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पंचायत चुनाव : निर्वाचन आयोग तैयार, असमंजस में सरकार

बिहार में अब पंचायत चुनाव टलने के पूरे आसार, हो रहा मंथन

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पंचायत प्रतिनिधियों का कार्यकाल खत्म होने पर कार्यभार देखेंगे नौकरशाह

पटना (voice4bihar news)। कोरोना संक्रमण के बीच पंचायत चुनाव कराने को लेकर राज्य निर्वाचन आयोग ने जहां प्रशिक्षण की तारीखों का ऐलान कर सरगर्मी बढ़ा दी है वहीं राज्य सरकार के असमंजस के कारण चुनाव टलने के पूरे आसार नजर आने लगे हैं। इस बीच पंचायती राज विभाग ने पंचायती राज व्यवस्था के संचालन के लिए प्रशासक नियुक्त करने का प्रस्ताव तैयार कर लिया है। अगर इस प्रस्ताव को मंजूरी मिली तो 15 जून से पंचायतों का कार्यभार अफसरों के हवाले होगा। अगली पंचायत सरकार का गठन होने तक यह प्रभार इन्हीं के पास रहेगा।

उल्लेखनीय है कि पंचायत चुनाव में ईवीएम की उपलब्धता को लेकर केंद्रीय निर्वाचन आयोग व राज्य निर्वाचन आयोग में सहमति बन गयी है। 14 राज्यों से ईवीएम मंगाने व फिर उन्हें 30 जुलाई तक लौटाने का निर्देश भारत निर्वाचन आयोग दे चुका है। इसके लिए सभी जिलों के डीएम सह जिला निर्वाचक पदाधिकारियों को निर्देश दिया जा चुका है कि ईवीएम के रखरखाव की व्यवस्था करें। इससे एक कदम आगे बढ़कर राज्य निर्वाचन आयोग ने चुनाव को लेकर प्रशिक्षण की तारीखों का ऐलान भी कर दिया है। इन सबके बावजूद राज्य सरकार अभी चुनाव कराने को लेकर दुविधा में है।

वीडियो कांफ्रेंसिंग से होगा चुनाव को लेकर प्रशिक्षण

राज्य निर्वाचन आयोग के सचिव योगेंद्र राम ने इस संबंध में सभी जिलों के निर्वाचन पदाधिकारी को पत्र लिख कर चुनाव के सफल संचालन एवं क्रियान्वयन को लेकर सभी निर्वाचित पदाधिकारी एवं सहायक निर्वाचित पदाधिकारी को ट्रेनिंग देने का निर्देश दिया है। ट्रेनिंग राज्य स्तर पर वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से दी जाएगी। 22 अप्रैल को पटना, सारण व कोसी प्रमंडल के अधिकारियों को प्रशिक्षित किया जाएगा जब कि 23 को तिरहुत, दरभंगा व पूर्णिया के अफसर ट्रेनिंग लेंगे। 24 अप्रैल को मगध, मुंगेर और भागलपुर प्रमंडल के निर्वाची पदाधिकारियों का प्रशिक्षण कार्यक्रम संपन्न होगा।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार व पंचायती राज मंत्री भी असमंजस में

चुनाव आयोग की तरफ से चल रही तैयारी के बावजूद कोरोना संक्रमण को देखते हुए सरकार की दुविधा बरकरार है। बीते रविवार को कोरोना को लेकर नाईट कर्फ्यू की घोषणा करने मीडिया के सामने आए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पंचायत चुनाव के मुद्दे पर कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया। इससे पहले पंचायती राज मंत्री सम्राट चौधरी से भी इस बारे में पूछा गया था तो उन्होंने कहा कि राज्य निर्वाचन आयोग को इस बारे में फैसला लेना है।

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प्रशासक नियुक्ति के प्रस्ताव पर राज्य निर्वाचन आयोग के फैसले पर टिकी नजर

पंचायती राज विभाग ने पंचायती राज संस्थाओं को चलाने के लिए प्रशासन नियुक्त करने का प्रस्ताव तैयार कर लिया है, लेकिन इस पर अभी राज्य निर्वाचन आयोग की सहमति लेना अनिवार्य है। कयास लगाए जा रहे हैं कि कोरोना संक्रमण की विकराल स्थिति को देखते हुए राज्य निर्वाचन आयोग भी इस प्रस्ताव पर सहमत हो जाएगा।

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डीडीसी संभालेंगे जिला परिषद, बीडीओ देखेंगे पंचायत समिति का काम

ऐसी स्थिति में सभी जिला परिषदों के प्रशासक संबंधित जिले के उपविकास आयुक्त होंगे। इसी तरह पंचायत समिति व ग्राम पंचायतों के प्रशासक बीडीओ होंगे, जो पंचायत सचिवों के सहयोग से पंचायतों में विकास का कार्य कराएंगे। वर्तमान निर्वाचित प्रतिनिधियों का कार्यकाल 15 जून को पूरा हो रहा है, लेकिन इससे पहले पंचायत चुनाव कराने की उम्मीद कम ही बची है। ऐसे में देखना दिलचस्प होगा कि पंचायती राज संस्थाओं को कार्यभार नौकरशाहों के हाथ में कितने दिनों तक रहेगा।

....फिर निर्वाचन आयोग की तैयारी का क्या होगा?

बिहार में ईवीएम से चुनाव कराने के फैसले के बाद भारत निर्वाचन आयोग ने ईवीएम का जुगाड़ तो कर दिया लेकिन अगर चुनाव की तारीख आगे बढ़ी तो ईवीएम लौटाने की शर्त का क्या होगा? दूसरे राज्यों से आने वाले ईवीएम अगर 30 जुलाई तक लौटाने हैं तो इससे पहले चुनाव कराना अनिवार्य होगा। हालांकि अभी संभावना पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। 15 जून से भले ही प्रशासकों की देखरेख में पंचायती राज संस्थाएं होंगी, लेकिन अगर कोरोना संक्रमण की रफ्तार थमी तो मध्य जून से जुलाई के आखिर तक पंचायत चुनाव कराए जा सकते हैं। ऐसा नहीं हुआ तो फिर अक्टूबर-नवंबर तक धैर्य रखना होगा।

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