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राष्ट्रभाषा हिन्दी के विकास के जगदम्बी बाबू के सपने होंगे साकार

नए कलेवर में काम करेगा बिहार सरकार का राजभाषा विभाग : तारकिशोर

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हिन्दी को अभी कठिन लड़ाई लड़नी है : अवधेश

पटना (voice4bihar news)। जगदम्बी प्रसाद यादव स्मृति प्रतिष्ठान व अंतरराष्ट्रीय हिंदी परिषद की ओर से शुक्रवार को बिहार विधान परिषद के सभागार में राजभाषा सम्मेलन एवं काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। इसका उद्घाटन उप मुख्यमंत्री तारकिशोर प्रसाद ने किया। हिन्दी भाषा के प्रचार-प्रसार में पूर्व केंद्रीय मंत्री जगदम्बी प्रसाद यादव के योगदान का स्मरण करते हुए उपमुख्यमंत्री तारकिशोर प्रसाद ने कहा कि हिंदी के विकास में जगदम्बी बाबू की अहम भूमिका रही है। उनकी स्मृति में संचालित संगठन हिंदी के विकास के लिए निरंतर क्रियाशील है।

उप मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत और भारतीयता को सुदृढ़ता प्रदान करने की दिशा में राष्ट्रभाषा हिंदी की महत्वपूर्ण भूमिका है। भाषा के रूप में हिन्दी न सिर्फ भारत की पहचान है, बल्कि यह हमारे जीवन मूल्यों संस्कृति एवं संस्कारों की वाहक भी है। देश-विदेश में हिन्दी के विकास तथा हिंदीतर प्रदेशों में हिंदी के प्रचार-प्रसार को बढ़ावा देने के लिए भी अंतरराष्ट्रीय हिंदी परिषद बेहतरीन कार्य कर रहा है। सरकारी कामकाज में हिंदी के प्रयोग को बढ़ावा देने के लिए सरकारी स्तर पर हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने में हिंदी की अहम भूमिका है।

कार्यक्रम का शुभारंभ करते डिप्टी सीएम।

राजनीति में हुई फिसलन को दिशा देता है साहित्य : अवधेश नारायण

उन्होंने कहा कि बिहार सरकार का राजभाषा विभाग परंपरागत रूप से अनेक कार्यक्रम करता रहा है परंतु राष्ट्रभाषा हिंदी के विकास के लिए विभाग को नए कलेवर के साथ काम करना होगा। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि बिहार विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह ने कहा कि राजनीति को दिशा देने और यदि राजनीति में फिसलन हो तो उसे संभालने का काम साहित्य करता है। किताबें हमारी सच्ची साथी होती हैं। जगदम्बी प्रसाद यादव जी ने सदैव स्वयं को भाषा और साहित्य से जोड़े रखा।

हिन्दी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ावा देने की जरूरत : वीरेंद्र कुमार यादव

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए भारत सरकार के हिंदी सलाहकार समिति के सदस्य, विश्व हिंदी दिवस के प्रस्तावक तथा अंतरराष्ट्रीय हिंदी परिषद के अध्यक्ष वीरेंद्र कुमार यादव ने कहा कि हिंदी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ावा देने की जरूरत तो है ही, देश के अंदर भी इसकी प्रतिष्ठा स्थापित किए जाने की आवश्यकता है। सरकारी कामकाज में अंग्रेजी भाषा के प्रयोग के संबंध में 15 साल का जो प्रावधान बनाया गया था, वह 74 सालों के बाद भी हटाया नहीं जा सका है। हम अब आजादी का अमृत महोत्सव मना रहे हैं। आजादी के इस अमृत वर्ष में हिंदी को वह मान मिल जाना चाहिए जिसकी वह हकदार है।

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लोकगायिका नीतू कुमारी नवगीत को सम्मानित करते डिप्टी सीएम।

प्रारंभिक व माध्यमिक शिक्षा मातृभाषा हिन्दी में ही दी जानी चाहिए : कौशलेंद्र

कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि बिहार-झारखंड के प्रधान मुख्य आयकर आयुक्त कौशलेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि प्रारंभिक तथा माध्यमिक शिक्षा मातृभाषा में ही दी जानी चाहिए जिससे कि बच्चों का समग्र विकास हो सके। उन्होंने कहा कि सरकारी कार्यालय के प्रमुख यदि अपना काम हिंदी में करते हैं तो उस कार्यालय के बाकी लोग भी हिंदी में काम करने लग जाते हैं।

इससे पहले संस्थान के क्रियाकलापों से लोगों को परिचय कराते हुए महासचिव डॉ अंशु माला ने कहा कि हिंदी के पुरोधा जगदम्बी प्रसाद यादव ने भाषा और संस्कृति के विकास के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर कर दिया। जगदम्बी प्रसाद यादव विदेशी मनोवृति और मनोभावों का नकल करने के खिलाफ थे। उनका मानना था कि सांस्कृतिक अस्मिता नकल से नहीं बनती, बल्कि अपनी सही पहचान से ही बनती है।

राजभाषा दर्पण स्मारिका का हुआ विमोचन

क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी प्रवीन मोहन सहाय भी इस अवसर पर उपस्थित रहे। संगोष्ठी में राजभाषा दर्पण स्मारिका का विमोचन भी किया गया। राजभाषा संगोष्ठी में अपनी बात रखते हुए रेलवे के वरीय अधिकारी दिलीप कुमार ने कहा कि हिन्दी को संयुक्त राष्ट्रसंघ की भाषा बनाया ही जाना चाहिए। संगोष्ठी में तूफैल कादरी खान, कैलाश ठाकुर और डॉ साकेत सहाय ने भी अपने विचार रखे।

कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री तारकिशोर प्रसाद ने वरिष्ठ साहित्यकार और बिहार गौरव गान की रचयिता डॉ शांति जैन को पद्मश्री पुरस्कार मिलने के लिए विशेष सम्मान प्रदान किया। उन्होंने राजभाषा हिंदी तथा साहित्य एवं संस्कृति के क्षेत्र में विशेष योगदान के लिए लोक गायिका नीतू कुमारी नवगीत, कवयित्री आराधना प्रसाद, डॉ आरती कुमारी, अर्चना त्रिपाठी और लोक गायिका नीतू कुमारी नूतन को सम्मानित किया।

लोकगायिका नीतू नवगीत ने पेश की सरस्वती वंदना

इस अवसर पर नीतू कुमारी नवगीत ने सरस्वती वंदना की प्रस्तुति की। उन्होंने या रब हमारे देश में बिटिया का मान हो गीत गाकर भी लोगों का मन जीता। गायिका नीतू कुमारी नूतन ने गणेश वंदना पेश किया। राजभाषा संगोष्ठी के बाद डॉ शांति जैन की अध्यक्षता में कवि गोष्ठी का आयोजन किया गया जिसमें भगवती प्रसाद द्विवेदी, मधुरेश कांत शरण, चितरंजन, अर्चना राय भट्ट, डॉ विजय कुमार पांडे, डॉ रेखा सिन्हा, लता ज्योतिर्मय, राजकुमार प्रेमी, सिद्धेश्वर, डॉ सुमेधा पाठक, डॉ नीलिमा सिंह सहित अनेक कवियों ने अपनी कविताओं का पाठ किया।

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