Header 300×250 Mobile

पर्यवेक्षिका बहाली में विलंब से बिगड़ रही आंगनबाड़ी की ‘सेहत’

- Sponsored -

427

- sponsored -

- Sponsored -

  • कार्य के दबाव में नौकरी छोड़ रहीं आंगनबाड़ी सुपरवाइजर, नयी बहाली नहीं होने से स्थिति विकट
  • महिला एवं बच्चों के समुचित पोषण के लिए संचालित सरकार की योजनाओं पर प्रतिकूल असर

अभिषेक कुमार सुमन की रिपोर्ट

सासाराम (voice4bihar news)। महिला एवं बाल कल्याण के मकसद से आंगनबाड़ी संचालन की व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए शुरू की गई पर्यवेक्षिका बहाली की संचिका धूल फांक रही है। ऐसे में अभी कार्यरत पर्यवेक्षिकाओं पर कार्य का अधिक दबा होने के कारण काम प्रभावित हो रहा है। इसका सीधा असर महिलाओं व बच्चों के समुचित पोषण के लिए संचालित सरकार की योजनाओं पर पड़ रहा है।

जिले में संचालित 3000 से अधिक आंगनबाड़ी केंद्र के लिए कार्यरत महिला पर्यवेक्षिका की संख्या मानक के अनुरूप नहीं होने के कारण प्रधानमंत्री मातृत्व वंदन योजना योजना, मुख्यमंत्री कन्या उत्थान योजना, परवरिश योजना के अलावा आंगनबाड़ी पर संचालित अन्य जन हितैषी योजनाओं के मामले में रोहतास जिले की रैंकिंग राज्य स्तर पर बेहतर नहीं हो सकी है।

यहां बता दें कि रोहतास जिले में 5 दर्जन से अधिक पदों पर बहाली की जानी है। इसके लिए आईसीडीएस विभाग की ओर से ऑनलाइन आवेदन मांगे गए थे। 10 जून 2010 को जारी संकल्प संख्या 1846 के आलोक में 31 दिसंबर 2018 को जारी पत्रांक 5994 के गाइडलाइन के तहत बहाली प्रक्रिया को पूर्ण किया जाना है, लेकिन जिले में बहाली वाली संचिका पर अधिकारी कुंडली मार बैठे हुए हैं।
रोस्टर में गड़बड़ी के कारण फंसा है पेंच

17 मई 2019 को जारी अधिसूचना के आलोक में 20 मई तक आरक्षण रोस्टर तैयार करने का निर्देश विभाग ने जारी किया था, बावजूद इसके स्थानीय कार्यालय में पदस्थापित कर्मियों एवं अधिकारियों की उदासीनता के कारण मामला ठंडे बस्ते में पड़ा रहा। जून महीने में मामला मीडिया की सुर्खियों में आने के बाद आनन-फानन में 48 घंटे के भीतर रोस्टर तैयार करते हुए जून महीने में हीं रोस्टर को अनुमोदन के लिए प्रमंडलीय आयुक्त के पास भेजा गया। वहां रोस्टर में तकनीकी गड़बड़ी पाये जाने के कारण मामला पेचीदा हो गया। इतने दिनों के बाद भी मामले की तकनीकी त्रुटियों को दूर करने में विभाग नाकाम रहा है। जिसके कारण बहाली प्रक्रिया की संचिका धूल फांक रही है।

काम के अत्यधिक बोझ के कारण नौकरी छोड़ रहीं महिला सुपरवाइजर

विभागीय गाइडलाइन के अनुसार एक महिला पर्यवेक्षिका को 20 से 25 आंगनबाड़ी केंद्रों की मॉनिटरिंग करने का प्रावधान है लेकिन जिले में पर्यवेक्षिकाओं की संख्या कम होने के कारण एक पर्यवेक्षिका के जिम्मे 40-100 की जिम्मेवारी दी गई है। वर्क लोड समझें या समय की नियति अनिता कुमारी कंचन कुमारी नंदिनी कुमारी पूनम सिंह शिल्पी कुमारी प्रीति कुमारी मीना गुप्ता सहित एक दर्जन से अधिक पर्यवेक्षिकाओं ने नौकरी छोड़ दी है जबकि कोचस की नीलम कुमारी और सासाराम की विद्या देवी सहित दो पर्यवेक्षिका की मौत हो चुकी है। ऐसे में पर्यवेक्षिकाओं की घटती संख्या की भरपाई के लिए नयी बहाली नहीं होने से लोक कल्याणकारी योजनाओं का काम बाधित हो रहा है।

