Header 300×250 Mobile

खतरनाक है कोरोना की दूसरी लहर, तीन दिनों में छीन चुका है 35 जिंदगियां

एक साल में बिहार में 1651 लोगों की कोरोना से मौत हो चुकी है

- Sponsored -

369

- sponsored -

- Sponsored -

पटना (voice4bihar desk)। कोरोना की दूसरी लहर बिहार के लिए भी खतरनाक बनती जा रही है। बिहार में सिर्फ तीन दिनों में 35 लोगों की जान जा चुकी है। वहीं इस दौरान 8,943 लोग कोरोना संक्रमित हुए हैं। मरने वालों में आईएएस अधिकारी से लेकर राज्य के अन्य कई वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हैं जबकि संक्रमितों में राज्य सरकार के मंत्री से लेकर कई आलाधिकारी तक शामिल हैं।

पिछले साल मार्च में मुंगेर के सैफ नामक युवक को बिहार में कोरोना ने अपना पहला शिकार बनाया था। तब से अब तक कोरोना से बिहार में 1651 लोगों की मौत हो चुकी है। इस साल 14 मार्च तक बिहार में 1551 लोागों की मौत हुई। 14 मार्च से अब तक सौ लोगों की मौत हो चुकी है। 10 अप्रैल के बाद कोरोना से मृतकों की संख्या तेजी से बढ़ी है। 10 अप्रैल से 14 अप्रैल के बीच 47 लोगों की मौत हो गयी है।

आम कोरोना पीड़ितों को सरकारी अस्पतालों में नहीं मिल रही जगह

कोरोना पीड़ित आम लोगों को सरकारी अस्पतालों में जगह नहीं मिल रही है। यहां तक कि उन्हें कोरोना की वैक्सीन लेने के लिए भी भटकना पड़ रहा है। सरकार ने एक दर्जन से अधिक निजी अस्पतालों को भी कोरोना के इलाज की मंजूरी दी है। हालांकि यहां इलाज महंगा होने के कारण ये अस्पताल आम लोगों की पहुंच से दूर हैं।

कोरोना की टेस्टिंग पर उठ रहे सवाल

कोरोना की जांच रिपोर्ट को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। जांच रिपोर्ट में देरी की आम शिकायतों के बीच अब रिपोर्ट में भी गड़बड़ी की शिकायतें आ रहीं हैं। कहा जा रहा है कि कोरोना संक्रमित व्यक्ति की रिपोर्ट भी निगेटिव आ जा रही है। हालांकि विशेषज्ञ इसके लिए कोरोना के बदलते स्वरूप को जिम्मेदार बताते हैं।

विज्ञापन

उनका कहना है कि वर्तमान में आरटीपीसीआर किट जिस वायरस को पकड़ने में माहिर है नये संक्रमण में उस वायरस का स्वरूप ही बदला हुआ है। इस वजह से आरटीपीसीआर किट वर्तमान में विश्वसनिय नहीं रहे। इसके अलावा यह भी देखा जा रहा है कि नया वायरस गले और नाक में अपना ठिकाना नहीं बना रहा है। वह नाक और गले के रास्ते मानव शरीर में घुस भी रहा है तो सीधे फेफड़े तक पहुंच जा रहा है।

यही कारण है कि गले और नाक से स्वैब लेने पर कोरोना संक्रमण पकड़ में नहीं आ रहा है। इसके लिए सिटी स्कैन जैसी तकनीक का सहारा लेना पड़ रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किसी को स्वाद और सुगंध का पता नहीं चलना जैसे लक्षण उत्पन्न हो रहे हों तो वह सतर्क हो जाये, भले उसकी आरटीपीसीआर रिपोर्ट निगेटिव आयी हो। ऐसे व्यक्ति को खुद को तत्काल आइसोलेट कर लेना चाहिए ताकि संक्रमण को फैलने से रोका जा सके।

मुख्यमंत्री व उपमुख्यमंत्रियों ने ली कोरोना वैक्सीन की दूसरी खुराक

इस बीच, पूरे बिहार में टीकाकरण का अभियान भी जारी है। बुधवार तक राज्य में 54,64,210 लोगों को कोरोना से बचाव का टीका लगाया जा चुका है। राजधानी पटना के आईजीआईएमएस अस्पताल में बृहस्पतिवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार समेत दोनों उपमुख्यमंत्रियों तारकिशोर प्रसाद और रेणु देवी ने कोरोना से बचाव का दूसरा टीका लगवाया। देश भर में फिलहाल 45 वर्ष से ऊपर के लोगों को कोराना से बचाव के टीके लगाये जा रहे हैं।

कोरोना की दूसरी डोज लेने में आम लोगों को हो रही परेशानी

हालांकि वैक्सीन का दूसरा डोज लेने में आम लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। देश में कोवैक्सीन और कावीशील्ड नामक टीके लगाये जा रहे हैं। पहली खुराक लेने में कोई परेशानी नहीं है। जो टीका उपलब्ध है उसे लगाया जा सकता है पर दूसरा टीका वही लगवाना है जो पहला लगा है। ऐसे में कोवैक्सीन और कोवीशिल्ड के चक्कर में लोगों को परेशानी हा रही है।

- Sponsored -

- Sponsored -

- Sponsored -

ADVERTISMENT