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न्यायाधीश पर हमले के आरोपी थानेदार ने दिया चौंकाने वाला बयान

कहा- एडीजे के सहकर्मियों व वकीलों ने बेरहमी से पीटा, हत्या का प्रयास

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झंझारपुर सिविल कोर्ट में हुई झड़प ने अख्तियार किया हाईप्रोफाइल स्वरुप

दरभंगा में इलाजरत थानेदार व दारोगा ने स्थानीय पुलिस को दिया फर्द बयान

मधुबनी (voice4bihar news)। मधुबनी जिले के झंझारपुर स्थित व्यवहार न्यायालय में न्यायाधीश पर कथित हमले की कोशिश अब हाईप्रोफाइल ड्रामा के रूप में परिवर्तित होती दिख रही है। बृहस्पतिवार को एडीजे अविनाश कुमार के चैम्बर में पिस्तौल तानने के आरोपी घोघरडीहा थानाध्यक्ष गोपाल कृष्ण व एसआई अभिमन्यु कुमार शर्मा को वकीलों ने पीट कर अस्पताल पहुंचा दिया था। वहीं अब घायल पुलिस अफसरों के कलमबंद बयान ने मामले का उलझा दिया है।

दरअसल, एडीजे अविनाश कुमार पर हमले के आरोपी दोनों पुलिस अफसरों को इलाज के लिए दरभंगा ले जाया गया है। इनके खिलाफ एडीजे की ओर से झंझारपुर थाने में कांड संख्या-255/21 दर्ज कराया गया है। वहीं पर एसआई अभिमन्यु कुमार शर्मा के साथ डीएमसीएच में इलाज करा रहे घोघरडीहा थानाध्यक्ष गोपाल कृष्ण ने दरभंगा के बेता ओपी पुलिस के समक्ष फर्द बयान दर्ज कराते हुए एडीजे को ही कठघरे में खड़ा किया है।

एडीजे अविनाश कुमार ने एफआईआर में लगाये गंभीर आरोप

झंझारपुर थाने में दर्ज प्राथमिकी में एडीजे अविनाश कुमार ने कहा है कि 16 नवंबर को उषा देवी नामक महिला ने थानाध्यक्ष घोघरडीहा के खिलाफ शिकायत की थी, जिसमें कहा गया था कि थानाध्यक्ष ने उनके पति, वृद्ध सास, वृद्ध ससुर एवं ननद को झूठे केस में फंसाया है। साथ ही महिला के पति के साथ थानाध्यक्ष घोघरडीहा ने दुर्व्यवहार किया। बकौल एडीजे, उन्हें यह शिकायत विधिक सेवा समिति झंझारपुर अनुमंडल के अध्यक्ष की हैसियत से मिली थी।

शिकायत के आलोक में एडीजे ने घोघरडीहा थानाध्यक्ष को अपना पक्ष रखने के लिए दूरभाष से सूचना दी। किन्तु थानेदार यहां आने से टाल-मटोल करते रहे। आखिरकार 18 नवंबर को 11 बजे की बजाय 2 बजे थानेदार गोपाल कृष्ण झंझारपुर स्थित एडीजे अविनाश कुमार के चैम्बर में पहुंचे। आरोप है कि उन्होंने आते ही ऊंची आवाज में बाते करने लगे। थानेदार ने बोला कि तुमसे इसी तरह बात करूंगा।

साथ ही कहा कि तुम मेरे बॉस एसपी साहेब को बार-बार नोटिस कर कोर्ट में बुलाता है। आज तुमने मुझे बुलाया है। आज में तुझे तेरी औकात बताता हूं। तथा इसके बाद मुझपर हमला कर दिया। इस दरम्यान इसका साथी सब इंस्पेक्टर अभिमन्यु कुमार शर्मा बाहर मौके का इंतेजार कर रहा था, अचानक वह मेरे चैम्बर में घुस गया तथा दोनों मिलकर मेरे साथ मार-पीट की। घोघरडीहा थानाध्यक्ष गोपाल कृष्ण ने अचानक अपना लोडेड पिस्टल निकलकर तानते हुए हत्या की धमकी दी।

