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लीक से हटकर फैसले के कारण फिर चर्चा में बिहार की एक अदालत

किशोर-किशोरी की शादी को अदालत ने दिया वैध करार

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तीन दिनों में किया मासूम के भाग्य का फैसला, आठ माह की बच्ची को दिलाया हक

Voice4bihar desk. कानून की बारीकियों को दरकिनार कर सपाट फैसले सुनाने के लिए पिछले दिनों चर्चा में आई बिहार की एक अदालत ने एक बार फिर लीक से हटकर फैसला सुनाया है। यह अदालत है-बिहारशरीफ की किशोर न्याय परिषद और फैसला आठ माह की मासूम के हक को लेकर दिया है। बीते बुधवार को एक होनहार किशोर को जीवन संवारने का मौका देने वाले किशोर न्याय परिषद के प्रधान दंडाधिकारी मानवेंद्र मिश्र ने एक बार फिर मानव पहलुओं को प्राथमिकता दी है । पहले केस में महज 13 दिनों में ही सुनवाई पूरी करते हुए फैसला सुना दिया वहीं दूसरे केस में सिर्फ 3 दिनों का वक्त लगा। दोनों मामलों में एक और भी समानता है कि दोनों मामले एसीजेएम छह विमलेंदु कुमार के न्यायालय में लंबित थे।

मासूम बच्ची के भविष्य को देखते हुए अदालत ने सुनाया अनोखा फैसला

प्रेम-प्रसंग व संपत्ति से बेदखली के एक मामले में किशोर न्याय परिषद ने सोमवार को महज तीन दिन में एक केस का निपटारा कर दिया। परिषद के प्रधान दंडाधिकारी मानवेंद्र मिश्र ने न केवल जेल में बंद आरोपित किशोर को रिहा कर दिया । बल्कि उसकी आठ माह की मासूम बच्ची को उसके दादा – दादी के घर पहुंचने का मार्ग प्रशस्त कर दिया । यह संभवतया बिहार का पहला केस है, जब महज तीन दिनों में मामले का फैसला सुनाया गया । मासूम बच्ची के हितों व भविष्य को देखते हुए यह अनोखा फैसला सुनाया गया है ।

इस केस को आधार मानकर अन्य केस की नहीं होगी सुनवाई

लीक से हटकर हुए इस फैसले ने कई नए रिकॉर्ड बनाए । एक तो महज 3 दिनों के भीतर सुनवाई पूरी कर दी, वहीं दूसरी ओर किशोर – किशोरी की शादी को वैध करार दिया गया । इतना ही नहीं दो नाबालिगों से जन्मी आठ माह की बच्ची को उसका हक मिला । हालांकि जज ने यह भी कहा है कि इस फैसले को आधार बनाकर किसी अन्य मामले में इसका लाभ नहीं लिया जा सकता है । जज श्री मित्र ने जिला बाल संरक्षण इकाई व हिलसा बाल कल्याण पुलिस पदाधिकारी को बच्ची व किशोर दंपती की उचित देखभाल व संरक्षण के संबंध में हर छह माह पर प्रतिवेदन देने को कहा है ।

क्या है पूरा मामला

दरअसल प्रेम-प्रसंग में एक किशोर व किशोरी घर से फरार हो गए थे। जब वे दोनों फिर से सामने आए तो उनकी आठ माह की एक बच्ची थी। मामला कोर्ट में पहुंचा तो किशोरी ने प्रेम संबंध में स्वेच्छा से किशोर के साथ जाने की बात अदालत के समक्ष स्वीकार की । इसके बाद किशोर ने 20 फरवरी को कोर्ट में सरेंडर कर दिया । इस मामले में सुनवाई करते हुए एडीजे छह सह स्पेशल पॉक्सो न्यायाधीश आशुतोष कुमार ने किशोर को न्यायिक हिरासत में लेकर “प्लेस ऑफ सेफ्टी” में शेखपुरा भेज दिया ।

