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प्रवासियों को फिर सताने लगा लॉकडाउन का भय, महानगरों से लौट रहे घर

कोरोना संक्रमण के कारण पिछले वर्ष हुई फजीहत अब भी है याद

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कोविड-19 के कारण महानगरों में कम हुए काम के अवसर से भी परेशान

मुजफ्फरपुर ( Voice4bihar news )। देश भर में बढ़ते कोरोना के संक्रमण ने बिहार से बाहर रहने वाले प्रवासियों को एक बार फिर विकट परेशानी में डाल दिया है। जिस अनुपात में कोरोना संक्रमण के मामले बढ़ रहे हैं, उसी अनुपात में प्रवासी बिहारियों की तेजी से घर वापसी का सिलसिला शुरू हो गया है। महानगरों से आने वाली रेलगाड़ियां एक बार फिर ओवरलोड चलने लगीं हैं। इनमें कोरोना गाइडलाइंस का अनुपालन भी नामुमकिन है।

महानगरों से आने वाली ट्रेनें खचाखच, लाैटते वक्त ढनाढन

मुजफ्फरपुर समेत उत्तर बिहार के कई रेलवे जंक्शन पर नजर डालें तो खासकर महाराष्ट्र के मुंबई और पुणे से आनेवाली ट्रेनें खचाखच भरी हुई आ रही हैं। ऐसा नहीं है कि यह हाल केवल नियमित रूप से चलनेवाली ट्रेनों का है, अभी रेलवे की ओर से जो भी स्पेशल ट्रेनें गुजरात और महाराष्ट्र के चलाई जा रही हैं, सभी वहां से फुल होकर लौट रही हैं। जबकि इधर से जाते समय लगभग खाली ही जाती हैं।

अब तो टिकट कैंसल भी कराने लगे प्रवासी

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इतना ही नहीं अहमदाबाद, सूरत, मुंबई और पुणे के लिए जिन यात्रियों ने पहले से टिकट की बुकिंग करा ली थी, उनलोगों ने अब कैंसल कराना शुरू कर दिया है। ऐसे में लोगों के मन में एक बड़ा सवाल है कि क्या हमलोग फिर से लॉकडाउन की ओर जा रहे है? याद रहे कि पिछले साल अचानक हुए देशव्यापी लॉकडाउन ने इन प्रवासियों को भारी मुसीबत में डाल दिया था। उस फजीहत को याद कर इस बार पहले ही रास्ता नापना बेहतर समझ रहे हैं।

राज्य सरकार की हर समीक्षा बैठक में कड़े होते जा रहे नियम

गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने इस बार लॉकडाउन या इस तरह के निर्णय लेने का पूरा अधिकार राज्य सरकारों को ही दे रखा है, जो अपनी स्थानीय जरूरतों को देखते हुए निर्णय लेने को स्वतंत्र हैं। हालांकि अभी बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने नाइट कर्फ्यू या लॉकडाउन लेने से इंकार किया है, लेकिन उन्होंने लगातार स्थिति की समीक्षा करने की बात कही है। प्रधानमंत्री भी अभी लॉकडाउन जैसे हालात से इनकार कर चुके हैं, लेकिन प्रवासियों को यकीन नहीं हो रहा।

जानकारों का कहना है कि सरकार का यह निर्णय अभी शुरूआती कदम भर है। पिछली बार भी जनता कर्फ्यू से शुरू होकर लॉकडाउन की एक सीरीज शुरू हो गई थी। शाम सात बजे के बाद जिस तरह से दुकानों को बंद रखने और लोगों को घरों में ही रहने का आदेश जारी किया गया है, यह नाइट कर्फ्यू ही माना जाएगा। इसके बाद लोगों के मन में इस बात की आशंका है कि हो न हो इसका अगला चरण लॉकडाउन के रूप में सामने आए।

घर पहुंचने की जल्दी में दिख रहे महानगरों से लौटे प्रवासी

राज्य में कोरोना संक्रमण की रफ्तार पर गौर करें तो पिछले साल के मुकाबले इस बार ज्यादा डराने वाले आंकड़े सामने आ रहे हैं। इस हालत ने लॉकडाउन की आशंका को बल मिल रहा है। लेकिन जब तक आधिकारिक रूप से कुछ न कहा जाए, यह सिर्फ आशंका भर माना जाएगा। देश के महानगरों में तेजी से कोरोना संक्रमण के मामले के साथ ही वहां रोजगार के अवसर घटने के कारण भी प्रवासियों के मन में डर समा गया है। बाहर से आने वाले लोगों के चेहरे पर एक बार फिर कोरोना और लॉकडाउन का डर स्पष्ट दिख रहा है। हालांकि बिहार में अभी वह स्थिति नहीं है, यह जानकर प्रवासियों में राहत तो दिख रही है, लेकिन जल्दी घर पहुंचने की घबराहट को वे नहीं छुपा पा रहे।

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