एफआईआर में एडीजे का आरोप है कि पिस्तौल तानते हुए थानेदार ने कहा कि आज आज मैं तुझे इस दुनिया से रूखसत कर दूंगा। क्योंकि मुझे मेरे बॉस एसपी साहेब का आदेश तथा समर्थन है। उन्हीं के कहने पर आज तुझे तेरी औकात बताता हूं। इसी दरम्यान हंगामा होने की वजह से बगल कोर्ट में उपस्थित वकील बंधु व अन्य स्टाफ और अन्य लोग दौड़े तथा किसी ने गोपाल कृष्ण के हाथ से लोडेड पिस्टल छीन ली।

एडीजे अविनाश का कहना है कि मुझे बचाने के क्रम में अन्य व्यक्तियों को भी चोटें आयी। इसी दरम्यान गोपाल कृष्ण मेरे चैम्बर के बाथरूम में घुस गया तथा अन्दर से कुण्डी लगा ली। स्थानीय थाना पुलिस के आने के बाद काफी समझाने बुलाने पर बाथरूम से बाहर आया। इसी दरम्यान मौका पाकर उसका साथी सब इंस्पेक्टर अभिमन्यु कुमार शर्मा दौड़कर भागने लगा। इस क्रम में जिस के बारे में बाद मुझे जानकारी मिली की भागने के क्रम में गिरने से घायल हो गया।

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घोघरडीहा थानाध्यक्ष के बयान ने न्यायाधीश को कठघरे में खड़ा किया

दूसरी ओर, घोघरडीहा थानाध्यक्ष गोपाल कृष्ण ने डीएमसीएच दरभंगा में बेता थाना पुलिस के समक्ष दिए गए फर्द बयान में एडीजे अविनाश कुमार पर गंभीर आरोप लगाये हैं। थानेदार ने कहा है कि 16 नवंबर को न्यायालय के कर्मी अवकाश मिश्र ने फोन पर बताया कि 17 नवंबर को 11 बजे न्यायाधीश एडीजे-1 झंझारपुर के न्यायालय में आपको बुलाया गया है। बताया गया कि आपके विरुद्ध विधिक सेवा प्राधिकार में पक्षपात करने का आरोप है तथा यह आरोप दीपक राज ने लगाया है।

उसी दिन 17 नवम्बर को मद्य निषेध के तहत चुलाई शराब के विरुद्ध संयुक्त छापेमारी का कार्यक्रम मधेपुर, घोघरडीहा तथा सुपौल जिले के मरौना थाना क्षेत्र में निर्धारित था। बकौल थानेदार, उन्होंने व्यस्तता का हवाला देते हुए आगे समय के लिए अनुरोध किया, तो न्यायालय के उक्त कर्मी ने 18 नवंबर को 11 बजे दिन में बुलाया। 18 नवंबर को मैं अपने थाना के एसआई अभिमन्यु कुमार शर्मा के साथ न्यायालय पहुंचा, तो न्यायालय के कर्मी अवकाश मिश्र के कहने पर एसआई अभिमन्यु शर्मा को बाहर छोड़कर माननीय न्यायाधीश के कक्ष में गया।

थानेदार ने बयान में कहा है कि एडीजे अविनाश के चैम्बर में पहले से ही दीपक राज व एक अन्य शख्स बैठा था। दीपक राज की ओर इशारा कर के माननीय न्यायाधीश ने मुझसे पूछा कि तुम कितना पढ़े हो, तो मैंने स्नातक तक पढ़ाई की बात कही। माननीय न्यायाधीश बोले कि दीपक राज इंजीनियर है और बराबर कोर्ट में भी काम करवाता है। तुमसे ज्यादा पढ़ा लिखा है। तुम उसको ‘सर’ क्यों नहीं बोलता है। इसके जवाब में मैं खामोश ही रहा।

