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बिहार के ककोलत जलप्रपात में अचानक आई भीषण बाढ़, आफत में फंसी हजारों सैलानियों की जान

प्रकृति के मनोरम स्थल ने अख्तियार किया रौद्र रूप, घंटों तक मौत के मुंह में फंसे रहे लोग

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धारा-144 लागू होने के बावजूद जलप्रपात का आनंद लेने पहुंचे थे सैलानी

नवादा (voice4bihar news)। अपनी मनोरम छटा के लिए विख्यात बिहार के ककोलत जलप्रपात में अचानक आई बाढ़ के कारण हजारों सैलानियों की जान आफत में फंस गयी। पहाड़ से गिरते शीतल झरने का आनंद लेने पहुंचे पर्यटकों ने अचानक प्रकृति का रौद्र रूप देखा तो सहम गये। हालांकि समय रहते सभी सैलानियों को वहां से निकाल लिया गया, जिससे भीषण अनहोनी की आशंका टल गयी।

जलप्रपात का तालाब हो गया लबालब, 32 सीढ़ियां डूबीं

बिहार के नवादा जिला अंतर्गत गोविंदपुर प्रखंड क्षेत्र में प्रकृति की गोद में बसे ककोलत शीतल जलप्रपात में बृहस्पतिवार की दोपहर सैलाब आ गया। बताया जाता है कि झरना में उम्मीद से ज्यादा पानी आने से जलप्रपात का तालाब लबालब हो गया। जलप्रपात की मुख्यधारा के समीप ऊपरी स्थल का भाग पूर्ण रूप से पानी से ढंक गया। साथ ही निचले हिस्से की 32 सीढ़ियां भी पानी में डूब गईं। यहां तक कि परिसर स्थित में मंदिर और ड्रेसिंग रूम का कुछ हिस्सा पानी में डूब गया।

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ककोलत के केयर टेकर व सहयोगियों ने दिखाई सूझबूझ

इस अवस्था में सैलानियों का वहां से बाहर निकलना काफी मुश्किल हो गया। जलप्रपात की मुख्यधारा के पास फंसे सैलानियों को ककोलत केयर टेकर यमुना पासवान व उनके सहयोगियों ने काफी मशक्कत के बाद बाहर निकाला। उल्लेखनीय है कि ककोलत जलप्रपात में ऐसी घटना पहली बार नहीं हुई है बल्कि कई बार ऐसे हालात पैदा होते रहे हैं। इन घटनाओं से न तो स्थानीय प्रशासन सीख ले रहा है और न सैलानी हिमाकत से बाज आ रहे हैं। प्रशासनिक स्तर पर रोक के बावजूद यहां पर्यटकों की भीड़ बढ़ती जा रही है।

निषेधाज्ञा लागू होने के बावजूद इतनी बड़ी संख्या में सैलानी कैसे पहुंचे?

सोचने वाली तो बात यह है कि पिछले दिनों एसडीओ चन्द्रशेखर आजाद के निर्देशानुसार बीडीओ कुंज बिहारी सिंह ने ककोलत जलप्रपात क्षेत्र में निषेधाज्ञा लगा दी थी। धारा 144 लागू कर सैलानियों के ककोलत आने पर पूर्ण रूप से रोक लगा दिया गया था। इसके बावजूद यहां प्रतिदिन काफी संख्या में सैलानी पहुंच रहे हैं। कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए उठाये गए इस ऐहतियातिक कदम का यहां जरा भी पालन नहीं हो रहा है। नतीजा यह है कि बृहस्पतिवार को भीषण बाढ़ में ककोलत जलप्रपात में बड़ा हादसा हो सकता था, परंतु इसे बचा लिया गया।

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