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नेपाल में प्रलयंकारी बाढ़ से भारी तबाही, तीन भारतीय नागरिकों सहित दर्जनों लापता

ग्लेशियर फटने की वजह से प्राकृतिक आपदा आने का अनुमान

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पहाड़ का टुकड़ा गिरने से नदी का मार्ग अवरुद्ध होने को भी वजह मान रहे विशेषज्ञ

ठोस नतीजे पर पहुंचने के लिए भूगोलविदों को है सेटलाइट तस्वीर का इंतजार

प्रलयंकारी बाढ़ में लापता एक भारतीय नागरिक का शव मिला

राजेश कुमार शर्मा की रिपोर्ट

जोगबनी/अररिया (voice4bihar news)। पिछले साल भारत में उत्तराखंड के चमोली में ग्लेशियर फटने से मची तबाही के बाद बीते मंगलवार को नेपाल में वैसी ही प्रलयंकारी बाढ़ आई है। हालांकि अभी यह पूरी तरह स्पष्ट नहीं है कि नेपाल में आई प्राकृतिक आपदा की वजह ग्लेशियर फटना है या कुछ और। ऐसे में मॉनसून से पहले ही नेपाल के पहाड़ी भाग में मची तबाही की वजह का पता लगाने में विशेषज्ञ जुट गये हैं। फिर भी आरंभिक तौर पर इस आपदा की वजह नदी के मार्ग का अवरुद्ध होना बताया जा रहा है।

मौसम वैज्ञानिकों को भी नहीं था इस घटना का अनुमान

आरंभिक तौर पर विशेषज्ञों में इस बात को लेकर असमंजस है कि नदी का मार्ग किसी ग्लेशियर की वजह से अवरुद्ध हुआ अथवा पहाड़ का टुकड़ा गिरने से। क्योंकि मंगलवार को जितनी रफ्तार व मात्रा में पानी का अचानक बहाव हुआ, इसका अनुमान वैज्ञानिकों को भी नहीं था। मिल रही जानकारी के अनुसार मंगलवार को मौसम विज्ञान विभाग की बाढ़ पूर्वानुमान शाखा ने नारायणी नदी में पानी का बहाव खतरे के निशान से ऊपर जाने का ‘अलर्ट’ जारी किया था, लेकिन सिन्धुपाल्चौक को जोखिमपूर्ण इलाके में नहीं रखा गया था।

बाढ़ की चपेट में आने से भारतीय व चीनी हाइड्रो प्रोजेक्ट के मजदूर लापता

जिला प्रशासन कार्यालय से जारी सूचना के अनुसार भारतीय हाइड्रो प्रोजेक्ट में कार्यरत भारतीय नागरिक कमल लोचन महतो, विजय वासुमंत्री व जिनडाऔ वासुमंत्री लापता बताये जाते हैं। इसी तरह चायनीज कंपनी के कर्मी चीनी नागरिक सन यु चुवान, यु चि झु र गोड एवं टियान छियो लापता हैं। वहीं स्थानीय नागरिकों के भी बाढ़ में लापता होने की बात जिला प्रशासन ने कही है।

एक भारतीय नागरिक का शव मिला

सिन्धुपाल्चौक में लापता हुए तीन भारतीय नागरिक में से एक का शव मिला है। इसके साथ ही नेपाल में आये प्रलयंकारी बाढ़ में जान गंवाने वाले विदेशी नागरिक की संख्या तीन हुई है। सिन्धुपाल्चौक के प्रमुख जिला अधिकारी अरुण पोखरेल के अनुसार भारतीय नागरिक कमल लोचन महतो का शव सिन्धुली में मिला है। वहीं गुरुवार की सुबह एक चीनी नागरिक का शव मिला था। वही एक अन्य शव की पहचान नहीं हो पाई है।

