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बिहार का जूनियर इंजीनियर चार दिनों से नेपाल पुलिस की हिरासत में

बाल यौन शोषण का लगा आरोप, घरेलू कामकाज के लिए लाये थे युवती को

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  • अरररिया जिले के फारबिसगंज निवासी है पीडब्ल्यूडी का कनीय अभियंता

राजेश कुमार शर्मा
जोगबनी (voice4bihar desk)। बिहार के अररिया जिले के फारबिसगंज निवासी व बिहार के लोक निर्माण विभाग (पीडब्लूडी) में कार्यरत एक कनीय अभियंता (जेई) पिछले चार दिनों से नेपाल पुलिस की हिरासत में बन्द है । मामला भी गंभीर है, आरोप भी गंभीर। जिला पुलिस कार्यालय मोरंग से मिली जानकारी के अनुसार फारबिसगंज निवासी 42 वर्षीय प्रभाष कुमार देव की गिरफ्तारी बाल यौन शोषण के आरोप में हुई है।

आरोप है कि पिछले एक वर्ष से जेई के घर में घरेलू कार्य के लिए नेपाल से लाई गयी 17 वर्षीय सुनीता कुमारी (काल्पनिक नाम) को रखा गया था, लेकिन जब भी अकेले में मौका मिलता तो बालिका के साथ अभद्र व्यवहार करने के साथ ही संवेदनशील अंगों को हाथ लगता था । लगातार अपने ऊपर हो रहे दुराचार से तंग हो कर उक्त बालिका ने किसी कार्य का बहाना बनाकर अपने नेपाल स्थित अपने घर जाने की जिद आरोपी प्रभाष कुमार देव से करने लगी।

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गिरफ्तार आरोपी

बीते दिनों जेई प्रभाष देव उस लड़की को लेकर नेपाल पहुंचा। रास्ते में बालिका के साथ अभद्र व्यवहार करने की बात बालिका के परिजनों ने इलाके के पुलिस कार्यालय रानी में दिए गए आवेदन में कही। इलाका पुलिस कार्यालय रानी के इंस्पेक्टर दीपक थापा ने मामले की पुष्टि करते हुए कहा कि बालिका के परिजनों के द्वारा लिखित शिकायत मिलने के बाद हुलास चौक से आरोपी ब्यक्ति को गिरफ्तार कर लिया गया है। गिरफ्तार ब्यक्ति के ऊपर बाल यौन शोषण का मामला दर्ज कर हिरासत में रख कर अनुसंधान किया जा रहा है ।

अधिकारी के घर में बाल मजदूरी के साथ यौन शोषण, क्या पीड़ित को मिलेगा न्याय?

जिस तरीके से एक सरकारी अधिकारी के यहां पड़ोसी देश नेपाल की बालिका को अपने घर में रख घरेलू कार्य करवाने के साथ ही यौन शोषण का आरोप लगा है, कहीं न कहीं यह मामला काफी शर्मनाक है। वही अगर सूत्रों पर यकीन करें तो उक्त अधिकारी ने नेपाल में पुलिस गिरफ्त से बाहर आने के लिए लाखों रुपये के प्रलोभन भी दिये। विश्वस्त सूत्रों ने कहा कि जिस तरीके से बाल यौन शोषण के मामले को पैसे के बल पर लीपापोती की जा रही, इससे इनकार नही किया जा सकता है कि बालिका को न्याय से वंचित होना पड़े। जिस तरीके से नेपाल पुलिस को लाखों का प्रलोभन भी देने की बात सूत्र बताते हैं वह संचित धन काला धन तो नहीं? यह भी एक जांच का बिषय है।

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