनदेई नदी के कारण जो लोग विस्थापित हो गए हैं एवं जिन्हें बसने के लिए जमीन नहीं है, साथ ही जिन लोगों ने जमींदार की जमीन में घर बना लिया है, उन्हें जमींदार अगर लिखकर देंगे तो जमीन मालिक को सरकारी दर पर जमीन का मूल्य दिया जाएगा।

अब इटीएस मशीन से मापी जाएगी जमीन

मंत्री रामसूरत राय ने कहा कि राज्य में अब अमीन भी जमीन की मापी इटीएस मशीन से करेंगे। उल्लेखनीय है कि राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने पूरे बिहार में जमीन नापी के लिए 911 इटीएस मशीनों की खरीद करने का फैसला लिया है। इसकी खरीद के लिए सभी जिलाधिकारियों को भू अभिलेख व परिमाप निदेशालय की तरफ से धनराशि दी जा चुकी है। कई जिलों में इटीएस मशीन की खरीद शुरू हो चुकी है। इस मशीन की मदद से अब जमीन मापी में दिक्कत नहीं होगी और माप भी ज्यादा एक्यूरेट हो सकेगा।

क्या है इटीएस मशीन?

बिहार में जमीन की मापी के लिए खरीदी जा रही इलेक्ट्रॉनिक टोटल स्टेशन (इटीएस) एक इलेक्ट्रानिक मशीन है, जो अत्यधिक विश्वसनीय और त्रुटिरहित जमीन मापी में मददगार होता है। इसका प्रयोग होने से अमीनों की उस प्रवृत्ति पर रोक लगेगी, जिसमें मनमाने तरीके से मापी कर दो पक्षों को उलझाने की घटनाएं सामने आती हैं। राज्य में हो रही इटीएस मशीन की खरीद के इस्टीमेट के अनुसार हर एक मशीन की कीमत करीब छह लाख रुपये होगी। हरेक मशीन के लिए छह लाख रुपये यानी कुल 42 करोड़ 66 लाख रुपये दिए गए हैं। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग का दावा है कि जमीन मापी संबंधी कार्य को पारदर्शी और जवाबदेह बनाने की दिशा में यह एक क्रांतिकारी कदम साबित होगा।

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ETS की मदद से जमीन की मापी।

यह भी पढ़ें : जमीन से जुड़े मामलों में करप्ट अफसरों पर एक्शन होगा : रामसूरत

इटीएस मशीन से एक साथ होगी 50 प्लॉटों की मापी

इलेक्ट्रॉनिक टोटल स्टेशन की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसके माध्यम से एक साथ 50 प्लॉटों की मापी हो सकेगी। इटीएस मशीन से निकलने वाली किरणें जमीन की मापी करेंगी। इससे एक सेमी का भी फर्क नहीं आएगा। इससे मापी का काम तेजी से होगा और किसी भी पक्ष को गड़बड़ी की शिकायत नहीं होगी। मापी के लिए अमीन इस मशीन को किनारे पर खड़ा कर देंगे और मापी करने वाले खेत के किनारे पर प्रिज्म रख देंगे। बटन दबाते ही मशीन से किरणें निकलेंगी और प्रिज्म से प्रिज्म की दूरी रिकॉर्ड कर लेगी। जीपीएस का भी उपयोग मापी के लिए होगा।

जमीन विवादों के निबटारे के लिए सही मापन जरूरी

राज्य सरकार ने जमीन विवादों को खत्म करने के लिए कई जरूरी कदम उठाए हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का मानना है कि राज्य में 60 प्रतिशत बड़े अपराध की वजह जमीन का विवाद ही है। इसी दिशा में जमीन संबंधी रिकार्ड व सारे कामकाज को डिजिटल किया गया है। ऑनलाइन माध्यम से सभी कार्यों का निबटारा होने से पारदर्शिता आई है। फिलहाल राज्य में भूमि सर्वेक्षण का काम चल रहा है, जिसमें जमीन संबंधी सभी रिकार्ड अद्यतन किये जा रहे हैं। इटीएस मशीन से इस काम में भी तेजी आएगी।

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