Header 300×250 Mobile

कोरोना काल में दिल का रखें खास ख्याल

कोरोना के इलाज में देरी से दिल के मरीज़ों में होती है गंभीर समस्या

- Sponsored -

256

- sponsored -

- Sponsored -

पटना (voice4bihar desk)। कोरोना काल में दिल पर खतरा बढ़ गया है। हार्ट हॉस्पिटल पटना और मगध मिथिला कार्डियक सेंटर पटना के चीफ़ कंसल्टेंट कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. आशीष कुमार झा ने दिल के मरीज़ों से वक्त पर इलाज कराने और कोरोना के डर से अपने स्वास्थ्य की खराब स्थिति को अनदेखा नहीं करने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि दिल से जुड़ी समस्याओं को नजर अंदाज नहीं करना चाहिए, क्योंकि यह जानलेवा साबित हो सकता है।

डॉ. आशीष कुमार झा

कई मामलों में, मरीज़ों में गंभीर समस्या विकसित हो जाती हैं, जैसे खून के थक्के या थ्रोम्बस बनना, जिससे कोरोनरी धमनियों में 100% रुकावट हो सकती है। विश्व के कई देशों के स्वतंत्र अध्ययनों ने महामारी के दौरान अस्पताल जाने उनके या उनके परिजनों  की मर्ज़ी न होने के कारण दिल के मरीज़ों के भर्ती होने में 50% की गिरावट की पुष्टि की है।

डॉ. झा ने कहा कि हृदय रोग के मरीज़ों को इस बात की जानकारी होनी चाहिए कि यदि उनके दिल की ऐसी हालत, है जिसे देखभाल की ज़रूरत है या दिल का दौरा पड़ने का कोई लक्षण है तो उन्हें उचित निदान और इलाज के लिए तुरंत अस्पताल में रिपोर्ट करना चाहिए। इस स्थिति में यदि स्टेंटिंग की ज़रूरत होती है, तो उन्हें कोविड संक्रमण के डर से भर्ती होने में देरी नहीं करनी चाहिए, क्योंकि सभी मल्टी-स्पेशियलिटी अस्पतालों में कोविड और गैर-कोविड मरीजों के वार्ड को अलग रखने के लिए सख्त प्रोटोकॉल हैं। कई मामलों में, विशेष रूप से दिल के मरीज़ों के अस्पताल पहुंचने में देरी करना जीवन के लिए खतरा हो जाता है।

विज्ञापन

डॉ. झा ने कहा कि किसी भी अन्य वायरल श्वास नली के संक्रमण की तरह, कोविड -19 उन मरीज़ों में जिनमें पहले से मौजूद कार्डियोवैस्कुलर डिज़ीज़ (CVD) है या जिनमें पहले से स्थापित कार्डियोवैस्कुलर डिज़ीज़ (CVD) है, उनमें बदतर परिणाम आ सकता है। यह इन मरीज़ों के कम कार्डियो-श्वसन रिजर्व के कारण या बीमारी के प्रणालीगत प्रभावों के कारण अंतर्निहित कार्डियोवैस्कुलर डिज़ीज़ (CVD) के बिगड़ने के कारण होता है।

कोरोना काल में दिल की बीमारी से पीड़ित मरीजों की मृत्यु दर 2.3 फीसद से बढ़कर 10.50 फीसद हो गयी है

कोराना महामारी पूर्व मौजूदा कार्डियोवैस्कुलर डिज़ीज़ के साथ मरीज़ों के दूसरों की तुलना में मृत्यु दर में बढ़ोतरी हुई है। रिपोर्ट की गई मृत्यु दर की रिपोर्ट में उच्च रक्तचाप के लिए 6%, मधुमेह मरीज़ों के लिए 7.3% और कार्डियोवैस्कुलर डिज़ीज़ के साथ उन लोगों के बीच 10.5% है, जबकि पूर्व में मृत्यु दर केवल 2.3% थी।

कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. झा हर समय पूरी सावधानी बरतने और सभी सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन करने की सलाह देते हैं, विशेष रूप से सार्वजनिक स्थानों पर। उन्होंने दिल के मरीज़ों को भीड़ से बचने का अभ्यास करने की सलाह दी, खासकर यदि वे 60 साल या उससे अधिक उम्र के हैं। साथ ही वे लगातार हाथ धोयें और सोशल डिस्टन्सिंग का पालन करें। हर समय जागरूक और सतर्क होना सर्वोपरि है पर दिल में डर पैदा न करें।

उन्होंने कहा कि आज भारत में उपलब्ध नई तकनीक और चिकित्सा उपकरण दिल के मरीज़ों के लिए वरदान साबित हो रहे हैं। अपने डॉक्टर पर भरोसा करें और अपने आप को कोविड-19 के साथ-साथ दिल की गंभीर हालत होने से खुद को सुरक्षित रखने के लिए सभी ज़रूरी सलाह का पालन करें।

- Sponsored -

- Sponsored -

- Sponsored -

- Sponsored