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विश्व शांति स्तूप में गूंजा बुद्धम् शरणम् गच्छामि…, गुलजार हुआ रत्नागिरी पर्वत

नालंदा स्थित विश्व शांति स्तूप के 52 वें वार्षिकोत्सव में जीवंत हुआ प्राचीन गौरवशाली इतिहास

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बिहार के राज्यपाल ने कहा- ज्ञान और दर्शन का केंद्र रही है राजगीर की धरती

कोरोना काल के कारण पिछले वर्ष नहीं मना था शांति स्तूप का वार्षिक उत्सव

बिहारशरीफ (voice4bihar news)। बिहार के नालंदा जिला स्थित राजगीर के रत्नागिरी पर्वत पर स्थित विश्व शान्ति स्तूप के 52 वें वार्षिकोत्सव में देश के प्राचीन गौरव को याद किया गया। एक वर्ष के अंतराल पर आयोजित वार्षिक समारोह कई मायने में यादगार रहा। मालूम हो कि कोविड-19 के बढ़ते प्रभाव के कारण बीते वर्ष विश्व शान्ति स्तूप का वार्षिकोत्सव नहीं मनाया गया था।

सोमवार 25 अक्टूबर को आयोजित समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में बिहार के राज्यपाल फागु चौहान ने शिरकत की। उन्होंने तायको बजाकर भगवान बुद्ध से राज्य में शांति, अमन-चैन व विकास की कामना की वार्षिकोत्सव को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि राजगीर ज्ञान, संस्कृति व दर्शन के केंद्र के रूप में अंतराष्ट्रीय स्तर पर जाना जाता है। आज बिहार सरकार ने पूरे राज्य में पर्यटन स्थलों का विकास काफी तेजी से कर रही है।

1969 में बौद्ध गुरु फुजी गुरुजी ने की थी विश्व शांति स्तूप की स्थापना

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इस विश्व शांति स्तूप की स्थापना आपान के बौद्ध गुरु फुजी गुरुजी के सौजन्य से सन 1969 में किया गया, जिसका उद्घाटन तत्कालीन राष्ट्रपति बीवी गिरी ने किया था। उसी समय यहां पर दो पर्वत श्रृंखलाओं को जोड़ते हुए रोपवे बनाया गया, ताकि पर्यटकों को आने में कठिनाई नहीं हो यहां पूरे भारत में पहला रोपवे का भी निर्माण हुआ था। आज इस रोपवे को अत्याधुनिक बनाया गया है, ताकि पर्यटकों को सुविधा हो।

दुनिया में शांति कायम रखना ही विश्व शांति स्तूप का मकसद

विश्व शांति स्तूप इस जगह पर बनाने का उद्देश्य शांति का ही था। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जापान पर परमाणु हमले की प्रतिक्रिया के रूप में राजगीर के रत्नागिरी पहाड़ी पर स्थापित यह स्तूप सर्वाधिक प्रसिद्ध बौद्ध स्तूप है। इस जगह से गृद्धकूट पर्वत सीधा दिखलाई पड़ता है। भगवान बुद्ध इसी गृद्धकूट पर्वत पर ही उपदेश देते थे। भगवान बुद्ध का राजगीर से बहुत बड़ा संबंध रहा है। राजगीर एक ऐसी अद्भुत जगह है जहां से सभी धर्मों का अटूट जुड़ाव है।

विश्व शांति स्तूप में धार्मिक संस्कार में भाग लेते राज्यपाल।
विश्व शांति स्तूप में धार्मिक संस्कार में भाग लेते राज्यपाल।

प्राचीन काल में वैभवशाली राजधानी के रूप में ख्यात था राजगीर

राज्यपाल ने कहा कि प्राचीन काल से ही राजगीर एक वैभवशाली राजधानी थी, जिस समय भगवान बुद्ध यहां पधारे थे। हम सब को शांति का मार्ग अपनाकर अग्रसर होने की जरूरत है। शांति का मार्ग ही सबसे उत्तम मार्ग है। इस समारोह में बोधगया, नालन्दा, राजगीर के अनेकों बौद्ध धर्म से जुड़े लोगों ने भगवान बुद्ध की पूजा अर्चना की वार्षिकोत्सव समारोह को लेकर रत्नागिरी पर्वत से लेकर शान्ति स्तूप के नीचे एवं आसपास के क्षेत्रों में व्यापक सुरक्षा बल की तैनाती की गयी थी।

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