इसके बाद माननीय न्यायाधीश ने कहा कि तुम कल क्यों नहीं आया? तुम बहुत मगरूर लगते हो। तुम मुझसे डरते क्यों नहीं हो? मेरे यह कहने पर कि महोदय आप न्यायाधीश हैं और गाली नहीं दिया जाए, माननीय न्यायाधीश बौखला गए और पैर से जूता निकाल कर तथा आगे बढ़कर मेरे शरीर पर जूता से मारने लगे। मैंने अपने आत्मरक्षा के लिए जूता पकड़कर नीचे रख दिया। इसके बाद कक्ष में उपस्थित दीपक राज तथा अवकाश मिश्र ने माननीय न्यायाधीश के निर्देश पर मुझे मुक्का से मारना शुरु किया।

आवाज सुनकर कोर्ट के कर्मी तथा वकील शम्भु कुमार दास, शंकर कुमार दास, उदय शंकर तिवारी, आशुतोष कुमार यादव, मो मुजफ्फर आलम, शितेश प्रशांत, शत्रुहन कुमार यादव, वसंत सिंह, राम कुमार चौधरी, बलराम साहु, अरुण कुमार झा एवं अन्य 15-20 अधिवक्ता एवं कर्मी कक्ष में आकर फैंट मुक्का से मारपीट करने लगे। मुझे पीटता देख सहकर्मी एसआई अभिमन्यु शर्मा कक्ष में आने लगे तो माननीय न्यायाधीश एडीजे-1 अविनाश कुमार, कर्मी अवकाश मिश्र, जेई नगर पंचायत झंझारपुर दीपक राज एवं अन्य लोगों ने एसआई अभिमन्यु शर्मा को पीटना शुरू कर दिया।

थानेदार गोपाल कृष्ण ने आरोप लगाया है कि इस मारपीट के बीच माननीय न्यायाधीश ने मेरे तरफ इशारा करके लोगों को निर्देश दिया कि गला में रस्सी लगाकर जान से मार कर बाथरूम में रख दो। उनके निर्देश पर अवकाश मिश्र, दीपक राज, अधिवक्ता बलराम साहु, अधिवक्ता लक्ष्मेश्वर ने मुझे जान मारने की नीयत से रस्सी मेरे गले में लगाया और खींचने लगे। तभी धक्का देकर किसी तरह इन लोगों से छुड़ाकर जान बचने के लिए न्यायाधीश के कार्यालय के शौचालय में जाकर दरवाजा बंद कर लिया।

आरोप है कि न्यायाधीश अविनाश कुमार ने कहा कि इन दोनों को भीड़ के हवाले कर दो तथा इन्हीं की पिस्टल एवं रिवाल्वर से इन्हें मार दो। इसके बाद इसके बाद में उपस्थित लोगों ने शौचालय का दरवाजा तोड़ने का प्रयास किया। दरवाजा नहीं टूटा, जिससे मेरी जान बची। कुछ देर बाद जब स्थानीय थाना के पदाधिकारी पहुंचे, तो मुझे शौचालय से बाहर निकाला गया।

बकौल थानेदार, शौचालय के बाहर निकलने पर मैंने देखा कि मेरे सहकर्मी खून से लथपथ बेहोशी की हालत में फर्श पर पड़ा हुआ था। जिसके नाक एवं मुंह से खून बह रहा था। स्थानीय थाने की पुलिस ने वहां पहुंचने पर हम लोगों को बुरी तरह से घायल अवस्था में देखा तो न्यायाधीश से अनुरोध किया कि इन्हें अस्पताल ले जाने दिया जाए। परंतु न्यायाधीश ने प्राथमिकी दर्ज कराने के बाद ही हम दोनों को स्थानीय थाना के हवाले किया।

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