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नाबालिग से दुष्कर्म के अभियुक्त को फांसी की सजा के साथ आजीवन कारावास

बिहार की एक अदालत ने सुनाई दोहरी कठोर सजा, अर्थदंड भी देना होगा

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छ्ह वर्ष की मासूम बच्ची से किया था दुष्कर्म, 2 माह के भीतर सजा

अररिया (voice4bihar news)। बिहार की एक अदालत ने दलित बच्ची से दुष्कर्म के मामले में अभियुक्त को अंतिम सांस तक फांसी पर लटकाए जाने का कठोर दंड दिया है। इसके साथ ही एससी-एसटी एक्ट में सश्रम आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने अभियुक्त पर 10,000 का आर्थिक दंड भी लगाया गया है। खास बात यह भी है कि अपराध होने के 2 माह के भीतर ही अभियुक्त को सजा के अंजाम तक पहुंचाया गया है। घटना बीते साल दो दिसंबर की है।

दुष्कर्म पीड़िता को 10 लाख मुआवजा देने का भी आदेश

सिविल कोर्ट अररिया के एडीजे-6 सह पाॅक्सो के स्पेशल जज शशिकांत राय ने गुरुवार को यह कठोरतम सजा सुनाई है। अभियुक्त को छह साल की दलित बच्ची के साथ दुष्कर्म करने का दोषी पाए जाने पर आरोपी मो. मेजर को फांसी की सजा सुनाई गयी है। इसके अलावा कोर्ट ने यह भी आदेश दिया है कि पीड़िता को विक्टिम कंपनसेशन फंड से डीएलएसए के माध्यम से दस लाख रुपये की अनुग्रह राशि दी जाए।

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अररिया महिला थाना कांड संख्या 137/ 2021 की सुनवाई के दौरान आईपीसी की धारा 376 AB पॉक्सो अधिनियम 2012 के अलावे एससी-एसटी एक्ट के तहत दोषी ठहराया गया है। स्पेशल पॉक्सो जज शशिकांत राय की अदालत ने दलित बच्ची से दुष्कर्म के आरोपी मोहम्मद मेजर को अंतिम सांस तक फांसी पर लटकाए जाने की कठोर सजा सुनाई है।

आरोपी भरगामा प्रखंड क्षेत्र निवासी स्व.मो.शमशेर का 32 वर्षीय पुत्र मो.मेजर है। पॉक्सो के स्पेशल पीपी डॉ श्याम लाल यादव ने बताया की यह घटना बीते साल दो दिसंबर की है। युवक पर आरोप है कि उसने अपने ही गांव की छः वर्षीय दलित बच्ची के साथ दुष्कर्म किया था। कोर्ट में सभी गवाहों ने घटना का पूर्ण समर्थन किया था। गवाहों से संतुष्ट होकर न्याधीश ने छ: वर्षीय बच्ची के साथ किये गये जघन्य अपराध को देखते हुए आरोपी मो. मेजर को फांसी की सजा सुनाई।

सिर्फ एक सप्ताह में अदालत ने सुनाया फैसला

बता दें कि विगत दो दिसम्बर को हुई वारदात में पुलिस ने शीघ्रता से अदालत में चार्जशीट दाखिल किया। 20 जनवरी 2022 को कोर्ट ने इस केस में संज्ञान लिया। 22 जनवरी 2022 को अभिलेख प्रस्तुत किया गया। अदालत में विचारण के लिए पेश एकमात्र अभियुक्त मोहम्मद मेजर (48 वर्ष) पिता स्व. शमशेर अली, मुहल्ला वीर नगर पश्चिम, थाना भरगामा, जिला अररिया को उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर धारा दोषी ठहराया गया।

आखिरकार 27 जनवरी 2022 को सजा के बिंदु पर सुनवाई हुई। दोनों पक्षों को सजा के बिंदु पर सुना गया तथा अभियुक्त की उपस्थिति में धारा 376 आईपीसी के अंतर्गत जीवन समाप्ति तक फांसी पर लटकाए जाने का आदेश दिया गया। साथ ही एससी-एसटी एक्ट के अंतर्गत आजीवन सश्रम कारावास एवं 10 हजार रुपये जुर्माना की सजा मिली। जुर्माना नहीं देने पर 10 दिन का अतिरिक्त साधारण कारावास की सजा अदालत ने मुकर्रर की।

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