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नेपाल में फिर से केपी ओली सरकार, एक माह में साबित करना होगा बहुमत

केपी शर्मा ओली ने चार साल में तीसरी बार ली प्रधानमंत्री पद की शपथ

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राष्ट्रपति विद्यादेवी भंडारी ने दिलाई पद तथा गोपनीयता की शपथ

राजेश कुमार शर्मा की रिपोर्ट

अररिया (voice4bihar news)। भारत के निकटतम पड़ोसी देश नेपाल में चल रही राजनीतिक उठा-पटक के बीच प्रधानमंत्री केपी  ओली ने शुक्रवार को फिर से प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। चार साल पहले सत्ता में आए केपी शर्मा ओली का पीएम के तौर पर यह तीसरा शपथ ग्रहण है। सदन में विश्वासमत नहीं मिलने पर प्रधानमन्त्री का पद गंवा चुके प्रधानमंत्री केपी ओली ने तीन दिनों तक चले राजनीतिक खींचतान के बाद आखिरकार सत्ता में वापसी का रास्ता तय किया। शीतल निवास में आयोजित कार्यक्रम के बीच राष्ट्रपति विद्यादेवी भण्डारी ने ओली को पद तथा गोपनीयता की शपथ दिलायी।

प्रधानमंत्री के तौर पर केपी ओली का यह दूसरा कार्यकाल

तकनीकी रुप से भले ही खड्ग प्रसाद शर्मा ओली ने चार साल में तीसरी बार पीएम पद की शपथ ली, लेकिन पीएम के तौर पर उनका यह दूसरा कार्यकाल है। नेपाल का नया संविधान लागू होने पर सुशील कोइराला को पराजित कर खड्ग प्रसाद शर्मा ओली पहले प्रधानमंत्री बने और दिनांक 12 अक्टूबर 2015 को प्रधानमंत्री के पद पर आसीन हुए। अगले ही साल 24 जुलाई 2016 को अल्पमत में आ जाने पर राष्ट्रपति को अपना त्यागपत्र सौंप दिया। इसके बाद नेपाल की सत्ता एकीकृत नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी के पुष्प कमल दाहाल प्रचंड व फिर नेपाल कांग्रेस के शेर बहादुर देउबा के हाथ में रही।

शपथ ग्रहण में शामिल केपी ओली के मंत्रीगण।

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15 फरवरी 2018 को खड्ग प्रसाद शर्मा ओली ने दूसरी बार प्रधानमंत्री के तौर पर नेपाल की सत्ता संभाली। तब से लेकर दो बार इनसे सत्ता छीनने का प्रयास हो चुका है, लेकिन लगातार दूसरी बार विरोधियों की एकता क्षणिक साबित हुई। वर्ष 2020 में नेपाली संसद भंग के रुप में आये राजनीतिक संकट को ओली ने बखूबी सामना किया और राष्ट्रपति ने फिर से संसद को बहाल कर केपी शर्मा ओली की कुर्सी बचाई थी।

सदन में पारित बहुमत प्रस्ताव स्वत: हो गया रद्द

दरअसल पिछले दिनों फ्लोर टेस्ट में बुरी तरह हारने वाले केपी ओली के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव स्वतः ही रद्द हो गया है। नई सरकार के गठन के लिए विपक्षी दलों को दी गयी तीन दिनों की समय सीमा गुरुवार की रात नौ बजे ही खत्म हो चुकी है। इस दौरान कोई भी दल अपना बहुमत का प्रस्ताव राष्ट्रपति के समक्ष पेश नहीं कर पाया है। लिहाजा रात्रि दस बजे राष्ट्रपति विद्यादेवी भंडारी ने केपी शर्मा ओली को संविधान की धारा 76(3)के अनुसार प्रधानमंत्री पद पर फिर से नियुक्त किया।

यह भी देखें : बहुमत में फिर आई ओली सरकार, विरोधी गुटों के दावे हुए फेल

एक माह में बहुमत नहीं तो नया प्रधानमंत्री बनेगा

शुक्रवार को प्रधानमन्त्री पद की शपथ लेने वाले केपी ओली को अब एक एक महीने के अंदर फिर से संसद में विश्वासमत हासिल करना होगा। इस बार अगर विश्वासमत हासिल करने में ओली चूकते हैं तो संविधान की धारा 76 (5) के अनुसार राष्ट्रपति अन्य किसी को प्रधानमंत्री में नियुक्त करेंगी। राष्ट्रपति के पास एक अन्य विकल्प होगा कि फिर संसद विघटन कर मध्यावधि चुनाव की घोषणा करें।

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