नेपाल में प्रलयंकारी बाढ़ का नजारा।
नेपाल में प्रलयंकारी बाढ़ का नजारा।

नदी में अनुमान से ज्यादा पानी आने के कई कारण बता रहे विशेषज्ञ

वैज्ञानिकों के आंकलन के विपरीत सिन्धुपाल्चौक में अनुमान से ज्यादा पानी आने के पीछे कई वजह बताये जा रहे हैं। विशेषज्ञों का तर्क है कि सिन्धुपाल्चौक के मेलम्ची क्षेत्र में मंगलवार को 24 घंटे में 29.2 मिलीमीटर वर्षा मापन किया गया था, जबकि इसी समय में पोखरा में 180.2, पाल्पा के तानसेन में 203 व चितवन में 252.8 मिलीमीटर बारिश मापी गयी।

दस मिनट में ही तहस-नहस हो गये हेलम्बु व मेलम्ची बाजार

बाढ़ पूर्वानुमान जलस्रोत शाखा के प्रमुख इंजीनियर विक्रम श्रेष्ठ के अनुसार मेलम्ची व इन्द्रावती नदी में पूर्वानुमान के विपरीत आए बाढ़ से करीब दस मिनट में ही हेलम्बु व मेलम्ची बाजार तहस-नहस हो गया। जब तक बाढ़ के खतरे के संकेत के लिए रखे गए साइरन बजता तब तक बाढ़ से सतर्क करने वाले सारे यंत्र ही बाढ़ में बह चुके थे।

मंगलवार की शाम तेजी से घटा जलस्तर, फिर अचानक आया जल प्रलय

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बाढ़ पूर्वानुमान कार्यालय के अनुसार मेलम्चीमा बाजार में पानी का बहाव पहले पांच मीटर था लेकिन अचानक से पानी का बहाव मंगलवार की शाम भारतीय समय अनुसार 5:25 बजे से एक घंटे तक तेजी से जलस्तर घटते हुए दो से तीन मीटर में जा पहुंचा था। इस नदी में अचानक एक घंटे में जलस्तर नीचे जाने का कारण नदी के ऊपरी भाग में पहाड़ से गिरे पत्थरों से नदी का रास्ता बंद होना बताया जा रहा है।

बाढ़ मापक यंत्र भी बहा ले गया बाढ़

इस बीच संध्या सात बजे के बाद मेलम्ची में जलस्तर एकाएक बढ़ कर 5.98 मीटर तक जा पहुंचा। इसके बाद कितना पानी इस नदी में आया, इसका विवरण बाढ़ पूर्वानुमान कार्यालय के पास नहीं है। इसकी वजह बताई जा रही है कि अचानक आए इस प्रलय में बाढ़ सूचक यंत्र के साथ ही वर्षा मापन केन्द्र ने भी जलसमाधि ली।

रविवार से पहाड़ी भाग में हो रही थी तेज बारिश

मौसम पूर्वानुमान शाखा के प्रमुख ने “voice4bihar news”से खास बातचीत में बताया कि रविवार से मेलम्ची बाजार के पांच किलोमीटर ऊपर भारी वर्षा हो रही थी। इस कारण मेलम्ची के मुहान क्षेत्र नाम्सागसाग का जलस्तर लगभग दोगुना हो गया। इसके बाद मंगलवार को दोपहर बाद मेलम्ची नदी में मौजूद परियोजना स्थल से करीब तीन किलोमीटर ऊपर मेलम्चीघ्याग पहाड़ से गिरे पहाड़ के पत्थर से कुछ समय के लिए नदी का रास्ता अवरुद्ध हो गया।

इसके नीचे के तटीय क्षेत्र में रह रहे लोगों को इस घटना की जानकारी नहीं हो पायी थी। जब अचानक से जलस्तर बढ़ कर भयावह बाढ़ का रूप अख्तियार कर लिया तब इसकी जानकारी स्थानीय नागरिकों को लगी। जब तक लोग संभल पाते, प्रलयंकारी बाढ़ ने सब कुछ बहा लिया।

