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100वें जन्मदिन पर शिद्दत से याद किये गए बिहार लेनिन शहीद जगदेव प्रसाद

समाजवाद के पुरोधा जगदेव बाबू को सासाराम में दी गयी विनम्र श्रद्धांजलि

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रोहतास से अभिषेक कुमार सुमन की रिपोर्ट

(voice4bihar desk)। “सौ में नब्बे शोषित हैं, शोषितों ने ललकारा है। धन-धरती और राजपाट में, नब्बे भाग हमारा है।” अथवा “10 का शासन 90 पर, नहीं चलेगा, नहीं चलेगा।” ….  जैसे राजनीतिक स्लोगन को अपनी जिंदगी का मकसद बनाने वाले शहीद जगदेश प्रसाद की कही बातें आज की राजनीति में बार-बार दुहराई जाती हैं। आज से 45-50 साल पहले बिहार की राजनीतिक फिजाओं में गूंजता जगदेव प्रसाद का यह नारा नारा देश के 90 प्रतिशत लोगों को शोषित बताता था और कहता था कि इस आबादी को हर जगह 90 फ़ीसदी भागीदारी मिलनी चाहिए। इन्हीं विचारों के कारण बिहार लेनिन के रुप में प्रख्यात जगदेव बाबू के बिना उस जमाने में बिहार में कोई सरकार पूरी नहीं होती। आज उनकी जयंती पर विभिन्न संगठनों ने उन्हें शिद्दत से याद किया।

इस मौके पर सासाराम में जगदेव प्रसाद स्मारक समिति, सासाराम के तत्वाधान में आज भारत के प्रथम स्मारक बौलिया रोड, जगदेव पथ, नूरनगंज, सासाराम में एक जयंती समारोह आयोजित किया गया। इसमें शोषितों, पीड़ितों, दलितों, आदिवासी, किसान, मजदूरों के मसीहा भारत लेनिन अमर शहीद जगदेव प्रसाद के 100वें जन्मदिन पर माल्यार्पण कर नमन किया गया। माल्यार्पण कार्यक्रम की अध्यक्षता शहीद जगदेव प्रसाद स्मारक समिति के अध्यक्ष रामकृपाल महतो ने की।

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धन-धरती और राजपाट में, नब्बे भाग हमारा है

माल्यार्पण के बाद सभा को संबोधित करते हुए मौर्य शक्ति के राष्ट्रीय अध्यक्ष रवि मौर्य ने उनके जीवन संघर्षों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जगदेव प्रसाद का जन्म एक गरीब किसान परिवार में तत्कालीन गया जिला वर्तमान जहानाबाद के शकुराबाद प्रखंड अंतर्गत कुरहारी ग्राम में 2 फरवरी 1922 को हुआ था। वह बचपन से ही काफी तेज तर्रार एवं अपनी कक्षा में प्रथम स्थान आते थे। छात्र जीवन में वे एक प्रखर वक्ता थे। क्रांतिकारी मिजाज के थे। जुल्म के खिलाफ बगावत करते थे। जुल्म उन्हें बर्दाश्त नहीं होता था। आगे चलकर जगदेव बाबू विधायक बने मंत्री बने। अपने सहयोगियों को मुख्यमंत्री तक भी बनाया। उन्हें पद की कोई लालसा नहीं रही। समाज सेवा में अपना सारा जीवन न्योछावर करने वाले ऐसे वीर बांकुरा व्यक्तित्व को मैं सौ बार नमन करता हूं।

उन्होंने कहा कि अमर शहीद जगदेव प्रसाद ने शोषित, पीड़ित, दलित, आदिवासी समाज के लिए अपने प्राणों की कुर्बानी कुर्था में 5 सितंबर को दी। जगदेव बाबू शोषित समाज दल की स्थापना कर इस देश में आजीवन शोषित वर्ग की लड़ाई लड़े। जिन पर जुल्म हो रहा था, जिन्हें दबाया जा रहा था सताया जा रहा था, जो लोग गुलामों की जिंदगी जी रहे थे…वैसे लोगों की लड़ाई लड़ते-लड़ते शहीद हो गए। जगदेव बाबू का नारा था शोषितों का राज, शोषितों के द्वारा, शोषित के लिए स्थापित हो। जगदेव बाबू अक्सर कहा करते थे “पहले पीढ़ी के लोग मारे जाएंगे, दूसरे पीढ़ी के लोग जेल जाएंगे, तीसरे पीढ़ी के लोग राज करेंगे। अंततोगत्वा जीत हमारी होगी।”

इस मौके पर कई वक्ताओं ने जगदेव प्रसाद के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डाला एवं उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया। मल्यार्पण कार्यक्रम में सत्य नारायण स्वामी, रविंद्र सिंह अधिवक्ता, रामाश्रय सिंह पूर्व मुखिया, हरिहर सिंह पूर्व शिक्षक, अशोक कुमार सिंह, ललित कुमार सिंह, निर्भय कुमार सिंह, अधिवक्ता साहेब प्रसाद सिंह, रामअवतार मौर्य, बाबूचंद सिंह, पवन कुमार सिंह, अजय कुशवाहा, डॉ महेंद्र मौर्य एवं कई लोग थे।

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