50 प्रतिशत सीटों पर आंगनबाड़ी सेविकाओं की होगी बहाली

रोहतास जिले में निर्धारित पदों के 50 फ़ीसदी पदों पर आंगनबाड़ी सेविकाओं को पर्यवेक्षिका बनने का मौका मिलेगा। हालांकि यह तब संभव हो सकेगा जब बहाली प्रक्रिया पूर्ण होगी। कुल 64 पदों में 32 पदों पर सेविकाओं को पर्यवेक्षिका बबने का मौका मिलेगा। आरक्षण रोस्टर में तकनीकी समस्या के कारण मामला पिछले दो साल से बहली में पेंच फंसा है ।

विज्ञापन

विभागीय मंत्री का आदेश भी बेअसर, विस चुनाव के कारण लटका मामला

आंगनबाड़ी पर्यवेक्षिका बहाली के मामले में विभागीय मंत्री कोषांग द्वारा 1 सितंबर 2020 को जारी पत्रांक संख्या 768 के आलोक में आईसीडीएस निदेशालय ने 15 सितंबर 2020 को एक पत्र जारी किया था। पत्रांक संख्या 4507 में बक्सर, किशनगंज, मधेपुरा, सहरसा, पूर्णिया, भागलपुर, दरभंगा, अरवल, सुपौल, कैमूर, जहानाबाद, नवादा तथा अररिया को छोड़कर एक निर्देश जारी किया है, जिसमें अनुबंध आधारित महिला पर्यवेक्षिका के नियोजन के लिए रोस्टर अनुमोदन का निर्देश बिहार विधानसभा चुनाव के पूर्व दिया गया था। मंत्री कोषांग की ओर से जारी आदेश पत्र के बाद अभ्यर्थियों में बहाली के प्रति उम्मीद जगी थी, लेकिन बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर आचार संहिता के कारण अभ्यर्थियों की उम्मीदों पर पानी फिर गया था।

अधर में पड़ी रही बहाली प्रक्रिया और रोजगार देना बना था चुनावी मुद्दा

कोरोना संक्रमण काल के बीच जारी बिहार विधानसभा चुनाव में यूपीए और एनडीए गठबंधन में रोजगार के मुद्दे पर प्रतिस्पर्धा दिखी। बिहार में बेरोजगारों को अधिक से अधिक रोजगार देने का दावा दोनों गठबंधनों के शीर्ष नेताओं ने खुले मंच से किया था, लेकिन चुनाव बाद सत्ताधारी दलों के नेताओं ने पर्यवेक्षिका बहाली मामले में चुप्पी साध ली। अब तो विपक्ष भी हरकत में नहीं दिख रहा है।

2010 की बहाली को लेकर गरजे थे जवाहर प्रसाद

 

वर्ष 2010 में पर्यवेक्षिका बहाली को लेकर भरे गए ऑनलाइन आवेदन के बावजूद बहाली प्रक्रिया ठंडे बस्ते में डाले जाने के बाद स्थानीय विधायक वाहर प्रसाद ने 2012 में जिला प्रशासन की उदासीनता को मुद्दा बनाकर विधानसभा में सवाल उठाया था। तत्कालीन समाज कल्याण मंत्री परवीन अमानुल्लाह ने 2 दिनों के भीतर बहाली प्रक्रिया को पूरा करने का आश्वासन देते हुए जवाब दिया था। तत्कालीन जिलाधिकारी रहे अनुपम कुमार ने वर्ष 2012 में 3 दिनों के अंदर बहाली प्रक्रिया को पूर्ण कराने का काम किया गया था।

अपर मुख्य सचिव का आदेश भी बेअसर

बिहार विधानसभा चुनाव के पहले ही मंत्री कोषांग की ओर से जारी आदेश के बाद भी प्रोग्राम पदाधिकारी कार्यालय कुंभकरण की नींद सोया रहा। इसके बाद पर्यवेक्षिका बहाली 15 दिनों के भीतर पूरा करने का निर्देश समाज कल्याण विभाग के अपर मुख्य सचिव ने 21 जनवरी 2021 को जारी पत्र संख्या 307 के जरिये दिया। बावजूद इसके रोहतास जिले में पर्यवेक्षिका बहाली की संचिका धूल फांक रही है।

अब तक मेधा सूची का प्रकाशन भी नहीं हो सका है। मेधा सूची के प्रकाशन के बाद आपत्ति दर्ज करने के लिए समय का निर्धारण होगा। आपत्तियों के निराकरण के पश्चात अंतिम मेधा सूची का प्रकाशन होगा। तब नियोजन के लिए अंतिम रूप से चयनित अभ्यर्थियों को नियोजन पत्र जारी किया जा सकेगा।

 

- Sponsored -

- Sponsored -

- Sponsored -

ADVERTISMENT