यह भी पढ़ें : हिमालय में फिर मंडरा रहा ग्लेशियर फटने का खतरा, बिहार पर भी संकट के बादल

बाढ़ के बाद जमींदोज मकान।

बाढ़ से व्यापक नुकसान, कई पुल व निर्माणाधीन प्रोजेक्ट बह गये

मौसम पूर्वानुमान शाखा के प्रमुख श्रेष्ठ के अनुसार नाकोते नामक स्थान में नवनिर्मित मोटरेबल पुल बहने से बाढ़ की स्थिति और भयावह होती चली गयी। इसके कारण मेलम्ची परियोजना के मुहान क्षेत्र अम्बाथाग के डैम व भौतिक संरचना के साथ ही हेलम्बु गांवपालिका में रहे अन्य तीन मोटरेबल पुल भी बाढ़ में बह गये। इसके साथ ही मेलम्ची के मुहान क्षेत्र पहुंचने वाली सड़क पूरी तरह से कट जाने के कारण 12 घंटे तक कोई भी इस क्षेत्र में नहीं जा सका। ऐसे में मेलम्ची नदी में पहाड़ का बड़ा टुकड़ा गिरने व इसके फिर अचानक रास्ता खाली होने को ही इस प्रलयंकारी बाढ़ आने की प्रारंभिक वजह यह बताई जा रही है।

नेपाल भूगोल समाज के अध्यक्ष ने भी निकाला निष्कर्ष

नेपाल भूगोल समाज के अध्यक्ष व भूगोलविद प्रो. डा. नरेन्द्रराज खनाल ने बताया कि मेलम्ची के मुहान से ऊपर पांच पहाड़ी टूट कर गिरने की संभावना है, क्योंकि सात वर्ष पूर्व के विनाशकारी भूकंप के बाद पहाड़ में दरार पैदा हो गई थी। विगत के दिनों में दबाव पड़ने के कारण पहाड़ टूट कर गिरने से नदी का रास्ता बंद हो गया और यहां लगातार पानी जमा होता गया। इस बीच मंगलवार को अचानक से बने दवाब के बाद भारी बाढ़ आ गया।

पहाड़ी भाग में मौजूद ग्लेशियर टूटने से आया जल प्रलय!

भूगोलविद डा. खनाल यह भी बताते हैं कि इन्द्रावती नदी के ऊपरी क्षेत्र में छोटे-छोटे ग्लेशियर भी हैं, जो पहाड़ी भाग में मौजूद हैं। भारी बारिश के बाद ग्लेशियर फूटने से निचले भाग में बाढ़ का रूप ले कर यह तांडव मचा। क्योंकि पहाड़ी भाग के क्षेत्र में वर्षा मापन केन्द्र भी नहीं है। ऐसा इसलिए भी माना जा रहा है कि पानी के साथ ही मिट्टी व बालू बह कर आने से तीन मंजिली इमारत तक मलबे में दब गयी है। हालांकि ग्लेशियर फूटा या नहीं इसके लिए सेटेलाइट तस्वीर का इंतजार किया जा रहा है।

“Voice4bihar news” ने फरवरी माह में छापी थी विस्तृत रिपोर्ट

बता दें कि विगत फरवरी माह में ही “Voice4bihar news” ने अंतरराष्ट्रीय एकीकृत पर्वतीय विकास केन्द्र (इसिमोड) की रिपोर्ट के आधार पर हिमालय की गोद में रहे ग्लेशियर के फटने से सीमांचल के कोसी सहित पश्चिम के गंडकी में आने वाले समय जलप्रलय की बात कही थी। रिपोर्ट में बताया गया था कि हिमालय क्षेत्र में मौजूद सैकड़ों ग्लेशियर की वजह से नेपाल में उत्तराखंड की तरह जल प्रलय आ सकता है।

यह भी देखें : नेपाल के हिमालय में ग्लशियर फटा तो बिहार में भी आ सकती है उत्तराखंड जैसी तबाही

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