इसी दौरान मामले में 19 मार्च को आरोपित किशोर की पेशी किशोर न्याय परिषद में हुई । इसमें कोर्ट ने केस का संज्ञान एवं सारांश आरोप गठन किया । अगले ही दिन यानि 20 मार्च को दोनों पक्षों की गवाही हुई, जिसमें दोनों पक्षों के लोग बच्ची के साथ किशोर दंपति स्वीकार करने पर राजी हुए। दोनों पक्षों की आपसी सहमति हो जाने के बाद अदालत ने अपना फैसला सुनाया।

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सिपाही भर्ती परीक्षा में सफल युवक को अदालत ने दिया जिंदगी संवारने का मौका

पिछले बुधवार यानि 17 मार्च को आया इसी अदालत को एक अन्य फैसला भी कम रोचक नहीं था। इस केस में भी एक युवक के भविष्य को लेकर फैसला सुनाया गया और अदालत भी वही थी। किशोर न्याय परिषद के प्रधान दंडाधिकारी मानवेंद्र मिश्र ने एक होनहार नवयुवक को जीवन संवारने का सुनहरा अवसर दिया । नालंदा जिले के अस्थावां थाना क्षेत्र से जुड़े मारपीट के एक मामले में आरोपित किशोर को महज 13 दिन में सुनवाई पूरी कर रिहाई दे दी गयी।

किशोर की मेधा देख जज ने दे दी रिहाई

दरअसल केस की सुनवाई के दौरान यह बात सामने आई कि आरोपित किशोर का केंद्रीय चयन परिषद के जरिये सिपाही के पद पर चयन कर लिया गया है। उसकी मेधा को देखते हुए अदालत ने न सिर्फ मुकदमे से रिहाई दी, बल्कि एसपी को निर्देश दिया कि नाबालिग के दौरान किए गए अपराध का जिक्र उसके चरित्र प्रमाणपत्र में नहीं किया जाए। कोर्ट के सामने सिपाही पद पर चयन होने का प्रमाण पत्र दिया और आग्रह किया कि मेरे मामले को निष्पादित कर दिया जाए, ताकि भविष्य में मेरी नौकरी पर किसी प्रकार का असर ना आए ।

बच्चों के स्वभाव के अनुकूल ही मारपीट में हुआ शामिल : कोर्ट

कोर्ट ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए बच्चे के भविष्य को देखते हुए इस मामले से आरोपित को बरी कर दिया । किशोर न्याय परिषद के प्रधान दंडाधिकारी मानवेंद्र मिश्च के फैसले पर सदस्य उषा कुमारी और धर्मेंद्र कुमार ने भी अपनी सहमति दी । जज श्री मिश्रा ने अपने फैसले में कहा कि बच्चे का स्वभाव होता है कि जब वह माता – पिता व बड़ों को लड़ते देखता है तो वह अपने परिवार के बचाव में सहयोग में स्वतः शामिल हो जाता है । यह बच्चे का यह स्वाभाविक गुण होता है ।

यह मामला भी एसीजेएम छह विमलेंदु कुमार के न्यायालय में लंबित था

यह मामला पहले एसीजेएम छह विमलेंदु कुमार के न्यायालय में लंबित था । वहां से चार मार्च 2021 को किशोर न्याय परिषद के समक्ष विचारण के लिए भेजा गया था । हालांकि इस मामले के सूचक ने किशोर की मेधा व सिपाही भर्ती में चयन पर सवाल उठाये लेकिन कोर्ट ने सूचक के हर दावे को खारिज करते हुए आरोपी किशोर को मामले से रिहा कर दिया । कोर्ट ने सुनवाई के दौरान यह भी पाया कि किशोर के खिलाफ मुकदमा के अलावा अन्य किसी तरह का कोई मुकदमा किसी भी न्यायालय या थाने में लंबित नहीं है ।

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