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थानेदार की मनमानी के खिलाफ गुहार लगाती रहीं बेटियां, सिर्फ आश्वासन ही मिला

पीड़ित परिवार की दो नाबालिग बेटियों ने पुलिस अधीक्षक से लगाई न्याय की गुहार

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  • काराकाट पुलिस ने मारपीट के मामले में एक परिवार को भेजा जेल, दूसरे पक्ष को छोड़ दिया
  • रात में विरोधी पक्ष के लोगों ने घर में डाला डाका, गहने व कागजात उठाकर ले गए
  • एसपी आशीष भारती ने बेटियों को दिया न्याय का आश्वासन, दोषियों पर होगी कार्रवाई 

पटना (voice4bihar desk)। रोहतास जिले के काराकाट थाने के करुप गांव में संपत्ति के विवाद को लेकर आपसी मारपीट का मामला पुलिस की कार्यशैली से ऐसा उलझा कि एक परिवार तबाही के कगार पर जा पहुंचा। थानेदार की मनमानी से माता-पिता व नाबालिग भाई भी जेल में डाल दिये गए और इधर विरोधी पक्ष ने घर का दरवाजा तोड़कर जेवरात व अन्य सामान हथिया लिया। इतना ही नहीं घर में बचीं दो नाबालिग बेटियों के साथ भी छेड़खानी की गयी …। हर तरफ से आफत से घिरीं दोनों बेटियां फरियाद लेकर एसपी कार्यालय तक जा पहुंचीं, जहां घंटों इंतजार के बाद सिर्फ आश्वासन ही मिला।

पुलिस के अनुसार काराकाट पुलिस ने संपत्ति विवाद को लेकर हुई मारपीट के मामले में थाना क्षेत्र के करूप गांव से धीरज कुमार, इंद्रेश कुमार, शंकर सिंह व निर्मला देवी सहित एक ही घर के चार लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। धीरज कुमार और इंद्रेश कुमार शंकर सिंह के पुत्र हैं जबकि निर्मला देवी शंकर सिंह की पत्नी है।

इस मामले में मिली जानकारी के अनुसार निर्मला देवी के नाम पर खरीदी गई जमीन के कारण पिछले कुछ दिनों से परिवार में विवाद चल रहा था। मामला अंचल कार्यालय से लेकर पुलिस तक भी गया था। विवाद सुलझाने पहुंचे अंचल पदाधिकारी ने यह कहते हुए मामले को शांत कराया कि निर्मला देवी के नाम पर जो भी संपत्ति है, उसमें पट्‌टीदारों का कोई हक नहीं बनता। इससे बौखलाया दूसरा पक्ष हमेशा झगड़े पर उतारु रहने लगा। इसी बीच शुक्रवार को दोनों परिवारों के बीच हुई मारपीट में दोनों पक्ष के आधा दर्जन लोग घायल हो गए।

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एसपी को दिया गया आवेदन, जिस पर कार्रवाई का मिला आश्वासन।
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मामला थाने पहुंचा तो दोनों पक्षों ने स्थानीय थाने में प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए आवेदन दिया, लेकिन पुलिस ने एक पक्ष की ही रिपोर्ट दर्ज की। दूसरे पक्ष ने रिपोर्ट दर्ज करने को कहा तो सीधे हाजत में बंद कर दिया। वहीं दूसरे पक्ष के लोगों को खुला छोड़ दिया। काराकाट पुलिस की इस एकतरफा कार्रवाई के खिलाफ दो बेटियों ने पुलिस अधीक्षक से गुहार लगाई है।

दरअसल शंकर सिंह का पूरा परिवार जेल जाने के बाद घर में सिर्फ दो नाबालिग बेटियां बची हैं, जो गुहार लगाने के लिए शुक्रवार को एसपी आशीष भारती के कार्यालय जा पहुंचीं। शंकर सिंह की बेटी पूजा व प्रीति ने एसपी को दिये आवेदन में गोड़ारी पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। बेटियों ने बताया कि मारपीट की घटना के बाद उनके माता-पिता शंकर सिंह व निर्मला देवी आवेदन लेकर गोड़ारी थाने पहुंचे तो पुलिस ने उनका आवेदन फाड़ दिया और एक नाबालिग भाई समेत पूरे परिवार को हाजत में डाल दिया।

पूजा व प्रीति ने बताया कि उधर पूरा परिवार थाने में था और इधर विरोधी पक्ष के लोगों ने रात के दो बचे घर पर हमला कर दिया। किवाड़ तोड़कर घर में घुसे और गहने व जमीन के कागजात ढूंढ़ने लगे। इस वारदात में उनके साथ बेटी इंदू देवी, दामाद रविकांत, विन्दू देवी व रानी कुमारी ने मारपीट करते हुए घर में रखे गहने व कागजात ले गये। बकौल पूजा व प्रीति – इस दौरान रविकांत सिंह ने छेड़खानी भी की। दोनों किसी तरह भागकर बाहर निकलीं और सुबह होते ही एसपी के यहां फरियाद लेकर पहुंच गयी। जहां से उन्हें आश्वासन मिला है कि कार्रवाई दोनों पक्षों के खिलाफ होगी। अब देखना है कि इस मामले में एसपी का आश्वासन कितना अमल में आता है।

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